एप्स फाइल्स के खुलासे के बाद जिन-जिन बड़े लोगों के नाम सामने आए दुनिया हैरान रह गई। अब दो इमराती लड़कियों के नाम इसमें सामने आ रहे हैं जो कि आपको चौंका देंगे। दरअसल जेफ्री एस्टीन का नाम पिछले कई सालों से विवादों में रहा है। यह एक बहुत अमीर अमेरिकन फाइनेंसर था जिस पर ह्यूमन ट्रैफिकिंग, सेक्स ट्रैफिकिंग और बहुत बड़े कथित अपराधों के आरोप लगे थे। उसके डेथ के बाद अमेरिका की जस्टिस सिस्टम ने कई रिकॉर्ड्स और ईमेल जारी किए हैं। जिन्हें कलेक्टिवली एबस्टीन फाइल्स कहा जाता है। इन रिकॉर्ड्स में उसकी कम्युनिकेशंस यानी ईमेल कांटेक्ट्स एसोसिएशंस शामिल हैं। जिसमें कई बड़े लोगों के नाम सामने आए हैं।
कुछ सच साबित हुए कुछ सिर्फ आरोप के तौर पर हैं। दरअसल अमेरिका के यूएस जस्टिस डिपार्टमेंट के नए रिकॉर्ड्स में दावा किया गया है कि एक सीनियर ईमेल डिप्लोमेट्स और महिलाओं के अधिकारों की बड़ी समर्थक मानी जाने वाली महिला ने जेफरी एफसींस के साथ सैकड़ों ईमेल्स का आदानप्रदान किया। इन दस्तावेजों के मुताबिक हिंद अल ओवैस नाम की महिला जो फिलहाल यूएई परमानेंट कमिटी फॉर ह्यूमन राइट्स की डायरेक्टर है और पहले यूनाइटेड नेशंस में सीनियर एडवाइजर रह चुकी है। उनका नाम एपस्टीन से जुड़े रिकॉर्ड्स में सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक हिंदवेस और जेफरी एस्टींस के बीच 2011 से 2012 के बीच हुई लगभग 669 ईमेल्स एक्सचेंज हुए थे। हालांकि इन ईमेल्स में हिंद अल ओवैस पर किसी भी तरह का क्रिमिनल रॉन्ग डूइंग नहीं लगाया गया है। यानी अपराधिक आरोप नहीं है। लेकिन रिकॉर्ड्स में यह दिखाया गया है कि दोनों के बीच बार-बार मुलाकात और सोशल मीटिंग्स को लेकर बातचीत होती रही। चलिए आपको दिखाते हैं ईमेल्स में क्या लिखा था।
जनवरी 2012 के एक ईमेल में हिंद अल ओवैज़ ने एपस्टीन को लिखा एक लड़की को तैयार करना ही मुश्किल होता है लेकिन दो लड़कियां तैयार करना तो सच में एक चैलेंज है। इसके जवाब में एफस्टीन ने लिखा कि क्या वो लोग 11:00 बजे के आसपास आ सकते हैं ताकि उसे यानी दोनों के साथ ज्यादा समय मिल सके। इसी महीने के कुछ दूसरे ईमेल्स में हिंद अल ओवज़ ने एफसीन से अपनी छोटी बहन को मिलवाने की बात भी कही। ईमेल्स में उन्होंने लिखा मेरी बहन यहां है और मैंने उसे आपके बारे में बहुत कुछ बताया। मैं चाहती हूं कि वह आपसे मिले। बताइए कब मिल सकते हैं? इसके बाद एफटी ने लंच का सुझाव दिया। इस पर हिंद ने जवाब दिया, मैं आपसे मिलने और आपको अपनी बहन से मिलवाने के लिए बहुत एक्साइटेड हूं। वह मुझसे भी ज्यादा खूबसूरत है। दस्तावेजों में कैलेंडर एंट्रीज और लॉजिस्टिकल मैसेज भी हैं। जिनसे यह पता चलता है कि दोनों के बीच सिर्फ एक बार नहीं बल्कि लगातार मीटिंग टाइम्स और प्लानिंग को लेकर बातचीत होती रही। हिंद अल ओवैस कई इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंसेस और यूएस लिंक इवेंट्स में दिखाई देती रही। जहां वह वुमेन राइट्स, जेंडर इक्वलिटी और ह्यूमन राइट्स पर भाषण देती हैं। एक पब्लिक स्पीच में उन्होंने कहा था महिलाओं में निवेश करना सिर्फ सही काम नहीं बल्कि यह समझदारी वाला काम भी है। बताया जाता है कि 1971 के बाद पहली इमराती महिला थी जो यूएन हेड क्वटर्स में सीनियर एडवाइजर बनी। उनका काम यूएन के सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स में जेंडर इक्वलिटी को जोड़ने से रहा है।
यूएस जस्टिस डिपार्टमेंट के रिकॉर्ड में कहीं भी यह नहीं कहा गया कि एफसींस ने हिंद अल ओवैस को यूएन में नौकरी दिलाने में कोई मदद की थी और ना ही यह आरोप लगाया है कि हिंद अल ओवस एसी के क्राइम्स में शामिल थी या उन्हें उसके अपराधों की जानकारी थी। हालांकि यह भी खबर सामने आ रही है कि हिंद अल ओवस को अब उनकी पोजीशन से हटा दिया गया है। इतना ही नहीं लोगों का यह भी दावा है कि हिंद अल ओवस ने अपना एक्स अकाउंट भी डिलीट कर दिया है और वह सोशल मीडिया से गायब हो गई हैं। अब दूसरी वायरल जानकारी यह है कि काबा का स्केयर्ड क्लोथ जिसे किसवा कहते हैं। किसी ने जेफरी एस्टीेन को भेजा था और यह पहली तस्वीर इसी से जुड़कर वायरल हो रही है। इसके पीछे वायरल क्लेम यही है कि इमिट्स की एक और महिला अजीजा अल अहमदी ने काबा क्लोथ एस्टीन के पास भेजा था। लेकिन इसे समझने के लिए जरूरी है कि हम इतिहास और कॉन्टेक्स्ट में जाएं। काबा यानी किस्सवा दुनिया की सबसे पवित्र वस्तुओं में से एक है। यह सिर्फ सऊदी अरेबिया के ग्रैंड मास्क्यू में ही इस्तेमाल होता है और बेहद सैक्रेड माना जाता है। अब सवाल यह उठता है कि क्या किसी ने सच में काबा क्लोथ को बिना इजाजत कहीं भेजा? क्या इसे एब्सेंस को भेजा गया? या यह सिर्फ अफवाह, मैनपुलेटेड फोटो या फेक क्लेम है। अभी तक किसी रिलायबल सोर्स अभी तक किसी रिलायबल अथॉरिटी जैसे सऊदी गवर्नमेंट या मॉस्क अथॉरिटी ने इसे कंफर्म नहीं किया है। कई बार वायरल फोटो में कॉन्टेक्स्ट बदल दिया जाता है या वो किसी दूसरे समय दूसरे जगह की तस्वीर होती है। लेकिन सोशल मीडिया उसे एक नए एंगल से पेश कर देता है। अब जैसे ही हिंद अलोवेज और काबा क्लोथ वाले नाम सामने आए सोशल मीडिया पर कई लोग अलग-अलग बयान दे रहे हैं।
कुछ लोग कह रहे हैं कि इमराती वुमेन को मुस्लिम कम्युनिटी को बदनाम करने के लिए टारगेट किया जा रहा है। कुछ लोग डरते हुए कहते हैं, यह सुनकर गलत बयान फैल रहा है और कुछ लोग बिना किसी प्रमाण के तुरंत मान लेते हैं कि यह सब सच है और भारी साजिश है। कुछ लोगों ने कहा कि इमराती वुमस अच्छी नहीं होती।