काबा की पवित्र चादर किजवा को लेकर सामने आई एक नई तस्वीर ने दुनिया भर में बड़ी बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर लोग हैरान भी हैं और नाराज भी। यह मामला तब चर्चा में आया जब अमेरिका के न्याय विभाग यानी डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस द्वारा जारी किए गए जेफरी एफस्टीन से जुड़े दस्तावेजों में एक तस्वीर सामने आई। इस तस्वीर में कथित तौर पर काबा की चादर का एक हिस्सा जमीन पर बिछा हुआ दिखाई दे रहा है और उसके पास एप्सन तथा अमीरात उद्योगपति सुल्तान अहमद बिन सुलायम खड़े नजर आ रहे हैं। काबा इस्लाम का सबसे पवित्र स्थल है जो सऊदी अरब के मक्का शहर में स्थित है। हर साल लाखों हजारों मुसलमान हज और उमरा के लिए यहां पहुंचते हैं। काबा पर जो काली चादर चढ़ाई जाती है उसे किवा कहा जाता है। यह साधारण कपड़ा नहीं होता। इसे खास रेशमी कपड़े से बनाया जाता है और उस पर सुनहरे धागों से कुरान की आयतें कढ़ाई की जाती हैं। इसकी तैयारी में महीनों लगते हैं और इसे बेहद सम्मान के साथ संभाला जाता है।
हर साल इस्लामी कैलेंडर के पहले महीने मुहर्रम के पहले दिन पुरानी किस्वा को हटाकर नई चादर चढ़ाई जाती है। पुरानी चादर को फेंका नहीं जाता बल्कि उसे सुरक्षित रखा जाता है। और उसके कुछ छोटे हिस्से खासतौर पर चुनिंदा लोगों, राजनयिकों या संस्थाओं को भेंट किए जाते हैं। यह प्रक्रिया सख्त नियमों और निगरानी के तहत होती है। आमतौर पर यह निजी व्यापार या निजी संग्रह का हिस्सा नहीं बनती। दस्तावेजों के अनुसार साल 2017 में किवा के तीन टुकड़े अमेरिका में जेफरी एपस्टीन के पते पर भेजे गए थे। बताया गया है कि इन्हें अंतरराष्ट्रीय हवाई मार्ग से भेजा गया और कस्टम दस्तावेजों में इन्हें आर्ट वर्क यानी कलाकृति के रूप में दर्ज किया गया। ईमेल के आदानप्रदान में यूएई के एक संपर्क और सऊदी अरब के एक मध्यस्थ के बीच बातचीत का उल्लेख भी है। इस ईमेल में बिल कस्टम कागजात और डिलीवरी की जानकारी शामिल थी। एक ईमेल में किस्वा के बारे में लिखा गया था कि इसे लाखों तीर्थ यात्रियों ने छुआ है। जिनकी धुआएं, उम्मीदें और आंसू इसमें समाए हैं। इस पंक्ति ने लोगों की भावनाओं को और गहरा कर दिया क्योंकि इससे साफ है कि यह सिर्फ कपड़ा नहीं बल्कि आस्था और श्रद्धा का प्रतीक है। ऐसे में जब इसकी तस्वीर एक निजी घर में वह भी एक विवादित व्यक्ति के घर में जमीन पर बिछी हुई दिखाई देती हैं, तो लोगों की भावनाएं आहत होना स्वाभाविक है। जेफरी एप्सीन पहले ही कई गंभीर आरोपों का सामना कर चुके हैं और आजकल सोशल मीडिया पर एप्सन फाइल्स के नाम से काफी ज्यादा चर्चा में हैं।
वो एक दोषी यौन अपराधी था और उसके संबंध कई प्रभावशाली लोगों से जुड़े रहे हैं। ऐसे व्यक्ति के घर में इस्लाम के सबसे पवित्र स्थल से जुड़ी वस्तु का मिलना और फिर उसकी तस्वीर सामने आना मुस्लिम समुदाय के लिए गहरी चिंता का विषय बन चुका है। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसे अपमानजनक भी बताया है। कुछ ने कहा कि पवित्र वस्तुओं का इस तरह इस्तेमाल करना धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना है। हालांकि दस्तावेजों में यह साफ नहीं है कि इन टुकड़ों को भेजने का असली उद्देश्य क्या था? क्या यह आधिकारिक अनुमति के साथ भेजे गए थे या किसी प्रकार का उपहार था या इसके पीछे कोई और कारण था? इन सवालों के स्पष्ट जवाब अभी तक सामने नहीं आए हैं। सऊदी अरब या यूएई की ओर से भी इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। धार्मिक विद्वानों का कहना है कि किस्वा के छोटे टुकड़े कभी-कभी सम्मान के तौर पर दिए जाते हैं। लेकिन यह प्रक्रिया बेहद मरदित और औपचारिक होती है। यानी कि ऑफिशियल होती है। इसे किसी निजी सजावट या प्रदर्शन की वस्तु की तरह इस्तेमाल करना परंपरा के अनुरूप नहीं माना जाता। इसी कारण कई लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि अगर यह टुकड़े आधिकारिक रूप से दिए गए थे तो क्या उनका उपयोग सम्मानजनक तरीके से किया गया? इस घटना ने एक बड़ी बहस को जन्म दे दिया है। आज के समय में जब दुनिया ग्लोबल हो चुकी है तो क्या धार्मिक और पवित्र वस्तुओं को निजी संग्रह का हिस्सा बनाना सही है? क्या उन्हें सिर्फ आर्ट या कलेक्शन की नजर से देखना उचित है? या फिर उन्हें उनके धार्मिक और सांस्कृतिक संदर्भ में ही रखा जाना चाहिए। यह बहस है जिस पर चर्चा हो रही है।
यह सवाल केवल इस्लाम तक सीमित नहीं है। दुनिया भर में अलग-अलग धर्मों की पवित्र वस्तुओं को लेकर ऐसे विवाद होते रहे हैं। फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है। तस्वीरें सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रही हैं। इसको लेकर तरह-तरह के आर्टिकल्स लिखे जा रहे हैं। लोग तथ्यों की पूरी जांच की मांग कर रहे हैं। खासकर जो मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। इस्लाम को मानते हैं। कुछ लोग शांति और धैर्य के साथ सच्चाई सामने आने का इंतजार करने की बात कर रहे हैं तो कुछ लोग कड़ी कारवाई की भी मांग कर रहे हैं। साफ है कि किस्वा जैसी पवित्र वस्तु से जुड़ा कोई भी विवाद करोड़ों लोगों की भावनाओं से सीधे जुड़ जाता है। आने वाले समय में संभव है कि इस मामले पर और भी जानकारी सामने आए। तब तक यह घटना कई अनसुलझे सवाल छोड़ रही है। बड़ी बात यह है कि एस्टीन फाइल्स का मामला आजकल सोशल मीडिया पर खूब ट्रेंड कर रहा है। इसको लेकर तरह-तरह की रील्स बनाई जा रही हैं। तरह-तरह के तथ्य सामने आ रहे हैं। 1998 से शुरू हुआ यह पूरा विवाद कहां जाकर खत्म होगा? इसकी जड़े कितनी गहरी हैं इसको लेकर चर्चा शुरू हो चुकी है और इसी एप्सन फाइल से जुड़ा हुआ सबसे विवादित नाम जेफरी एपस्टीन का है और उन्हीं के घर पर इस तरह का किस्वा का मिलना और सोशल मीडिया पर उस तरह की तस्वीरों का वायरल होना कई तरह के सवाल और विवाद और चर्चाओं को जन्म दे रहा है। क्योंकि किस्वा केवल एक कपड़ा नहीं बल्कि विश्वास, सम्मान और आध्यात्मिकता से जुड़ा हुआ उसका एक प्रतीक है। इसीलिए जब भी उससे जुड़ी हुई कोई असामान्य या विवादित खबर सामने आती है, उसका असर गहरा और व्यापक होता है। खासतौर पर इस्लामिक दुनिया में। दुनिया अब यह जानना चाहती है कि सच क्या है? इस पूरे मामले में जिम्मेदारी आखिर किसकी है? हालांकि अभी तो यह सिर्फ शुरुआत है। इसको लेकर बहस तेज है। प्रतिक्रियाएं सोशल मीडिया पर जमकर आ रही हैं।
लेकिन इसके पीछे तथ्य क्या है? सच्चाई क्या है? इसका इंतजार हर किसी को है। कोई आक्रामक तरीके से उसका इंतजार कर रहा है सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करके तो कोई ठहराव के साथ शांति से इसकी कारवाई की मांग कर रहा है और इसके पीछे की जो सच्चाई है उसका इंतजार कर रहा है।