विनोद खन्ना ओशो के आश्रम में रोते रहते थे उस औरत की वजह से

विनोद खन्ना ओशो में कैसे रहते थे? विनोद खन्ना ओशो से वापस क्यों आए? और वापस आने के बाद क्या ओशो ने उन्हें कांटेक्ट किया? यह सारी बातें एक मिस्ट्री ही है। क्योंकि ना विनोद खन्ना साहब ने इसके बारे में कभी बात किया और ना ही उस दौरान विनोद खन्ना के साथ कोई था जो इतना डिटेल में बता पाए। लेकिन अब विनोद खन्ना की वाइफ कविता ने अपने YouTube चैनल पर रिवील किया है कि ओशो के आश्रम में एक टाइम के बाद क्या कुछ होने लगा था और कैसे विनोद खन्ना घर आने के लिए तड़पते थे। कविता ने जो कुछ बताया है ओशो आश्रम के लिए वो बेहद शॉकिंग है।

हम सब जानते हैं कि ओशो का आश्रम पहले पुणे में था। लेकिन यहां पर जब विवाद खड़ा हुआ तो वह यूएस ओरेगॉन चले गए। ओशो के सारे फॉलोअर्स भी उनके साथ-साथ उनके पीछे-पीछे उन्हीं के ओरेगॉन वाले आश्रम में जाकर रहने लगे और वहां पर आश्रम नहीं बल्कि पूरी एक कॉलोनी एक पूरा शहर ओशो ने बसा दिया था। विनोद खन्ना भी वहां पर थे लेकिन एक टाइम आया ऐसा जब ओशो साइलेंस में चले गए। वो कुछ बोलते ही नहीं थे। उन्होंने मौन धारण कर लिया था और तब ओशो के पूरे आश्रम को संभालती थी ओशो की असिस्टेंट मां शीला। कविता ने बताया कि उस दौरान आश्रम इलेक्शंस में खड़ा होना चाहता था और तब काफी अजीब-अजीब चीजें होने लगी। उन लोगों के पास अपनी पर्सनल आर्मी भी थी। AK-47 भी थे उन लोग के पास।

किसी को समझ ही नहीं आ रहा था कि वहां पर क्या हो रहा है। और तो और एक टाइम पर पानी में भी जहर मिला दिया गया। यह जहरीला पानी पीकर विनोद खन्ना भी बीमार हो गए थे। उन्होंने मां आनंद शीला को एक शैतान टाइप की औरत बताया। विनोद खन्ना के लिए यह बहुत एक टफ समय था। एक डर भरा समय था। डर इसलिए नहीं कि वो वहां आश्रम में अटक गए थे। डर इसलिए कि वो अपने बच्चों को नहीं देख पा रहे थे और उन्हें इस बात से रोना आता था कि अगर वह वापस इंडिया चले गए तो वो यूएस नहीं आ पाएंगे। एक टाइम ऐसा आ गया था जब विनोद खन्ना साहब अपने आप को बहुत हेल्पलेस महसूस करने लगे थे। वो तो विनोद खन्ना साहब के एक कजिन बीच में आए जो ओरेगॉन गए और वहां से विनोद खन्ना साहब को वापस इंडिया लेकर आए।

विनोद खन्ना साहब इंडिया आए और उन्होंने अपनी बीवी से वादा किया कि वो अच्छे से अब अपना काम करेंगे। अपनी लाइफ के बेस्ट शॉट्स वो आने वाले टाइम में देंगे। लेकिन हर बार वो शूट पर जाते और अपनी वैनिटी में बैठकर रोते रहते। कविता ने यह भी रिवील किया कि जब ओशो ओरेगॉन छोड़कर दिल्ली आ गए तब विनोद खन्ना साहब खुद उनसे मिलने के लिए दिल्ली गए थे और ओशो को अपनी गाड़ी में बिठाकर मनाली घुमाने लेकर गए थे। तब उन्होंने ओशो के साथ एक अच्छा टाइम भी स्पेंड किया था और तब ओशो ने अपने दिल की बात विनोद खन्ना से शेयर की थी और कहा था कि तुम मेरा पुणे वाला आश्रम संभाल लो। लेकिन विनोद खन्ना ने मना कर दिया। यह पहली बार था जब विनोद खन्ना ने अपने गुरु को ना कहा था। उसके बाद विनोद खन्ना कभी भी ओशो से नहीं मिले और उनका करियर बहुत अच्छा चला। तो इनडायरेक्टली कविता ने कह दिया है कि ओशो के आश्रम में चीजें गड़बड़ होने लगी थी।