यौन अपराधी एप्सीन ने माना था कि उसकी बदनाम छवि उद्योगपति अनिल अंबानी के लिए समस्या बन सकती है। जेफरी एप्सन से जुड़ी नई फाइलें सामने आई हैं। इन दस्तावेजों में अनिल अंबानी और एपस्टीन की ईमेल के जरिए हुई बातचीत सामने आई है। पिछले हफ्ते संसद के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि अमेरिकी न्याय विभाग की एप्सन फाइलों में केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी और उद्योगपति अनिल अंबानी का जिक्र है। इस आरोप को हरदीप पुरी ने खारिज कर दिया था। इस मामले में अनिल अंबानी की तरफ से अब तक कोई जवाब या सफाई नहीं आई है। जारी फाइलों के मुताबिक फरवरी 2017 से मई 2019 के बीच अनिल अंबानी और एपस्टीन के बीच ईमेल और आई मैसेज पर कई दफा
बातचीत हुई। इसमें दोस्ती, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरे, रक्षा सौदे में दिलचस्पी और डेजर्ट जैसे अलग-अलग विषयों पर बातचीत हुई है। इंडियन एक्सप्रेस के खबर के मुताबिक दस्तावेज बताते हैं कि दुबई पोर्ट वर्ल्ड के सीईओ सुल्तान अहमद बिन सुलायम ने 22 फरवरी 2017 को अनिल अंबानी का कांटेक्ट एपस्टीन को भेजा था। अगले ही दिन दोनों की बातचीत शुरू हो गई और दो हफ्ते के भीतर अनिल अंबानी पेरिस में एपस्टीन के घर पर डिनर पर भी गए थे। इसके 4 महीने बाद एफस्टीन ने एक मैसेज में माना कि उसकी बदनाम छवि अनिल अंबानी के लिए समस्या बन सकती है। उसने
लिखा मेरे घर पर कई फाइनेंस से जुड़े लोग मौजूद हैं। आपको अच्छा लगेगा। अगर Google पर मेरी छवि को लेकर आप परेशान हैं तो कई मंत्रियों की मौजूदगी उसका असर कम कर देती है। तब तक एप्सन अमेरिका में नाबालिगों के यौन शोषण के मामले में दोषी ठहराया जा चुका था और एक रजिस्टर्ड सेक्स ऑफेंडर था। 2008 में उसे कुछ समय के लिए जेल भी जाना पड़ा था। जुलाई 2019 में उसे फिर से सेक्स ट्रैफिकिंग के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और अगले ही महीने जेल में उसकी मौत हो गई। इंडियन एक्सप्रेस ने फाइलों के हवाले से अपनी रपट में लिखा है कि फरवरी 2019 में जब भारत के सुप्रीम कोर्ट ने निजी गारंटी वाले लोन का भुगतान ना करने पर
अनिल अंबानी को आपराधिक अवमानना का दोषी ठहराया था तब एप्सन ने उन्हें मैसेज किया था। मैसेज में लिखा है कि जिंदगी में कोई इंसान कितना भी ऊंचे मुकाम पर पहुंच जाए वो एक दूसरे होलोकॉस्ट सर्वाइवर को तुरंत पहचान लेता है। तुम सुल्तान और मैं एक जैसे लगते हैं। होलोकॉस्ट सर्वाइवर मतलब वे लोग जो दूसरे विश्व युद्ध के समय नाजी शासन के दौर में हुए नरसंहार में बच गए थे। इस बातचीत में अनिल अंबानी ने एपस्टीन से कहा कि वह उनके लिस्टेड शेयरों के आधार पर पैसे जुटाने में मदद करें। लेकिन एप्सन ने कोई पक्का जवाब नहीं दिया। उसने पूछा कि शेयरों की कीमत क्या है और कहा कि शेयरों के बदले लोन लेना मुश्किल होता है। उसने सुझाव
दिया कि पैसे जुटाने के लिए दूसरे तरीके भी सोचे जा सकते हैं या सोचे जाने चाहिए और यह भी कहा कि शेयरों का पिछला रिकॉर्ड शायद अच्छा नहीं है। एक और मैसेज से पता चलता है कि 23 मई 2019 को मैनहटन में एपस्टीन के घर जाने के बाद अनिल अंबानी ने एपस्टीन के सुझाव पर सहमति जताई कि मोदी शायद स्टीव बेनन से मिलना पसंद करेंगे। बेनन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल में मुख्य रणनीतिकार रह चुके हैं। बाद में ऐसी किसी मुलाकात का जिक्र दस्तावेजों में नहीं मिलता है। दस्तावेजों में यह भी दिखता है कि 2017 में अनिल अंबानी और एपस्टीन के बीच रक्षा सौदों और भारत अमेरिका संबंधों पर बातचीत हुई थी। एस्टीन ने इजराइल के पूर्व
प्रधानमंत्री एहूद बराक का संपर्क भी साझा किया था और कहा था कि वह खुद रक्षा कारोबार से दूर रहते हैं। एस्टीन और अंबानी ने कई बार डिफेंस डील पर बात की। मार्च 2017 में अंबानी ने यानी कि अनिल अंबानी ने एस्टीन को मैसेज किया। आपसे बात करके अच्छा लगा। आपके सुझाव और सलाह के लिए धन्यवाद। डिफेंस बहुत अहम है। उन्होंने यह भी लिखा कि भारत, अमेरिका संबंध और रक्षा सहयोग में मामले में वाइट हाउस से बात करने को लेकर मुझे आपके गाइडेंस की जरूरत होगी। इसके जवाब में एपस्टीन ने कहा कि आपका ध्यान बिल्कुल सही दिशा में है। फिर उसने लिखा कि मैंने आपको एहूद बराक का कांटेक्ट भेज दिया है। मेरे हिसाब से वह सबसे बेहतर
है। मैं व्यक्तिगत रूप से किसी भी तरह के रक्षा कारोबार में नहीं पड़ता। अगले महीने अंबानी ने अमेरिकी सुरक्षा सलाहकार मैकमास्टर के दिल्ली आने की बात कही। इस पर एपस्टीन ने मैसेज किया कि उनका ध्यान सिर्फ इस समय आईएसआईएस उत्तर कोरिया, ईरान और पाकिस्तान जैसे मुद्दों पर है। फिर एपस्टीन ने पूछा कि आप किस चीज पर फोकस कर रहे हैं? अंबानी ने जवाब दिया कि भारत-पाकिस्तान रक्षा मुद्दे पर। तो फिलहाल इस खबर में इतना ही। आपकी इस खबर पर क्या राय है हमें कमेंट करके जरूर बताएं। मेरा नाम आसिफ है। कैमरे के पीछे हमारे साथी मोहन है।