कैसे बेवकूफ बना रहे है दुनिया को खुद को निर्दोष बता के राजपाल यादव ये है असली कहानी |

राजपाल यादव के साइट की कहानी तो सभी को पता है और इस कहानी को काफी इमोशनल तरीके से पब्लिक के बीच भुना भी लिया गया है। लेकिन उस बिजनेसमैन का क्या जिसने राजपाल यादव को पैसा दिया और अपने ही पैसे के लिए उसे सालों इंतजार करना पड़ा। प्रताड़ना झेलनी पड़ी। बिजनेसमैन माधव गोपाल अग्रवाल पहली बार मीडिया में बोले और पूरी कहानी बताई कि कैसे राजपाल यादव से मुलाकात हुई और कैसे उन्होंने राजपाल यादव की मदद की। जब वह पूरी तरह खत्म होने वाले थे। माधव गोपाल अग्रवाल ने बताया कि राजपाल यादव से उनकी मुलाकात हुई पॉलिटिशियन मिथिलेश कुमार के थ्रू। वही राजपाल यादव को उनके ऑफिस लेकर आए थे और बातचीत हुई। तब राजपाल यादव ने बताया कि उन्होंने एक फिल्म बनाई है अता पता लापता और इस फिल्म को रिलीज़ करने के लिए पैसा चाहिए।

अगर पैसे नहीं मिले तो राजपाल यादव बर्बाद हो जाएंगे। माधव गोपाल ने कहानी सुन ली लेकिन इंस्टेंटली पैसा देने के लिए हां नहीं कहा था। लेकिन इसके बाद राजपाल यादव जब भी दिल्ली आते या शाहजहांपुर आते तो उनसे मिलते। इसी बीच राजपाल यादव की पत्नी राधा ने भी माधव गोपाल अग्रवाल को मैसेज किया और बताया कि आप मेरे पिता तुल्य हैं और आपकी मदद रहेगी तो हम बहुत बड़ी मुसीबत से बाहर निकल जाएंगे। इस तरह के इमोशनल मैसेजेस किए गए। इन मैसेजेस का प्रूफ माधव गोपाल के पास अभी भी है। उन्होंने कहा है कि जो भी मैं बोल रहा हूं वह तथ्य के साथ ही बोल रहा हूं। कुछ महीने निकले और उसके बाद फाइनली माधव गोपाल अग्रवाल ने राजपाल यादव की मदद की। एक एग्रीमेंट किया गया और इस एग्रीमेंट के साथ उन्होंने एक प्रॉमिसरी नोट भी राजपाल यादव से साइन करवाया गया। माधव गोपाल का कहना है कि प्रॉमिसरी नोट तभी साइन

किया जाता है जब लोन लिया जाता है। जब इन्वेस्टमेंट किया जाता है तब प्रॉमिसरी नोट साइन नहीं होता है। उन्होंने कहा कि पैसा देने के बाद राजपाल यादव ने अमिताभ बच्चन से अपनी फिल्म की अनाउंसमेंट करवाई और एक बड़ा इवेंट किया। उसमें भी माधव अग्रवाल को उन्होंने इनवाइट नहीं किया। इसके अलावा फिल्म की रिलीज के पहले सारी नेगेटिव्स माधव अग्रवाल को डिपॉजिट करवानी थी। वो भी राजपाल यादव ने नहीं की। जिसके बाद यह मामला कोर्ट में पहुंचा। इसके बाद राजपाल यादव ने जो पैसा लौटाने की बात

कही थी, वह पैसा भी उन्होंने नहीं लौटाया। तो मामला कोर्ट में पहुंचा और कोर्ट में यह तय हुआ कि राजपाल यादव कुछ-कुछ महीनों में थोड़ा-थोड़ा पैसा करके यह पूरा पैसा चुका देंगे और इसके एवज में ही उन्होंने कोर्ट में सात साइन चेक दिए थे। साल भर में वह पैसा चुकाने वाले थे। तो कोर्ट से ही वो चेकक्स माधव अग्रवाल को मिले जो उन्होंने डिपॉजिट करवाए और वो सारे चेक बाउंस हो गए। माधव अग्रवाल ने यह भी बताया कि उनके लिए यह सिर्फ एक फाइनेंशियल सफरिंग नहीं थी। पर्सनल सफरिंग भी थी क्योंकि अपने पैसे के लिए वह राजपाल यादव के घर भी गए। वहां पर बच्चों की तरह रोए और

कहा कि मुझे पैसों की जरूरत है। मैं इतना बड़ा बिजनेसमैन नहीं हूं। मैंने भी आपको पैसे दिए हैं तो इधर-उधर से लेकर दिए हैं। वो पैसे मुझे चुकाने हैं। मुझे प्लीज मेरे पैसे दे दो। हर बार एक नया आश्वासन मिलता लेकिन पैसे नहीं मिलते। माधव अग्रवाल ने कहा कि एक बार वह राजपाल यादव से मिलने के लिए मुंबई पहुंचे। वहां पर उन्होंने होटल में कमरा बुक करवाया। राजपाल यादव को इनफॉर्म भी किया। राजपाल यादव ने कहा कि मैं कल आकर मिलता हूं। दूसरे दिन जब माधव अग्रवाल ने उन्हें कॉल किया तो राजपाल

यादव का फोन स्विच ऑफ मिला और 3 दिन तक राजपाल यादव गायब रहे। इसी बीच माधव अग्रवाल को पता चला कि राजपाल यादव तो मुंबई में है ही नहीं। वो झूठ बोल रहे हैं। वह तो जयपुर में शूटिंग कर रहे हैं। तब माधव अग्रवाल ने राजपाल यादव से पूछा कि आप तो जयपुर में शूट कर रहे हैं। तो उन्होंने कहा कि क्या करूं? मुझे जयपुर आना पड़ गया। कुछ इस तरह से माधव अग्रवाल को बातों में घुमाया गया। अपने ही पैसों के लिए उन्हें प्रताड़ित किया गया। माधव अग्रवाल ने कहा कि इतना सब होने के बाद भी वह

डायरेक्ट कोर्ट नहीं पहुंचे थे। इनिशियली जो एग्रीमेंट था उसके तीन बार सब एग्रीमेंट्स किए और हर बार नियम शर्तें चेंज की कि अब राजपाल यादव के लिए थोड़ा ई किया जाए एग्रीमेंट ताकि पैसा वो चुका पाए। लेकिन राजपाल यादव ने फिर भी पैसा नहीं चुकाया। तब जाकर यह मामला कोर्ट में पहुंचा। कोर्ट की शर्तें राजपाल यादव ने ही मानी थी कि हां मैं चेक के थ्रू पैसा दे दूंगा लेकिन वह पैसा भी वह नहीं दे पाए। तो कोर्ट को जो सही लगता है कोर्ट में यह मामला चल रहा है तो कोर्ट ने ही जो फैसला सुनाया है वो इस पूरे मामले को देखते हुए ही सुनाया है। माधव अग्रवाल ने कहा है कि वो कोर्ट के हिसाब से चल रहे हैं और कोर्ट जैसे-जैसे उनका पैसा दिलवाएगा वो बस उसी का

इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने यह भी क्लियर किया है कि मैं एक बिजनेस परिवार से मेरी फैमिली का हर एक मेंबर बिजनेसमैन है और जैसा राजपाल यादव ने दावा किया कि मेरा पोता फिल्म इंडस्ट्री में आना चाहता है। तो पहली बात बता दूं मेरा पोता 12 13 साल का है। उसकी उम्र ही नहीं हुई है हीरो बनने की और मेरे सारे बच्चे बिजनेस में ही हैं। कोई भी फिल्म इंडस्ट्री से ताल्लुकात नहीं है।