400 करोड़ रुपये की लागत में बना जबलपुर भोपाल एनएच 45 का एक हिस्सा धंसा, दिसंबर में भी टूटा था पुल

₹400 करोड़ इतने में तो कई छोटे शहरों की किस्मत बदल जाती है। लेकिन एक पुल है जो इतनी लागत से बना और दूसरी बार टूट गया। कुछ वैसे ही जैसा 1980 में आई आशा फिल्म के गाने में बयां किया गया था। शीशा हो या दिल हो टूट जाता है। यहां मौजूदा परिस्थिति को ऐसे मैच किया जा सकता है कि भरोसा हो या पुल हो टूट जाता है। मामला जबलपुर भोपाल एनएच 45 का है। करीब 4 साल पहले बड़े धूमधाम से यह ब्रिज बना। 56 कि.मी. लंबा रास्ता। बड़ी-बड़ी बातें और विकास के दावे, ठेका मिला था मेसर्स बांगड़ कंपनी को। अब उसी ब्रिज का शहपुरा के पास रेलवे क्रॉसिंग के ऊपर बना हिस्सा धंस गया। या यूं कहें कि फिर से धस गया है क्योंकि दिसंबर 2025 में

भी इसी पुल का एक हिस्सा टूट गया था और अब शहपुरा के पास रेलवे क्रॉसिंग पर बना ब्रिज का यह हिस्सा धंस गया। जिसके बाद मौके पर गाड़ियों का आना जाना रोक दिया गया। रास्ता बंद होने के बाद गाड़ियों को शपुरा बस्ती के अंदर के रास्ते से डायवर्ट किया गया। फिलहाल टेक्निकल टीम धसे हिस्से की जांच कर रही है। जानकारी मिलने के बाद मौके पर वरिष्ठ अधिकारी पहुंच गए और स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन जरा सोचिए कि जिस जगह पर ब्रिज टूटा है उसके लगभग 50 मीटर के दायरे के नीचे से रेलवे ट्रैक गुजरता है। अगर यह हिस्सा उस ट्रैक पर गिर जाता उस वक्त कोई ट्रेन गुजर रही होती तो बड़ा हादसा हो सकता था। उधर हाईवे का जो हिस्सा गिरा है उस पर एनएचएआई यानी नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया की तरफ से सफाई भी आई है। एनएचएआई ने साफ किया है कि ब्रिज का जो हिस्सा गिरा है वह एनएचएआई के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। इसके रखरखाव की जिम्मेदारी एमपीआरडीसी यानी मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के तहत है। मतलब पुल गिरा पर जिम्मेदारी पहले ही अलग-अलग लेन में डायवर्ट हो गई। वहीं स्थानीयों के मुताबिक ब्रिज की क्वालिटी को लेकर वो लोग लंबे समय से सवाल उठा रहे थे। उनका आरोप है कि ब्रिज के निर्माण में गंभीर लापरवाही बरती जा रही थी। सुनिए लोगों ने क्या कहा है। ये एनएच 45 शहपुरा रेलवे के ऊपर बना ओवर ब्रिज है जो जिसका एक हिस्सा तीन माह पहले बरसात के मौसम में एक हिस्सा पूरा धस गया था। जिसके कारण वनवे चालू किया गया था। आज जो दूसरा हिस्सा जो

वहां पर टूटा था उसके जस्ट बाजू में दूसरा हिस्सा भी मतलब धस गया। मैं यहां पर कुछ ठेकेदार कंपनी के वो मैनेजर थे वहां पर नीचे तो उनसे बातचीत हम लोगों ने की वहां पर तो उनका कहना है कि ये मिट्टी का पुराव था। मिट्टी का पुराव यहां पे पूरी तरह से धस गया है जिसके कारण यह पूरा हिस्सा जो है बैठ गया है और एक तरफ वनवे होने की वजह से लोड ज्यादा पड़ गया। अब मतलब कहीं ना कहीं यह चीज इसमें यह साबित हो रही है कि यह गुणवत्ताहीन रहा और जितनी मजबूती से ओवरवेज बनना चाहिए वो मजबूती से नहीं बना जिसके कारण यह धंस गए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस हाईवे का निर्माण जो मेसर्स बांगड़ कंपनी कर रही थी वह पहले से ही ब्लैक लिस्ट की जा चुकी है। यह कंपनी पहले ही ब्रिज के इस हिस्से पर सुधार का काम कर रही थी और अब ब्रिज का दूसरा हिस्सा भी ढह गया। ओवरबिज के ध्वस्त होने के मामले में एमपी कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने एक्स पर लिखा लागत 400 करोड़ अवधि 3 साल। भोपाल जबलपुर एनएच 45 का हिस्सा दूसरी बार टूट कर गिर गया। भाजपा का पर्याय अब भ्रष्टाचार हो गया है। आम जनता की मेहनत का पैसा भाजपा के भ्रष्टाचार पर चढ़ावा चढ़ रहा है। वहीं मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी इस घटना को बड़ा मुद्दा बताते हुए लिखा कि यह घटना केवल एक पुल के ढहने की नहीं बल्कि

व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने वाली है। यदि बुनियादी ढांचा 3 वर्ष में ही कमजोर साबित हो जाए तो विकास के दावों की गंभीर समीक्षा आवश्यक हो जाती है। सरकार को चाहिए कि वह उच्च स्तरीय जांच कराए। दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कारवाई करें और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस तंत्र विकसित करें। उधर मध्य प्रदेश के पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह का बयान सामने आया। उन्होंने बताया कि मामले में पुल के निर्माण से जुड़े ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट कर दिया गया है। उसके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी। कल जबलपुर में एक ब्रिज जो आरोपी है वो उसका एक हिस्सा कल ढह गया। एमपी आरडीसी के द्वारा उसको बनाया जा रहा था। बनाया गया था और उसमें जो निर्माण एजेंसी थी वो उस पर अभी सुधार की कार्यवाही उसके एक हिस्से पर कर रही थी। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि उसका दूसरा हिस्सा कल ढह गया। इसको अत्यंत गंभीरता से लिया गया है और तत्काल प्रभाव से उस ठेकेदार को ब्लैकिस्टेड किया है और उसके साथ-साथ जिसकी निगरानी में जिस इंजीनियर की वो डीएम के लेवल का होगा या किसी और स्तर का होगा जो भी होगा उसके खिलाफ भी कार्यवाई की जाएगी और ठेकेदार पर एफआईआर भी दर्ज क

राई जाएगी। फिलहाल सरकार की तरफ से वही घिसा पिटा जवाब सामने आया कि जांच चल रही है। जिम्मेदारी तय होगी। दोषियों पर सख्त कारवाई होगी। बाकी विकास की स्पीड और पुल की मजबूती दोनों पर आपकी क्या राय है? हमें कमेंट सेक्शन में बता सकते हैं। खबर लिखी है मेरे साथी रक्षा ने। मेरा नाम हिमांशु है। देखते रहिए दिल लंडन टॉक। नमस्ते।