अमेरिकी बिजनेसमैन और यौन अपराधी जेफरी एप्सन ने एक भारतीय लड़की को भी अपना शिकार बनाया था। अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से जारी की गई नई एप्सन फाइलों में इस बात का खुलासा किया गया है। इसमें पहली बार एक भारतीय लड़की को पीड़ित बताया गया। कहानी शुरू होती है 30 जनवरी 2020 के एक ईमेल से। यह ईमेल पीड़ितों का केस लड़ रही लॉ फर्म एडवर्ड पाटिंगर एलएलसी की वकील ब्रिटनी हैंडसन ने अमेरिकी
अधिकारियों को भेजा था। मेल में उन्होंने कई पीड़ित लड़कियों के लिए मदद मांगी थी। उन्होंने लिखा कि कुछ लड़कियां थेरेपी लेना चाहती हैं। मेंटल ट्रॉमा से बाहर आने के लिए उन्हें काउंसलिंग की जरूरत है। मेल में फ्लोरिडा और न्यूयॉर्क की पीड़िताओं का जिक्र था। इसी ईमेल में पीड़ित भारतीय लड़की का भी नाम लिया गया था। वकील ब्रिटि ने बताया कि यह पीड़िता इस समय भारत में है। उन्होंने अमेरिकी अधिकारियों से सवाल किया कि क्या उसे भी मदद मिल सकती है? क्या उसे थेरेपी के छह मुफ्त सेशन दिए जा सकते हैं? अमेरिकी अधिकारियों ने इस मेल का जवाब भी दिया। उन्होंने क्राइम विक्टिम्स ट्रीटमेंट सेंटर से जुड़े कांटेक्ट्स शेयर किए। साथ ही भारतीय पीड़िता के बारे में उसका पता और कांटेक्ट डिटेल्स जैसी जानकारियां भी शेयर करने के लिए कहा गया। मेल में यह भी कहा गया कि भारत में मौजूद
अमेरिकी दूतावास से संपर्क किया जा सकता है ताकि वहां से किसी तरह की मदद मिल सके। हालांकि पूरे ईमेल में किसी भी लड़की का नाम नहीं लिया गया। पीड़ितों की निजता को ध्यान में रखते हुए सभी नाम हटा दिए गए थे। इसीलिए भारतीय लड़की की पहचान अब भी गुप्त है। सरल शब्दों में कहें तो यह वह दस्तावेज हैं जो जांच एजेंसियों ने सालों में इकट्ठा किए। जिनमें गवाहों के बयान, ईमेल, फ्लाइट रिकॉर्ड, कांटेक्ट लिस्ट, कोर्ट की फाइलें जैसी चीजें शामिल हैं। जब 2019 में जेफरी एबस्टीन को गिरफ्तार किया गया था, तब उस पर नाबालिक लड़कियों के यौन शोषण और सेक्स ट्रैफिकिंग के आरोप थे। मामला बड़ा था, नाम बड़े थे और सवाल उससे भी बड़े थे। लेकिन ट्रायल शुरू होने से पहले ही न्यूयॉर्क की जेल में उसकी मौत हो गई। आधिकारिक तौर पर बताया गया कि एफसीन ने खुद अपनी जान ले ली। लेकिन आज तक इस मौत पर सवाल उठते रहे हैं। उसकी मौत के बाद से ही फाइल्स को
सार्वजनिक करने की मांग उठती रही है। अब धीरे-धीरे कुछ दस्तावेज सामने आ रहे हैं। इन्हीं में अब एक भारतीय लड़की का भी जिक्र मिला है। फिलहाल जो सामने आया है वो सिर्फ एक ईमेल है। उसमें कहा गया है कि पीड़िता भारत में है और उसे थेरेपी की जरूरत है। इससे ज्यादा कोई डिटेल सार्वजनिक नहीं की गई है। ना उसका नाम, ना उम्र, ना यह कि वह कब और कैसे एस्टीन के संपर्क में आई। लेकिन इतना जरूर है कि यह मामला अब सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं दिखता। अगर भारतीय लड़की का जिक्र है तो सवाल उठता है क्या एस्टीन का नेटवर्क और भी कई देशों तक फैला था। पहले भी एपस्टीन के फ्लाइट रिकॉर्ड्स में कई देशों के नाम सामने आ चुके हैं। उसका निजी जेट जिसे लोलेट एक्सप्रेस कहा जाता था। कई बार अलग-
अलग देशों में गया। लेकिन भारत को लेकर इससे पहले कोई ठोस जिक्र सामने नहीं आया था। बाकी एसीन फाइल्स का पिटारा अभी पूरी तरह खुला नहीं है। आने वाले दिनों में कई और नाम और खुलासे सामने आ सकते हैं। फिलहाल शुरुआती जानकारी के आधार पर अभी एक ईमेल, एक भारतीय लड़की और कई अनसुलझे सवाल हमारे सामने खड़े हैं। खबर पर आप क्या सोचते हैं? कमेंट सेक्शन में बता सकते हैं। खबर लिखी है रक्षा ने। मेरा नाम है नेहा धमान। देखते रहिए द लन टॉक। शुक्रिया।