Ajit Pawar की तेरहवीं से पहले शपथ, क्यों मची जल्दबाजी? कारण हैरान करने वाला..

महाराष्ट्र की राजनीति में एक ऐसा मोड़ आया है जिसने हर किसी को चौंका कर रख दिया है। अजीत पवार की अचानक प्लेन क्रैश में मृत्यु के बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को न सिर्फ फ्रंट फुट पर राजनीति में लाया गया बल्कि 13वीं से पहले ही उन्हें महाराष्ट्र की उप मुख्यमंत्री बना दिया गया। जिसके बाद एक सवाल है जो सबके जेहन में आ रहा है। क्या 13 दिन तक डिप्टी सीएम का पद खाली रखा नहीं जा सकता था? अगर नहीं तो आखिर किस बात का डर था? नमस्कार मेरा नाम है रिचा और आप देख रहे हैं वन इंडिया हिंदी। अजीत पवार का अचानक एक हादसे में जाना सिर्फ महाराष्ट्र नहीं बल्कि पूरे देश को इसने झकझोर कर रख दिया। परिवार पर क्या बीत रही होगी यह बताना दूसरों के लिए थोड़ा मुश्किल तो हो सकता है लेकिन उम्मीद लगाई जा सकती है लेकिन परंपरागत तौर पर शोक की अवधि में बड़े राजनीतिक फैसलों से बचा जाता है लेकिन यहां ऐसा नहीं हुआ इसकी सबसे बड़ी वजह है सत्ता का संतुलन अजीत पवार ना सिर्फ एक नेता थे बल्कि सरकार के भीतर एक मजबूत पावर सेंटर भी थे। उनके जाने से गठबंधन में शक्ति संतुलन बिगड़ने का खतरा पैदा हो गया था।

अगर 13 दिन तक पद खाली रहता तो सहयोगी दलों को भीतरखाने विरोधियों को अपनी चाल चलने का मौका मिल जाता। असल डर सिर्फ प्रशासनिक नहीं बल्कि राजनीतिक टूटफूट का भी था। अभिजीत पवार के समर्थक विधायकों को साथ में बांधे रखना जरूरी था। सुनेत्रा पवार को मुख्यमंत्री बनाकर यह संदेश दिया गया कि नेतृत्व की विरासत सुरक्षित है और पवार परिवार की राजनीतिक पकड़ अभी भी मजबूत है। यह एक भावनात्मक के साथ-साथ रणनीतिक फैसला भी था। सुनेत्रा पवार कौन सा काम संभालेंगी?
यह एक बहुत जरूरी प्रश्न है जो सबके ज़हन में आ रहा है। उप मुख्यमंत्री बनने के बादसुनेत्रा पवार को कुछ अहम विभाग सौंपे जा सकते हैं। जैसे महिला एवं बाल विकास, सामाजिक न्याय या फिर ग्रामीण विकास। इसके अलावा वे कैबिनेट कोऑर्डिनेशन और पार्टी के भीतर अजीत पवार गुट को एकजुट रखने की भूमिका निभाएंगी। उनका सबसे बड़ा काम होगा सरकार की स्थिरता बनाए रखना और यह दिखाना कि वह सिर्फ सहानुभूति की नेता नहीं है। राजनीतिक चुनौतियां, अनुभव की कमी और विपक्ष का दबाव। सुत्रा पवार के सामने चुनौतियां कम नहीं है। सबसे पहली चुनौती है सीधे जन राजनीति का अनुभव ना होना। विपक्ष उन्हें बैक डोर एंट्री का चेहरा बताकर घेरने की कोशिश जरूर करेगा। दूसरा बड़ा चैलेंज है प्रशासन पर पकड़। जैसा कि अजीत पवार के पास था

। अजीत पवार को एक प्रशासनिक मजबूती के रूप में देखा जाता था। ब्यूरोक्रेसी को साथ लेना और फैसलों में आत्मविश्वास दिखाना उनके लिए आसान नहीं होगा। यह बात सुमित्रा पवार के लिए है क्योंकि अजीत पवार इसमें माहिर थे। पार्टी के अंदर भी राह आसान नहीं। एनसीपी और गठबंधन के भीतर कई वरिष्ठ ऐसे नेता हैं जो खुद इस पद की उम्मीद कर रहे थे। ऐसे में अंदरूनी असंतोष को संभालना सुत्रा पवार के लिए सबसे कठिन परीक्षा होगी। उन्हें यह साबित करना होगा कि वह सिर्फ अजीत पवार की पत्नी नहीं बल्कि एक सक्षम राजनीतिक उत्तराधिकारी भी हैं। भविष्य की राजनीति, संवेदना से शक्ति तक का सफर। अजीत पवार की मृत्यु के बाद लिया गया यह फैसला साफ दिखाता है कि महाराष्ट्र की राजनीति में भावनाओं से ज्यादा स्थिरता और गणित अहम है। सुमित्रा पवार का उप मुख्यमंत्री बनना सिर्फ एक नियुक्ति नहीं बल्कि सत्ता को संभालने की आपातकालीन रणनीति है। अब देखना यह होगा कि वे इस मौके को एक मजबूत राजनीतिक पहचान में बदल पाती हैं या दबाव में बनकर रह जाती है। इस खबर में इतना ही। अपडेट्स के लिए देखते रहे वन इंडिया हिंदी। सब्सक्राइब टू वन इंडिया एंड नेवर मिस एन अपडेट। डाउनलोड द वन इंडिया ऐप नाउ।

महाराष्ट्र की राजनीति में एक ऐसा मोड़ आया है जिसने हर किसी को चौंका कर रख दिया है। अजीत पवार की अचानक प्लेन क्रैश में मृत्यु के बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को न सिर्फ फ्रंट फुट पर राजनीति में लाया गया बल्कि 13वीं से पहले ही उन्हें महाराष्ट्र की उप मुख्यमंत्री बना दिया गया। जिसके बाद एक सवाल है जो सबके जेहन में आ रहा है। क्या 13 दिन तक डिप्टी सीएम का पद खाली रखा नहीं जा सकता था? अगर नहीं तो आखिर किस बात का डर था? नमस्कार मेरा नाम है रिचा और आप देख रहे हैं वन इंडिया हिंदी।

अजीत पवार का अचानक एक हादसे में जाना सिर्फ महाराष्ट्र नहीं बल्कि पूरे देश को इसने झकझोर कर रख दिया। परिवार पर क्या बीत रही होगी यह बताना दूसरों के लिए थोड़ा मुश्किल तो हो सकता है लेकिन उम्मीद लगाई जा सकती है लेकिन परंपरागत तौर पर शोक की अवधि में बड़े राजनीतिक फैसलों से बचा जाता है लेकिन यहां ऐसा नहीं हुआ इसकी सबसे बड़ी वजह है सत्ता का संतुलन अजीत पवार ना सिर्फ एक नेता थे बल्कि सरकार के भीतर एक मजबूत पावर सेंटर भी थे। उनके जाने से गठबंधन में शक्ति संतुलन बिगड़ने का खतरा पैदा हो गया था। अगर 13 दिन तक पद खाली रहता तो सहयोगी दलों को भीतरखाने विरोधियों को अपनी चाल चलने का मौका मिल जाता। असल डर सिर्फ प्रशासनिक नहीं बल्कि राजनीतिक टूटफूट का भी था। अभिजीत पवार के समर्थक विधायकों को साथ में बांधे रखना जरूरी था। सुनेत्रा पवार को मुख्यमंत्री बनाकर यह संदेश दिया गया कि नेतृत्व की विरासत सुरक्षित है और पवार परिवार की राजनीतिक पकड़ अभी भी मजबूत है। यह एक भावनात्मक के साथ-साथ रणनीतिक फैसला भी था। सुनेत्रा पवार कौन सा काम संभालेंगी?


यह एक बहुत जरूरी प्रश्न है जो सबके ज़हन में आ रहा है। उप मुख्यमंत्री बनने के बादसुनेत्रा पवार को कुछ अहम विभाग सौंपे जा सकते हैं। जैसे महिला एवं बाल विकास, सामाजिक न्याय या फिर ग्रामीण विकास। इसके अलावा वे कैबिनेट कोऑर्डिनेशन और पार्टी के भीतर अजीत पवार गुट को एकजुट रखने की भूमिका निभाएंगी। उनका सबसे बड़ा काम होगा सरकार की स्थिरता बनाए रखना और यह दिखाना कि वह सिर्फ सहानुभूति की नेता नहीं है। राजनीतिक चुनौतियां, अनुभव की कमी और विपक्ष का दबाव। सुत्रा पवार के सामने चुनौतियां कम नहीं है। सबसे पहली चुनौती है सीधे जन राजनीति का अनुभव ना होना। विपक्ष उन्हें बैक डोर एंट्री का चेहरा बताकर घेरने की कोशिश जरूर करेगा। दूसरा बड़ा चैलेंज है प्रशासन पर पकड़। जैसा कि अजीत पवार के पास था। अजीत पवार को एक प्रशासनिक मजबूती के रूप में देखा जाता था। ब्यूरोक्रेसी को साथ लेना और फैसलों में आत्मविश्वास दिखाना उनके लिए आसान नहीं होगा। यह बात सुमित्रा पवार के लिए है क्योंकि अजीत पवार इसमें माहिर थे। पार्टी के अंदर भी राह आसान नहीं। एनसीपी और गठबंधन के भीतर कई वरिष्ठ ऐसे नेता हैं जो खुद इस पद की उम्मीद कर रहे थे। ऐसे में अंदरूनी असंतोष को संभालना सुत्रा पवार के लिए सबसे कठिन परीक्षा होगी। उन्हें यह साबित करना होगा कि वह सिर्फ अजीत पवार की पत्नी नहीं बल्कि एक सक्षम राजनीतिक उत्तराधिकारी भी हैं। भविष्य की राजनीति, संवेदना से शक्ति तक का सफर। अजीत पवार की मृत्यु के बाद लिया गया यह फैसला साफ दिखाता है कि महाराष्ट्र की राजनीति में भावनाओं से ज्यादा स्थिरता और गणित अहम है। सुमित्रा पवार का उप मुख्यमंत्री बनना सिर्फ एक नियुक्ति नहीं बल्कि सत्ता को संभालने की आपातकालीन रणनीति है। अब देखना यह होगा कि वे इस मौके को एक मजबूत राजनीतिक पहचान में बदल पाती हैं या दबाव में बनकर रह जाती है। इस खबर में इतना ही। अपडेट्स के लिए देखते रहे वन इंडिया हिंदी। सब्सक्राइब टू वन इंडिया एंड नेवर मिस एन अपडेट। डाउनलोड द वन इंडिया ऐप नाउ।