सना खान इफ्तार विवाद: बीजेपी मंत्री संग पहले रमजान मनाने पर ट्रोल, पति अनस को लताड़ा

सोशल मीडिया पर इन दिनों सना खान और उनके शौहर मुफ्ती अनस सैयद को लेकर बहस छिड़ी हुई है। मामला तब चर्चा में आया जब भाजपा सरकार के केंद्रीय मंत्री किरण रिजीजू ने रमजान के पहले रोजे पर उनके साथ इफ्तार किया। आपको बता दें किरण रिजीजू बीजेपी पार्टी से हैं। इसके बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने सवाल उठाए। मौलाना टीवी पर क्यों आते हैं? बीवी बिना नकाब सामने क्यों आती हैं? अमीर और गरीब मौलाना के लिए अलग-अलग नियम क्यों हैं? वहीं दूसरी तरफ कुछ लोगों ने सना खान का सपोर्ट भी किया और कहा कि वो जिस दुनिया से बाहर निकली है वो काबिले तारीफ है। तो आज हम इस पूरे मसले को जानेंगे कि आखिर सोशल मीडिया पर क्या कुछ हंगामा चल रहा है। दरअसल रमजान के पहले दिन किरण रिजजू ने

Instagram पर कुछ तस्वीरें पोस्ट की। इन तस्वीरों में वह ग्लैमर छोड़ चुकी सना खान और उनके हस्बैंड मौलाना अनस सैयद संग दिखाई दे रहे हैं। सना खान इफ्तारी के लिए खाना बना रही हैं। फोटोस देखकर फैंस सोच में पड़ गए हैं कि आखिर केंद्रीय मंत्री सना और उनके हस्बैंड के साथ क्या कर रहे हैं। बात ऐसी है कि कपल ने किरण रिजीजू को अपने रौनक के रमजान सीजन 2 के लिए इनवाइट किया था। किरण रिजीजू ने फोटो शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा कि फ्यूचर स्टूडियो गोरेगांव मुंबई में रौनक के रमजान सीजन 2 के शूट पर सम्मानित मेहमान के तौर पर मुझे इनवाइट किया गया। खुशी हुई। सना खान और अनस सैयद के साथ अच्छी बातचीत हुई और गहराई के साथ विचार विमर्श किया गया। पूरी टीम को शुभकामनाएं। लेकिन इन तस्वीरों के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कई यूज़र्स ने एक ही पोस्ट लिखा है जिसमें लिखा गया है अगर आप अमीर मुसलमान हैं तो भाजपा के केंद्रीय मंत्री आपके टीवी शो के मेहमान बन सकते हैं और किसी भाजपा वाले को कोई दिक्कत नहीं होगी मुसलमान के टीवी शो पर जा रहे हैं। आप मुफ्ती होते

हुए खुद भी टीवी पर आ सकते हैं। आपकी बीवी भी लाखों लोगों के सामने आ सकती है। बगैर नकाब किए मौलाना को कोई ऑब्जेक्शन नहीं। आपसे कोई भी बड़े मौलाना सवाल-जवाब नहीं करते हैं। लेकिन अगर आप गरीब मौलाना या मुफ्ती होते, तो जरूर आपसे पूछा जाता कि आपके घर में टीवी क्यों है? या फिर अपने फलाने नेता के साथ फोटो क्यों लिया था? लेकिन आप अमीर मौलाना हैं तो कोई शिकायत नहीं। पता है क्योंकि धर्म मजहब और राजनीति में गैप गरीबों का फैशन होती है। अमीर और एलिट क्लास इससे कोई रिश्ता नहीं होता और इनको देखो अपने आप को मौलाना भी बोलते हैं और अपनी बीवी की नुमाइश भी कर रहे हैं। हालांकि इस पोस्ट के बाद लोग दो हिस्सों में बट गए हैं। एक यूजर ने पोस्ट के जवाब देते हुए लिखा इस तरह का पोस्ट करके आप क्या कहना चाहते हो? क्या इन्होंने कोई गुनाह किया? क्या यह खुद के बताए हुए रास्ते पर नहीं चल रही? एक मुस्लिम लड़की जो

कि ग्लैमर की दुनिया से पूरी तरह बॉयकॉट कर देती है और पूरी तरह अपने आप को इस्लामिक तौररीकों में ढाल लेती है। बयान देती है। हजारों महिलाओं ने इनकी बातों को सुना है। हजारों महिलाओं का दिल बदल गया है। इतनी छोटी सोच मत रखो मेरे भाई। माइक गॉड यूजर लिखते हैं वो जिस गंदगी से निकल कर आई है काबिले तारीफ है। वह कोई गलत काम नहीं कर रही हैं। ना ही गलत काम को प्रमोट कर रही हैं। अपने हस्बैंड के साथ हैं। कोई गैर के साथ नहीं है। माइक गॉड ने लिखा यह मुफ्ती साहब ने जो काम किया है बीजेपी के केंद्रीय मंत्री को अपने घर बुलाकर ऐसे लोगों को घर के अंदर बुलाना का क्या घर के बाहर भी खड़ा नहीं होने देना चाहिए था। यह लोग पूरी तरह से बैड इंसान है। मेगार्जन ने लिखा मौलाना इसे सुधारने चले थे। इसने मौलाना को ही बिगाड़ दिया। मग ने लिखा यह बोलने से अच्छा है कि इन मामलों को अल्लाह पे छोड़ देना चाहिए। वहां इनके मुफ्ती होने से भी कोई बचाव नहीं हो सकता। वग ने लिखा गरीब खुद भी ज्यादा धार्मिक होता है। लेकिन सबसे पहले आप एक बुनियादी बात समझ लें। इस्लाम में किसी से मिलने, बात करने या इफ्तार करने को अपने आप में हराम नहीं कहा गया। कुरान में अल्लाह ने फरमाया अल्लाह ने तुम्हें उन लोगों के साथ नेकी और

इंसाफ करने से नहीं रोकता जो तुमसे दीन के मामले में लड़ाई नहीं करते। यानी सामाजिक ताल्लुक, मुलाकात या दावत अगर शरीयत की हदों में हो तो जायज है। तो किसी मंत्री के साथ इफ्तार करना अपने आप में गुनाह नहीं है। अब सवाल आता है कि अब मुस्लिम औरत का पब्लिक में आना गलत है। कुरान में सूरत नूह में हया और पर्दे का हुक्म दिया गया है। लेकिन यह भी हकीकत है कि सहाबियात बाजार जाती थी, मस्जिद जाती थी, जंग के मैदान में सेवा करती थी। उलेमा की आम राय है औरत का घर से निकलना हराम नहीं। शर्त यह है कि शरई हदों का ख्याल रखा जाए। पर्दा हया और फितना से बचाव हो। अगर कोई औरत अपने शौहर के साथ किसी दावत में शामिल होती है और इस्लामी उसूलों का ख्याल रखती है तो यह खुद ब खुद हराम

नहीं हो जाता। सोशल मीडिया पर एक बड़ा आरोप यह लगाया गया कि अगर यह गरीब होते तो सवाल उठते। यह मुद्दा दरअसल दीन से ज्यादा समाज के डबल स्टैंडर्ड्स का है। इस्लाम में अमीर और गरीब के लिए नियम अलग नहीं है। हदीस में आता है अगर मेरी बेटी फातिमा भी चोरी करती तो मैं उसका हाथ काट देता। यानी शरीयत में अमीर गरीब का फर्क नहीं। अगर कहीं समाज में फर्क दिखता है तो वह इस्लाम की कमी नहीं। इंसानों की कमजोरी है। सना पहले फिल्म और ग्लैमर इंडस्ट्री में थी। फिर उन्होंने खुलकर ऐलान

किया कि वह दीन की तरफ लौटना चाहती हैं। इस्लाम में तौबा का दरवाजा हमेशा खुला है। अगर कोई इंसान गुनाह छोड़कर सीधा रास्ता अपनाता है तो उसकी हिम्मत की तारीफ की जाती है ना कि उसका मजा। फिलहाल आप क्या कहना चाहेंगे इस पर कमेंट सेक्शन में हमें लिखकर जरूर बताएं। वीडियो को लाइक करें, शेयर करें और चैनल को सब्सक्राइब करना बिल्कुल ना भूलें।