चीन अमेरिका पर : भारत के साथ आया चीन, अमेरिका से पूछा सवाल

मिडिल ईस्ट में इस वक्त तनाव का माहौल है और इसके पीछे का कारण है ईरान, अमेरिका, इजराइल की युद्ध और इस युद्ध के बीच भारत में रायसेना डायलॉग दिल्ली में एक कार्यक्रम आयोजित की जाती है और इसमें अह डिप्टी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट क्रिस्टोफर लैंडो अमेरिका की ओर से मौजूद होते हैं और उनकी मौजूदगी यह बताने के लिए पर्याप्त है कि इस वक्त भारत के साथ वेस्ट फीड्री डील के बीच इंडिया और अमेरिका क्या सोच रहे हैं। हालांकि यहां पर चीन का जिक्र किया था क्रिस्टोफर लैंडो ने और दो दशक पुरानी बात उठाई थी उन्होंने। आखिर ऐसा क्या कहा वह हमने भी आपको दैनिक जागरण के आप इस YouTube चैनल पे आप

देख सकते हैं। हमने वह वीडियो भी उस पे बनाई कि आखिर उन्होंने बयान क्या दिया? [संगीत] लेकिन अब इस बयान पर जो उन्होंने चीन का जिक्र किया चीन का जवाब आ गया है। चाइना ने क्या कहा है वो जानना जरूरी है। इस पर बातचीत करने के लिए हमारे साथ चेतन जुड़े हैं। चेतन आपने देखा जिस तरीके से क्रिस्टोफर लैंडो का बयान सामने आया था चीन को लेकर जो उन्होंने कहा था कि हमने जो गलती की थी दो पहले वो हम भारत के साथ नहीं करेंगे। अब इस पर चीन का चीन की कोई प्रतिक्रिया सामने आई है। चीन ने ऐसा क्या कहा? देखिए अमेरिकी डिप्टी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट क्रिस्टोफर लैंडो जिनका जिक्र आप कर रहे हैं। सबसे बड़ी बात है उन्होंने जो बयान दिया वो भी हम अपने दर्शकों को बताएंगे

और ये भी बताएंगे कि चीन ने अब क्या कुछ कहा है। क्रिस्टोफर लैंडो भारत की धरती से भारत को ही आगे ना बढ़ने को लेकर कह रहे थे। उन्होंने जिस तरीके से यह कहा कि जो दो दशक पहले यानी कि 20 साल पहले उन्होंने चीन को एक बड़ी मार्केट दी। अमेरिका ने एक मदद की और चीन जो है आज उसका कॉम्पिटिट बन के बैठा हुआ है। प्रतिनिधि बन के बैठा हुआ है। हम भारत के साथ ऐसी गलती नहीं होने देंगे। तो कुछ लोग कुछ यूज़र्स जो हैं वो इस बात से नाराजगी जता रहे थे कि आप रायसेना डायलॉग में भारत में आए हुए हैं। नई दिल्ली में आए हुए हैं और आप यहां खुलकर कह रहे हैं कि आप भारत को आगे नहीं बढ़ने देंगे। तो ये उन्होंने यहां पर काल फिर ये कैसी डील? नहीं देखिए डील को लेकर तो कितनी जो ड्रामेबाजी अमेरिका ने की है वो ये सब समझ आता है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट से ट्रंप को झटका लगता है। उसके बाद वो 10सदी जो है वो ग्लोबल टेरिफ कर देते हैं। उसके बाद वो उसको 5सदी और बढ़ा

देते हैं। तो 15सदी लेकिन फिलहाल जिस तरीके का एक एक हथियार ट्रंप ने और ट्रंप के प्रशासन ने टेरिफ को समझा वो आज भी सुप्रीम कोर्ट के लताड़ के बाद भी रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। भारत में रहकर इस तरह की बातें तो जो क्रिस्टोफर लैंडो है वो यह कहते हैं कि भारत को समझना चाहिए कि हम भारत के साथ वही गलतियां नहीं करने जा रहे हैं जो हमने 20 साल पहले चीन के साथ की थी। हम आपको ये सभी मार्केट डेवलप करने देंगे और फिर अगली बात जो हमें पता चलेगी वो ये कि आप बहुत सी कमर्शियल चीजों में हमसे आगे निकल जाएंगे। यानी कि इनसिक्योर है अमेरिका कि भारत किसी भी चीज में हमसे आगे निकल सकता है। कहीं वो आगे ना निकल जाए। इसलिए हम आपको रोकना चाहेंगे। ये बात खुलकर भारत की धरती से इस जो डिप्टी सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट हैं क्रिस्टोफर लिंडो उन्होंने यहां पर कही। आगे वो कहते हैं कि हम ट्रेड डील्स के बहुत करीब पहुंच चुके हैं। ये डील दोनों देशों के बीच असीमित संभावनाओं को खोल सकती है। हम भारत पर फोकस करके

आर्थिक और कमर्शियल मैक्रो को लेकर बहुत उत्साहित हैं। लेकिन भारत को ये समझना चाहिए कि हम भारत के साथ वो गलतियां नहीं दोहराएंगे जो हमने 20 साल पहले चीन के साथ की थी। हम ये सुनिश्चित करेंगे कि जो भी हम करें वो हमारी जनता के लिए उचित हो। क्योंकि आखिर में अपनी जनता के प्रति जवाबदेही होना ठीक उसी तरह जैसे भारत सरकार को अपनी जनता के प्रति जवाबदेही होना पड़ता है। अब जवाबदेही वाली बात जब यहां पर सामने आती है तो हमें वो भी याद करना होगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर हमारी सरकार में जितने भी शीर्ष पदों पर लीडर्स जो हैं उन्होंने साफ तौर पर ये कह दिया था कि हम कोई भी अमेरिका के सामने झुकने वाले नहीं है। अपने नागरिकों के हितों की रक्षा करना हमारा हमारी जिम्मेदारी है। हमारा फर्ज है। हम उसको निभाएंगे और हमारी सरकार जो है वो कहीं ना कहीं उसको उस पर काम जो है वो करती आ रही है। लेकिन लेकिन अब चीन ने इस पर क्या किया क्योंकि चीन का जिक्र खुद क्रिस्टोफर लैंडो ने किया और ठीक है दो दशक पहले एक गलती हुई थी लेकिन ये तो बड़ी बात हो गई ना कि चीन से आप जो है कंपेयर कर रहे हो भारत को कि हमने जो गलती वहां की है हम भारत के साथ नहीं करेंगे वो यहां पर ये भी कहना चाह रहे थे हमने भारत का तो जिक्र किया लेकिन क्रिस्टोफर लैंडो ये भी कहना चाह रहे थे कि अमेरिका की वजह से चीन इतना आगे बढ़ा है ये उन्होंने कहीं

ना कहीं कहने की कोशिश की है तो इस पर चीन की तरफ से प्रतिक्रिया आना लाजमी था आया भी ग्लोबल टाइम्स जो अखबार है सरकारी मीडिया माना जाता है। सरकार की बात उसमें रखी जाती है। यह बात साफ होती है। ग्लोबल टाइम्स लिखता है कि यह दावा कि अमेरिका भारत को चीन जैसा प्रतिद्वंदी नहीं बनने देगा। अजीब लगता है। क्या इसका मतलब ये है कि चीन अमेरिका की वजह से आगे बढ़ा है या फिर ये कि अमेरिका भारत को विकसित नहीं होने देगा। ये यहां पर एक तीर से दो निशाना है चीन का। बिल्कुल। अब ये सोचना गलत है कि अमेरिका किसी देश की तरक्की को अपनी मर्जी से कंट्रोल कर सकता है। चीन ने सीधे तौर पर ये भी यहां पर इशारा किया कि अमेरिका भारत की तरक्की को रोकने की कोशिश कर रहा है। अब दो चीजें इसमें आप देखिए। चीन ने कहा कि अमेरिका की वजह से क्या चीन आगे बढ़ा है या फिर ये कि अमेरिका भारत को विकसित नहीं होने देगा। चीन ने ये कहा कि पहली बात तो ये अमेरिका बिल्कुल ना समझे कि वो किसी की तरक्की को कंट्रोल कर सकता है। दूसरी बात ये कि उन्होंने इशारा कहीं भी दे दिया कि भारत को अब ये समझना होगा कि भारत की तरक्की को भारत को आगे बढ़ने से अमेरिका रोक सकता है। शायद अमेरिका को ये समझ

आ रहा है। इसलिए क्रिस्टोफर लैंडो भारत की जमीन से ये बयान देते हैं कि जो हमने गलती 20 साल पहले की थी चीन को मार्केट दी खुली मार्केट ताकि वो आगे बढ़ सके और वो आगे बढ़ा भी और आज हम हमारे से कंपटीशन है। कहीं भारत ऐसा ना कर ले। तो इनसिक्योरिटी उनको भारत को लेकर भी है कि जिस गति से भारत आगे बढ़ रहा है तीसरी अर्थव्यवस्था की ओर आगे बढ़ रहा है तो कहीं ना कहीं अमेरिका के लिए खतरा ना हो जाए। दूसरी बात ये भी वो ये समझ रहे हैं कि तमाम छोटे-मोटे देश जो हैं वो ट्रेड डील में ट्रंप के सामने अमेरिका के सामने झुक गए। मान लिया ट्रंप की जो बात थी लेकिन भारत नहीं झुका। भारत ने उसी तरीके से फाइट किया जैसे चीन कर रहा था। चीन ने डबल टेरेफ वहां पर लगाया और उसके बाद कहीं ना कहीं अमेरिका को समझौता करना पड़ा। समझ आया। अमेरिका चीन से इस वजह से परेशान है क्योंकि लगातार चीन जो है वो अपने डिफेंस सेक्टर पर ज्यादा से ज्यादा खर्च कर रहा है। भारत भी अपना जो डिफेंस बजट है वो बढ़ा रहा है। तो अमेरिका की नजर इन सब चीजों पर है और वो ये समझ रहा है कि बहुत

जल्द भारत जो है वो चीन के पैरेलल आगे खड़ा हो जाएगा और हम जिस तेजी से आगे बढ़ रहे हैं वो भी कहीं ना कहीं अमेरिका के लिए बहुत ज्यादा चिंता की बात हो जाएगी। तो ये चीन का बयान सामने आना और मजाक उड़ाना कि आप कहना क्या चाहते हैं। ठीक है। बिल्कुल देखिए चीन ने अमेरिका को हो सकता है अमेरिका की बातों में ही फंसा दिया। सबसे बड़ी बात अगर हम देखें यहां पर क्रिस्टोफर लैंडो ने एक और बयान दिया था। उन्होंने अमेरिका फर्स्ट की नीति पर भी बात की। उन्होंने कहा था राइसिन डॉलर के कार्यक्रम में कि डॉनल्ड ट्रंप का मकसद यह नहीं है कि अमेरिका फर्स्ट का मतलब हो कि अमेरिका हर चीज में आगे हो। अह डॉन ट्रंप चाहते हैं कि हर देश जो है हर देश के प्रधानमंत्री जो हैं वो अपने

देश को आगे लेकर जाएं। ये भी डॉल्ड ट्रंप का कहना है। लेकिन सबसे बड़ी बात यहां पर ये होती है कि अब जब चीन का जिक्र किया क्रिस्टोफर लैंडो ने और कहा कि भाई जो दो दशक पहले गलती हमने चीन के साथ की थी जो हम भारत के साथ नहीं करेंगे। ये कहीं ना कहीं बताया जा रहा है कि भाई एक तरफ से आप ट्रेड डील की बात कर रहे हो। एक तरफ से

आप उसको अपना अच्छा दोस्त मानते हो। तो दूसरी तरफ आप उसकी तरक्की से कहीं ना कहीं एक बैरियर बनने का काम कर रहे हो। कहीं ना कहीं इस पूरी खबर पर अब आपका क्या सोचना है? आपका क्या विचार है? ये हमारे कमेंट सेक्शन में नीचे जरूर बताइएगा।

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