दोस्तों धर्मेंद्र के उस सीलबंद लिफाफे या फिर उनके आखिरी लेटर में ऐसा [संगीत] क्या था कि जब खुला तो पूरे कमरे में सन्नाटा पसर गया। कल्पना कीजिए [संगीत] एक ऐसा क्षण जहां समय थम सा जाए। एक कमरा जहां हवा में तनाव [संगीत] लटका हो। हर चेहरा उदास आंखें नम और हाथों में एक [संगीत] सीलबंद लिफाफा। ऊपर लिखा है मेरे जाने के बाद ही खोलना। यह कोई फिल्म का सीन नहीं बल्कि देओल परिवार का वो ऐतिहासिक पल है जब धर्मेंद्र की वसीहत खुली। लेकिन ट्विस्ट यह है इस लिफाफे ने ना तो कलह फैलाई ना संपत्ति की जंग छेड़ी उल्टा इसने दो परिवारों को एक धागों में पिरो दिया। क्या था उसमें? कौन से शब्दों ने सबकी रूह हिला दी? आइए इस रहस्यमई कहानी पर चलें जहां प्यार ने धन से ऊपर उठकर इतिहास रच दिया। लिफाफा खुलने का वो डरावना पल धर्मेंद्र के निधन के बाद जूहू का वो भव्य बंगला किसी तूफान की तबाही जैसा लग रहा था। 24 नवंबर 2025 को 89 वर्ष की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कहा।
अस्पताल से घर लौटे तो परिवार सदमे में डूबा था। सनी देओल की आंखें सूझी हुई। बॉबी चुपचाप कोने में बैठे थे। ईशा और अहाना मां हेमा मालिनी के कंधों पर सिर झुकाए रो रही थी। प्रकाश कौर धर्मेंद्र की पहली पत्नी वो शांत मुस्कान के पीछे छिपा दर्द लिए खड़ी थी। अजीता और विजेता जो कम बोलती हैं वह भी चुप थी। कमरे की अलमारी खुली और वह लिफाफा सामने आया। हाथ कांप रहे थे। कौन खोलेगा? सनी ने आगे बढ़कर लिफाफा लिया। सील टूटी, पन्ने खुले। पहला शब्द प्रकाश। कमरे में सन्नाटा सा फैल गया। धर्मेंद्र ने लिखा मेरी आधी संपत्ति चाहे वो जूहू का बंगला हो। लोनावला का फार्म हाउस हो या विजेता फिल्म्स। प्रकाश कौर और उनके चार बच्चों सनी, बॉबी, अजीता, विजेता को समान रूप से मिलेगी। यह पढ़ते ही प्रकाश कौर की आंखों में [संगीत] आंसू लुढ़का आए। सालों का इंतजार खत्म हो गया। बचपन से सनी बॉबी ने जो दर्द देखा पिता की दूसरी शादी मां का त्याग वो एक लाइन में मिट गई। सनी का चेहरा सख्त था लेकिन फोट कांप रहे थे।
वो जानते थे पिता ने पहला परिवार कभी बुलाया ही नहीं। लेकिन अगली लाइन ने माहौल पलट दिया। बाकी आधी संपत्ति हेमा माली ईशा और अहाना को नजरें हेमा पर टिक गई वो खड़ी रही सिर झुकाए और कमरे में मानो जैसे सन्नाटा पसर गया हो मानो खामोशियां एक दूसरे से बात कर रही हो यह बंटवारा 335 से 450 करोड़ की संपत्ति का था जूहू बंगला जो करोड़ों का है पूरे परिवार का रहेगा किसी एक का नहीं लोरावला का 100 एकड़ फार्म हाउस प्रकाश पक्ष को बाकी रेस्टोरेंट जैसे गरम धर्म भीमैन लग्जरी कारें निवेश सब संपत्ति बराबर बटेगी। धर्मेंद्र ने साफ लिखा यह घर रिश्तों का प्रतीक है। कभी विवाद मत करना। हेमा ने फुसफुसाया धर्म जी आपने हमें सम्मान दिया है। ईशा ने मां का हाथ थामा। अहाना की आंखें चमक उठी। दोस्तों धर्मेंद्र का जन्म 8 दिसंबर 1935 को लोधियाना के एक छोटे से गांव में हुआ। किसान परिवार से निकले लेकिन सिनेमा ने उन्हें ही बना दिया। 65 साल के करियर में 300 से ज्यादा फिल्में लेकिन निजी जिंदगी वो तो सस्पेंस फिल्मों से कम नहीं थी। 1954 में प्रकाश कौर से शादी। चार बच्चे सनी, बॉबी, अजीता, विजेता। प्रकाश ने [संगीत] चुपचाप सब सहा जब 1980 में धर्मेंद्र ने हेमा मालिनी से शादी की। हेमा बॉलीवुड की ड्रीम गर्ल और फिर उनसे ईशा और अहाना हुई। दो परिवार, दो घर लेकिन धर्मेंद्र ने कभी दोनों परिवारों में भेद नहीं किया। इंटरव्यूज में वह कहते रहे कि मैं नहीं चाहता मेरे बाद झगड़ा हो और शायद यही कारण रहा उन्होंने जिंदा ही वसीहत बनाई।
सलाह दी कि हमेशा एक रहना। सनी के साथ बेहद खास रिश्ता रहा उनका। बॉबी को हमेशा से प्रोत्साहित किया उन्होंने। ईशा को कभी फिल्मों में नहीं आने दिया [संगीत] लेकिन वसीहत में एक बड़ा हिस्सा दिया। क्यों? क्योंकि ईशा ने करियर छोड़ा, शादी की, टूटी और इन परिस्थितियों का धर्मेंद्र को भी बहुत दर्द हुआ। मुख्य वसीहत बराबर बंटवारा ही दिखाती है क्योंकि मीडिया में अफवाहों का एक दौर चल रहा है। प्रकाश कौर को फार्म हाउस हेमा को उचित सम्मान मिला। धर्मेंद्र की दूर की सोच भी कमाल की थी। वो जानते थे संपत्ति लड़ेगी तो रिश्ते टूटेंगे और इसीलिए उन्होंने लिखा दो परिवार नहीं एक परिवार। हेमा ने कहा मुझे यादें चाहिए पैसे नहीं। सनी ने गले लगा लिया। वो पल आंसुओं में तो डूबा था लेकिन पल एकता का था। यूनिटी का था। दोस्तों धर्मेंद्र की नेटवर्थ 335 से ₹450 करोड़ की है। जूहू बंगला 100 से ₹150 करोड़ वो जगह जहां शूटिंग हुई, पार्टियां रौनकमई हुई, दीवारें ठहाकों से गूंजी थी। सनी की पहली फिल्म जो हिट हुई थी बेताब उसकी चर्चा भी यहीं हुई। फार्म हाउस 100 एकड़। लोनावला का जहां आम के बाग, खेत सब हैं और धर्मेंद्र हमेशा कहा करते थे कि मैं एक किसान हूं। वहां पिकनिक और शांत शाम में बिताने जाता हूं। रेस्टोरेंट गरम धन हीन 50 करोड़ से ज्यादा कारें लग्जरी कलेक्शन निवेश अलग-अलग राज्यों में प्रॉपर्टी 20 से 25 कुल मिलाकर मेहनत की कमाई लेकिन भावनात्मक वैल्यू बंगला यादों का खजाना फॉर्म सुकून का और फिल्म्स परिवार की एकता वसीहत ने इन्हें बांटा लेकिन चेतावनी दी कि एक रहना। लिफाफा बंद होते ही सनी बोले पापा ने सही कहा हम एक हैं। बॉबी ने सहमति में सिर हिलाया। प्रकाश कौर मुस्कुराई पहली बार हेमा रो पड़ी और धर्मेंद्र जी का आखिरी गिफ्ट उन परिस्थितियों को समझा। ईशा अहाना ने सबको गले लगा लिया।
अजीता विजेता चुप रही लेकिन आंखें बोल रही थी। अंतिम संस्कार में हेमा लाल आंखें लिए रो रही थी। सनी कंधा संभाले और पूरा परिवार एक था। सनी का दर्द गहरा था। बचपन से दूसरी शादी का सदमा लेकिन वसीहत ने मरहम लगाया। वह भी जो संघर्षों से गुजरे खुश थे। ईसा को लगा कि पिता ने उनका त्याग सुना है। हेमा का धैर्य सालों का वो कहती सम्मान ही सब। यह वसीहत एक प्रेम पत्र थी। धर्मेंद्र की मौत के बाद पूरी फिल्म इंडस्ट्री सदमे में थी। 1970 में शुरू हुई पहली फिल्म बेताब सनी का डेब्यू था। ब्लॉकबस्टर हुई, कतारें लगी और फिर आया घायल। सनी सुपरस्टार के नाम से जाने जाने लगे। अवार्ड बरसने लगे। धर्मेंद्र ने बच्चों को प्रोडक्शन की बारीकियां सिखाई। फिल्म, चाचा, भतीजा, धर्मवीर सारे हिट्स हुए। यह सिर्फ बिजनेस नहीं सपना था। विजेता ने देवल्स को ब्रांड बनाया। आज भी रॉयल्टी आती है। धर्मेंद्र कहते हैं कि बच्चों के लिए बनाया है और फिर वसीहत ने इसे सुरक्षित भी किया। हेमा धर्मेंद्र की दूसरी पत्नी कभी मांग नहीं की लेकिन वसीहत ने आधी संपत्ति दे दी।
उनके लिए मानो कि यह एक प्रेम पत्र था। अंतिम विदाई पर खूब रोईं लेकिन बहुत मजबूत बनी रही। ईशा अहाना ने देखा शुरू से ही कि मां कितने संघर्षों [संगीत] से गुजरी है। दुनिया ने गलत समझा लेकिन धर्मेंद्र ने हमेशा हेमा मालिनी को सही समझा। हेमा का बयान था यादें ही धन है और वाकई यही सादगी दिल छू गई। धर्मेंद्र ने सिखाया एकता ही पूंजी है। पैसा टूटेगा रिश्ते ना टूटे। यह कहानी संपत्ति की नहीं प्यार की थी।