दुनिया का तेल संकट: ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य बंद किया पर दी भारत को छूट! अब तेल आयात पर असर

जंग के माहौल के बीच भारत को मिल सकती है मिडिल ईस्ट से तेल की खबर में बड़ी राहत। क्या यह इंडिया का एक मास्टर स्ट्रोक है और जहां दुनिया भर में ऑयल क्राइसिस चलेगा वहीं भारत को स्टेट ऑफ हर्मस से आसानी से तेल मिल जाएगा। दोस्तों गर्ल्स से आज एक शॉकिंग और अनप्रेसिडेंटेड अपडेट आई है। ईरान के इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉप्स यानी आईआरजीसी ने अनाउंस किया है कि स्टेट ऑफ हर्मस अब सिर्फ यूएस, इजराइल, यूरोप और उनके वेस्टर्न अलायस के लिए बंद रहेगा भारत के लिए नहीं। यह अनाउंसमेंट ईरान के स्टेट ब्रॉडकास्टर

आईआरआईबी के थ्रू आई। और इसके साथ ही ईरान ने वार्निंग दी है कि अगर इन कंट्रीज की शिप स्टेट में एंटर करने की कोशिश भी करेंगी तो मिलिट्री एक्शन लिया जा सकता है। यानी यूएस, यूरोप और इनके दोस्तों की शिप का तेल ले जाना अब स्टेट ऑफ फर्मर्स से मिडिल ईस्ट से नामुमकिन है। लेकिन भारत अभी भी लेके जा सकता है। अब बात करते हैं कॉन्टेक्स्ट की। शेट ऑफ फर्मस एक ऐसा स्ट्रेटेजिक चोक पॉइंट है जो परर्शियन गल्फ के पो्स को ग्लोबली कनेक्ट करता है। दुनिया का लग

भग एक पांचवा हिस्सा तेल यहीं से आता है और इसी स्टेट के थ्रू वो गुजरता है। लेकिन अब सिचुएशन बेहद सीरियस है क्योंकि यूनाइटेड स्टेट्स और इजराइल के जॉइंट मिलिट्री ऑपरेशंस के बाद कमर्शियल ट्रैफिक लगभग स्टॉप हो गया है। और हाल फिलहाल स्टेट ऑफ हुर्मस से ज्यादा तेल नहीं डाल रहा है। क्योंकि भैया आखिर जंग के माहौल में कौन रिस्क लेगा? शिप्स को रिस्क लेने का डर है और गल्फ पो्स के आसपास ऑयल टैंकर्स एंकरर्ड होकर वेट कर रहे हैं। क्योंकि कभी भी या तो किसी ऑयल टैंकर पे धमाका किया जा सकता है और कई अरबों करोड़ों का नुकसान हो जाएगा। इसलिए सारे देश डरे हुए हैं। लेकिन ईरान ने पहले ही अनाउंस किया था कि सिर्फ चाइनीस फ्लैटशिप्स को ही पैसेज मिलेगा जिसे एक डिप्लोमेटिक एप्रिसिएशन जेस्चर बीजिंग के लिए माना गया

। यानी चाइना को तो अनुमति दे दी लेकिन अब ये खबर सामने आ रही है कि भारत को भी अनुमति मिल जाएगी। तो दोस्तों, यह मूव सिर्फ एक मिलिट्री और पॉलिटिकल स्टेटमेंट नहीं है बल्कि ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चेंज पे डायरेक्टली इंपैक्ट डाल रहा है। ऑयल प्राइसेस रॉकेट की तरह ऊपर जा रहे हैं और ग्लोबल ट्रेड और लॉजिस्टिक कंपनीज़ अल्टरनेट रूट्स का ऑप्शंस एक्सप्लोर कर रही हैं। लेकिन स्टेट के बंद होने से एशिया यूरोप में ईस्ट वेस्टर्न कॉरिडोर्स डिसररप्ट हो रहे हैं। लेकिन गल्फ के एक्सपोर्ट्स जरूर अफेक्टेड हैं। और इसी वजह से अब भारत के पास मौका है स्टेट ऑफ हुर्मोस से तेल निकालने का और अपनी नीड्स को पूरा करने का बिना यूएस और यूरोप पे डिपेंड किए गए। अब आते हैं

इंडिया के पर्सपेक्टिव पे। सबसे पहले तो जो स्ट्रेटेजिक एडवांटेज इंडिया को मिलेगा। अगर ईरान का यह मूव स्ट्रिक्टली वेस्टर्न कंट्रीज तक लिमिटेड रहता है तो इंडिया जैसे ऑयल इंपोर्टिंग नेशंस के लिए मिडिल ईस्ट से तेल का सप्लाई चेन अभी भी ओपन रह सकता है। इसके बाद हमें एनर्जी सिक्योरिटी मिलेगी। क्योंकि इंडिया को अपनी रिफाइनरीज के लिए कंटिन्यूटी ऑफ ऑयल इंपोर्ट्स चाहिए और अगर स्टेट ऑफ हर्म सिर्फ वेस्ट के लिए ब्लॉक्ड है तो हमें यह बेनिफिट मिल सकता है। जियोपॉलिटिक्स की बात करें तो इंडिया का डिप्लोमेसी टेस्ट है। स्मार्ट नेगोशिएशन और कोऑर्डिनेशन के थ्रू हम सेफ शिपिंग लेंस इंश्योर कर

सकते हैं और ग्लोबल ऑयल प्राइस सर्च का एडवांटेज भी हम ले सकते हैं कि दुनिया में तेल महंगा होता है तो हुए हमें तो सस्ते में मिल जाएगा। लेकिन रिस्क है कि रीजन अभी भी एक कॉन्फ्लिक्ट ज़ोन है। शिपिंग कंपनीज़ हेज़िटेंट है और अल्टरनेट रूट्स एक्सपेंसिव हो सकते हैं। ईरान के डिसीजन रैपिडली चेंज हो सकते हैं। इसलिए केयरफुल मॉनिटरिंग जरूरी है। लेकिन अगर ईरान ने ये फैसला ले लिया कि भारत अपना तेल स्टेट ऑफ हर्मस से लेके जा सकता है तो इससे अच्छी बात इंडिया के एनर्जी सेक्टर के लिए नहीं होती। एनालिस्ट कहते हैं कि यह एक अनप्रेसिडेंटेड जियोपॉलिटिकल मैन्यूवर है। पहली बार स्टेट ऑफ फर्मर्स प्रैक्टिकली ब्लॉक हो गया है और सिर्फ कुछ कंट्रीज के लिए इवन ई

रान इराक वॉर के दौरान भी मर्चेंट वेसल्स ऑपरेट कर रहे थे। तो दोस्तों इंडिया के लिए एक पोटेंशियल मास्टर स्ट्रोक हो सकता है। लेकिन इसके लिए डिप्लोमेसी टाइमिंग और केयरफुल स्ट्रेटजी की बेहद जरूरत है ताकि हम अपनी तेल की नीड्स को पूरा कर सकें और राष्ट्र हितों को प्राथमिकता दे सकें। आप देख रहे हैं वन इंडिया। मैं हूं आकर्ष कौशिक। [संगीत] सब्सक्राइब टू वन इंडिया एंड नेवर मिस एन अपडेट। [संगीत] डाउनलोड द वन इंडिया ऐप नाउ।

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