पता चल गया ! गिलाफ-ए-काबा एप्सटीन के पास कैसे पहंचा ?

हैरत की बात ये है किन फाइल में गलाफ काबा का और किस्सवा का तस्करा है। सऊदी अरबिया का तस्करा है। उस एस्टीन फाइल में मुताहिद अरब इमारात की अहम तरीन शख्सियात का तस्करा है। अल इफानुल मुस्लिमीन का भी 400 मर्तबा तस्करा हुआ है। इस्टीन फाइल में। उसके अलावा दुनिया के कई अहम तरीन लोगों का नाम भी इस्टीन फाइल में आ चुका है। जिस पर हैरत हो रही है और सच्चाई जानना जरूरी है कि इसके पीछे का एजेंडा क्या है? पसे पर्दा क्या है? औरस्टीन जेफरी जो दुनिया का सबसे बड़ा सेक्स ऑफेंडर जो नाबालिग लड़कियों के साथ रेप करता था जो पूरी दुनिया को फहाशी का सामान फराहम करता था। दुनिया के बड़े-बड़े बिजनेसमैन को ताजिरों को, अमीरों को या हुक्मरानों को बुलाकर वो सेक्स का या अय्याशी का सामान फराहम करता था। उस शख्स का गिलाफ काबा से क्या लेना देना, किस्सवा से का लेना देना, अलवा मुस्लिमीन से क्या लेना देना? और इस वीडियो में इसी सच्चाई को जानेंगे, समझेंगे कि हकीकत क्या है। जो खबरें सामने आ रही है उसके मुताबिक एफस्टीन जेफरी के स्टाफ के बीच में और सऊदी अरब के एक शख्स के बीच में कई मर्तबा बातचीत हुई। ईमेल का तबादला हुआ और उसमें कहा गया कि किस्सवा को भेज दिया गया है।

गिलाफ काबा को भेज दिया गया है। और बाजाप्ता जो डॉक्यूमेंट्स रिलीज़ किए गए हैं अमेरिका के जस्टिस डिपार्टमेंट की तरफ से। उसमें डिलीवरी की रसीद मौजूद है। डॉक्यूमेंट्स मौजूद है कि जो किस्सवा सऊदी अरबिया से भेजा गया था वो मिल चुका है। और ये सब मार्च 2017 में हुआ जबकि 2008 में ही एफस्टीन जेफरी को सेक्स ऑफेंडर मान लिया गया था। वो मुजरिम ठहर चुका था और 18 माह की उसको सजा भी हो चुकी थी। यानी पूरी दुनिया इस बात को जानती थी कि स्टीन जेफरी मुजरिम है। दुनिया का सबसे घटिया शख्स है। घिनौना आदमी है। इसके बावजूद 2017 में एक शख्स ने ईमेल पर बातचीत की एफस्टीन जेफरी से उसकी टीम से और कहा

गया कि किस्सवा को भेज दिया गया है। और एक दो मर्तबा नहीं बल्कि तीन मर्तबा भेजने का तस्करा मिलता है। इसी तरह अलवानुल मुस्लिमीन का भी उसमें नाम आता है। और जो रिपोर्ट सामने आई है, जो तफसीलात अब तक सामने आई है। क्योंकि अमेरिका के जस्टिस डिपार्टमेंट का दावा है कैपस्टीन जेफरी से जुड़ी हुई तकरीबन 6 मिलियन से ज्यादा ईमेल्स हैं, फाइलें हैं, डॉक्यूमेंट्स हैं और उनमें से 35 लाख को अब तक पब्लिक में रिलीज़ कर दिया गया है। उसको सामने लाया गया है। लेकिन अभी भी ढाई लाख डॉक्यूमेंट्स और ईमेल का रिलीज़ होना बाकी है और उसको रिलीज़ नहीं किया जा रहा है। अब तक जो 35 लाख डॉक्यूमेंट्स रिलीज़ हुए हैं, उसमें

तस्करा मौजूद है कि मार्च 2017 में या 2017 के अगले महीनों में उज़ैर अलहमदी नाम के एक शख्स से एफस्टीन जेफरी की एस्टीन जेफरी के स्टाफ की बातचीत हुई और उसमें कहा गया कि जो किस्सवा है जो गिलाफ काबा है वो एफस्टीन जेफरी को भेज दिया गया। उसके बाद यह डॉक्यूमेंट्स मौजूद है कि एफस्टीन जेफरी को वह मिल गया है, डिलीवर हो गया है। और ये सब जो एफस्टीन जेफरी का पर्सनल आइलैंड और जजीरा था वहां ये सब भेजा गया। इसके अलावा एक तस्वीर सामने आई है जिसमें देखा जा रहा है कि फर्श पर कोई चीज बिछी हुई है और एस्टीन जेफरी किसी शख्स को उसकी तरफ उंगली का इशारा करके दिखा रहा है कि ये देखो और लोग दावा कर रहे हैं कि ये जो चीज नीचे नजर आ रही है यह किसवा है गिलाफ कावा है जिसको कालीन की तरह फर्श पर जमीन पर बिछा दिया गया और एस्टीन जेफरी उसकी तरफ इशारा कर रहा है। तस्करा यह है कि तीन किस्तों में किस्सवा को

गिलाफ काबा को एपस्टीन जेफरी को भेजा गया। उसके अलावा इस बात का भी तस्करा डॉक्यूमेंट्स में मौजूद है कि सऊदी अरबिया की कुछ और अहम चीज़ें भी जैसे कालीन वहां का रेशम और दूसरी एशिया एफस्टीन जेफरी को उज़ैर अल अहमदी नामी शख्स की तरफ से भेजी गई। ईमेल का तबादला हुआ। अब खाना काबा की तरफ से सऊदी अरबिया की तरफ से इस बात की वजाहत आई है कि गिलाफ काबा और किस्सवा के बारे में जो दावा किया जा रहा है कि एस्टीन जेफरी को भेजा गया ये सब झूठ है हकीकत के खिलाफ है सच्चाई से इसका कुछ भी लेना देना नहीं कुछ लोगों ने इसकी वजाहत की कि एस्टीन जेफरी हो सकता है जादू करता हो कुछ ऐसा काम कर रहा हो इस वजह से उसने गलाफ काबा को मंगवाया हो क्योंकि जो जादूगर होते हैं या जो दुआ तावीज का काम करते हैं वो लोग मुकद्दस चीज

चीजों का मुकद्दस अशिया का एतराम भी करते हैं। लेकिन सबसे ज्यादा मुस्लिम दुनिया में इस बात को लेकर बेचैनी है, परेशानी है कि गलाफ काबा किसवा सबसे ज्यादा मुकद्दस है। क्योंकि दुनिया भर में मुसलमानों के लिए सबसे मुकद्दस और सबसे काबिल एहतराम कोई मकाम है। तो काबा शरीफ है। क्योंकि वो अल्लाह तबारक व ताला का घर है। बैतुल्लाह है। और एक मुसलमान के नजदीक इससे ज्यादा मुकद्दस कोई और मकाम नहीं। ये नंबर वन है। उसके बाद उस गला उस काबा शरीफ के ऊपर एक कपड़ा चढ़ाया जाता है जिसको गिलाफ काबा कहा जाता है। उसी को किस्सवा कहा जाता है। और हर साल उस गलाफ काबा को किस्सवा को तब्दील किया जाता है। याकुम साल के मौका पर यानी जो नया इस्लामी साल होता है। उस दिन एक तक़रीब का एहतमाम किया जाता है। और खिलाफ-ए-काबा को तब्दील कहता है। यह जो गिलाफ-ए-काबा तैयार होता है, तो सऊदी अरब की निगरानी में तैयार होता है। बजाप्ता उसके लिए एक डिपार्टमेंट मौजूद है। और बाजाप्ता सोने के पानी का इस्तेमाल किया जाता है। सोने से उस पर लिखा

जाता है। लाखों रुपए उस पर खर्च होते हैं और हर साल उसको लगाया जाता है। फिर पुराना तब्दील किया जाता है। जो वहां से हटा दिया जाता है पुराना किस्सवा तो उसको दुनिया के बड़े हुक्मरानों में तकसीम किया जाता है। खासतौर पर वो पार्ट जिस पर सोने के पानी से कुछ लिखा जाता है। जिस पर सोने का टुकड़ा चसपा रहता है। वो दुनिया के बड़े-बड़े हुक्मरानों को सरबराहों को या अहम तरीन मुस्लिम शख्सियत को सऊदी अरब की हुकूमत की तरफ से तोहफे के तौर पर दिया जाता है और दुनिया भर के हुक्मरान उसको संभाल कर रखते हैं। वो हुक्मरान वो लीडर वो शख्स सबसे ज्यादा खुशनसीब माना जाता है जिसको सऊदी अरबिया गिलाफ काबा यानी किस्सवा तोहफे के तौर पर देती है। एक टुकड़ा दे ज्यादा दे जितना भी दे और यह सऊदी अरब की हुकूमत ही तकसीम करती है। कोई और नहीं। उसके अलावा किसवा का

जो दूसरा पार्ट होता है, जो कपड़ा होता है, जिस पर सोने का पानी लगा हुआ नहीं होता, उसको भी जो रॉयल फैमिली है, जो शाही फैमिली है, उनकी तरफ से ही किसी को हदिया में दिया जाता है। अब सवाल यह है कि एस्टीन जेफरी को ये क्यों भेजा गया और इस पर मुकम्मल तौर पर खामोशी क्यों बरती जा रही है। उसके अलावा कुछ ईमेल में यह तस्करा भी मौजूद है कि अज़ीज़ अल अहमदी ने यह दावा किया कि एस्टीन जेफरी और हिज़ एक्सीलेंसी के बीच में बातचीत वो कराना चाहते हैं या हिज एक्सीलेंसी एस्टीन जेफरी की कंपनी से लुत्फ अंदोज होना चाहते हैं। फायदा उठाना चाहते हैं और हिज एक्सीलेंसी किसी भी काबिल तरीन शख्सियत के लिए अहम तरीन शख्सियत के लिए ही इस्तेमाल किया जाता है कि कोई अहम ओहदा पर फायज़ हो। उसके अलावा यह भी कहा जा रहा है कि एक मामले में अजीज अल अहमदी ने रफत असबाग का तस्करा किया। उसका ईमेल कॉपी पेस्ट करके एस्टीन जेफरी को

भेजा कि वहां से ताखिर हो रही है। दरअसल मामला है आरामको का। आरामको कंपनी के बारे में एस्टीन जेफरी ने आदेश दिया था कि वो कंपनी लिस्टेड नहीं होनी चाहिए और कंपनी लिस्टेड हो गई तो उसके बारे में एस्टीन जेफरी ने अजीज अहमदी को लिखा और उसने कहा कि मैं रफत असबाक से मालूम करके बताता हूं कि क्यों उसको लिस्टेड किया गया? क्यों इस फैसले को नहीं माना गया? रफत असबाक के बारे में दावा किया गया कि वह सऊदी अरब के वली अहद मोहम्मद बिन सलमान के एडवाइजर और मुशीर रहे हैं। इसी तरह कुछ और मामले भी सामने आए। कुछ और दावे भी सामने आए हैं। अब गलाफ काबा का एस्टीन जेफरी के पास पहुंचना या उसके महल में पहुंचना, उसके जजीरे पर पहुंचना पूरी दुनिया के लिए हैरानी की बात है। और इस पर सवाल पूछा जा रहा है कि खामोशी क्यों बरती गई? सच्चाई क्या है

? हकीकत क्या है? का झूठ पर मबली बातें हैं या कुछ लेना देना है। एक ईमेल में यह भी तस्करा है कि किसी मस्जिद में या मजहबी इबादतगाह में गलाफ काबा का इस्तेमाल किया जाएगा। लेकिन एस्टीन जेफरी का जो पर्सनल जजीरा है जिसका नाम है लिटिल सेंट जेम्स या सेंट थॉमस वहां किसी मस्जिद के होने का कोई तस्करा नहीं मिलता या किसी चर्च के या दूसरे मजहबी मकामात के होने का तस्करा नहीं मिलता। इस्टीन जेफरी के जजीरों पर सिर्फ अय्याशी के मकामात है