नमस्ते, मैं हूं असलीम और आप देख रहे हैं एनडीt इंडिया। अमेरिकी नौसेना के हजारों सैनिक समुद्र के बीच महीनों से तैनात और उनकी हालत इतनी दर्दनाक कि किसी को अपने दादा के अंतिम संस्कार में जाने का मौका तक नहीं मिला। किसी मां को अपने बच्चों को महीने से गले लगाने का अवसर नहीं मिला। तो कोई टॉयलेट बंद होने की वजह से कई घंटों लाइन में खड़ा है। वॉलस्ट्रीट जनरल में छपी यह रिपोर्ट बताती है कि कैसे ईरान पर संभावित हमले की तैयारी में अमेरिकी सैनिकों की जिंदगी अब टूट रही है। बिखर रही है और चुपचाप बर्बाद हो रही है। अमेरिका का सबसे बड़ा युद्धपोत [संगीत]
यूएसएस जेरार्ड आरफोर्ड एक तैरता हुआ शहर लगभग 5000 सैनिकों के साथ। लेकिन आज इसका नाम सैनिकों के दिलों में गर्व नहीं बल्कि थकान, दर्द और डर का प्रतीक बन गया है। द वर्ल्ड स्ट्रेट जनरल की रिपोर्ट में बताया गया कि यह जहाज पिछले आठ महीनों से लगातार समुद्र में भटक रहा है। पहले मेडिटेरियन, फिर कैरेबियन और अब फिर से खींचकर मिडिल ईस्ट भेज दिया गया। ईरान पर संभव हमला रोकने या करने के रणनीति के तहत। लेकिन इन बदलते मिशनों की कीमत सैनिकों के परिवार चुका रहे हैं। एक नाविक अपने ग्रेट ग्रैंडफादर के निधन में शामिल नहीं हो पाया। एक मां लगभग एक साल से अपनी बेटी से दूर है। वो कहती हैं अब लगता है नेवी ही छोड़ दी। कुछ नाविक बताते हैं हब मानसिक रूप से टूट रहे हैं। और सबसे
शर्मनाक बात इस अरबों डॉलर के युद्धपोत पर टॉयलेट तक सही से काम नहीं कर रहे। सैनिक बताते हैं कई बार टॉयलेट बंद, जाम या घंटों तक खराब रहते हैं। कई को 45 मिनट तक लाइन में लगना पड़ता है अपनी बारी के लिए टॉयलेट करने के लिए। एक सैनिक के पिता ने बताया उसे ना दादा के निधन पर भेजा गया ना बहन की तलाक में और ना ही भाई की बीमारी में। संपर्क तक हफ्तों गायब रहता है। मतलब हफ्तों तक कोई संपर्क नहीं। कभी दो-तीन हफ्तों तक घोस्ट मोड़ में जहाज रहता है। इसका मतलब है कि कोई फोन नहीं, कोई मैसेज नहीं। यह सिर्फ दूरी नहीं यह टूटना है। हर सैनिक अपने अंदर कुछ ना कुछ अब खो रहा है। खुद कप्तान ने भी मान लिया कि इस एक्सटेंशन का स्टिंग सबको चुभा है। कई सैनिकों ने कहा हम घर लौट कर
नेवी छोड़ देंगे। और सबसे बड़ा डर अगर इतने महीनों के बाद ईरान के खिलाफ वास्तविक युद्ध का आदेश मिल जाए तो क्या यह थके टूटे मानसिक रूप से दबे सैनिक अमेरिका की रक्षा कर पाएंगे? अमेरिका का नाम फिर से रोशन कर पाएंगे। नेवी के पूर्व अधिकारी भी मानते हैं कि लंबे डिप्लॉयमेंट जहाजों को भी खा जाते हैं। पार्ट्स टूटते हैं। मेंटेनेंस रुक जाता है और एक जरूरी जहाज धीरे-धीरे अपनी शक्ति खोने लगता है। फिर चाहे वो कितना ही बड़ा क्यों ना हो। सैनिकों की पत्नियां, बच्चे, माता-पिता घरों में इंतजार कर रहे हैं। किसी की पत्नी 17 बॉक्स भेज चुकी। किसी में खाना, किसी में यादें। एक मां तो एयर बीएनबी तक बुक कर चुकी थी कि बेटे से मिलने के लिए लेकिन आखिरी पल में मैसेज आया मां सब कैंसिल कर दो हम वापस नहीं आ रहे। यह खबर सिर्फ खबर नहीं है। यह वाल्ट जनरल की वो खरा है जो अमेरिक
नौसेना के अंदर दबे दर्द को बाहर निकालती है। जब दुनिया अमेरिका की शक्ति की बात करती है तो यूएसएस, जेराफोर्ड जैसे जहाजों का नाम लिया जाता है। लेकिन इन जहाजों के अंदर बैठी युवा आंखों में आज थकान, मायूसी और डर है। कभी ईरान का खतरा, कभी परिवार से दूरी, कभी टॉयलेट टूटे, कभी टॉयलेट में खराबी और कभी घर की याद। युद्ध सीमा पार नहीं मन के अंदर भी चलता है। और आज अमेरिका के हजारों जवान इसी अंदरूनी
युद्ध से लड़ रहे हैं। वो परेशान हैं। वो इसे जीतने की कोशिश कर रहे हैं। इस खबर [संगीत] पर आपकी क्या राय है? क्या अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अब यूएसएस जेरा युद्धपोत को वापस बुला लेना चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर बताइएगा। [संगीत]