ईरान इजराइल अमेरिका युद्ध अपडेट: ईरान के बाकी रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने फोन पर क्या कहा?
मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। एक तरफ ईरान है, दूसरी तरफ अमेरिका और इजराइल। लेकिन इस पूरे संघर्ष के बीच एक बड़ा सवाल उठ रहा है। क्या रूस पर्दे के पीछे से ईरान की मदद कर रहा है? दरअसल हाल ही में तेहरान से आई एक खबर ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। रूस के राष्ट्रपति वलादमीर पुतिन ने सीधे ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजियान को फोन किया। दोनों के बीच हुई इस बातचीत ने कई नए कयासों को जन्म दे दिया है। हालांकि पुतिन ने अभी अपने पूरे पत्ते नहीं खोले हैं। पुतिन ईरान का बुरे समय में साथ देगा, सैन्य समर्थन
देगा। इस पर तो ज्यादा कुछ नहीं कहा। लेकिन ईरान के साथ कहीं ना कहीं इस पूरे युद्ध में खड़ा नजर आ रहा है और दोनों की बातचीत जो सामने आई है उससे यह साफ समझ आता है कि रूस फिलहाल मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव को रोकना चाहते हैं। ईरान के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। क्या हुई है बातचीत? चलिए सबसे पहले आपको इसकी जानकारी देते हैं। दरअसल रूसी विदेश मंत्रालय के मुताबिक पुतिन ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामने और देश के लोगों के प्रति अपनी संवेदना राष्ट्रपति पजशियान से फोन पर जताई है। उन्होंने यह भी कहा कि हालिया हमलों में आम नागरिकों की मौत बेहद दुखद है। पुतिन ने फोन पर कहा कि वह खाड़ी देशों के नेताओं के साथ लगातार संपर्क में हैं ताकि इस संकट का कोई शांतिपूर्ण समाधान निकाला जा सके। वहीं ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजिशकियान ने मुश्किल वक्त में रूस के समर्थन और एकजुटता के लिए पुतिन का धन्यवाद भी किया है। साथ ही मिडिल
ईस्ट में बढ़ते तनाव को तुरंत कम करने की पेशकश की है। सभी पक्षों को कूटनीतिक रास्ता अपनाना चाहिए। ऐसी बात कही है रूसी राष्ट्रपति वलादमीर पुतिन ने। वलादमीर पुतिन लगातार ईरान के संपर्क में हैं। कहीं ना कहीं पर्दे के पीछे से कहा जा रहा है कि ईरान को सहायता कर रहे हैं। उन्होंने ही लोकेशन बताई है। इसी वजह से सटीक निशाना ईरान ने इसी वजह से अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर लगाया है क्योंकि पीछे से रूस ने मदद की है। कई मामलों में रूस मदद कर रहा है। यह पर्दे के पीछे की कहानी है और रूस ने अब खुद फोन करके नए कयासों को जन्म दे दिया है। वहीं इन सब सवालों के बीच पश्चिम एशिया में तेल को लेकर चिंता बढ़ गई है। अमेरिका लंबे समय से भारत पर रूस से तेल ना खरीदने का दबाव डालता रहा है। लेकिन अचानक हालात ऐसे बन रहे हैं कि ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भारत को अपने फैसले खुद लेने पड़ सकते हैं। भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपो ने भी साफ कहा है कि तेल की आपूर्ति किससे ली जाए यह पूरी तरह भारत का फैसला होगा। उन्होंने यह भी
कहा कि किसी भी संघर्ष का समाधान अंततः बातचीत से ही निकलता है। उधर रूस पहले ही अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों की निंदा कर चुका है और उसने साफ कहा है कि हालात को तुरंत कूटनीतिक रास्ते पर वापस लाया जाना चाहिए। अब सवाल यही है कि क्या रूस वाकई पर्दे के पीछे से ईरान की मदद कर रहा है या फिर यह सिर्फ कूटनीतिक दबाव की राजनीति है? मिडिल ईस्ट की यह जंग आने वाले दिनों में पूरी दुनिया की राजनीति और तेल बाजार को किस दिशा में ले जाएगी? इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। जाते-जाते आप हमारी अगली रिपोर्ट देखिए जिसमें यह खुलासा हुआ है कि ईरान को मदद कर रहा था रूस। ईरान ने कैसे अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर इतना तगड़ा निशाना साधा है। देखिए हमारी अगली रिपोर्ट। फिलहाल इस खबर पर आपकी जो भी राय हमें कमेंट करके जरूर बताएं। बने रहिए लाइव हिंदुस्तान के साथ। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नोबेल पुरस्कार के सपने देखते हैं। लेकिन उनकी करनी और कथनी में जमीन आसमान का अंतर है। क्योंकि उनके कार्यकाल में कई हमले हो चुके हैं और अब सीधे-
सीधे अमेरिका जंग ईरान से कर रहा है। लेकिन इस जंग में जहां डोनाल्ड ट्रंप को लगा था कि उनकी वाहवाही होगी वहीं ट्रंप को जबरदस्त सुनने को मिल रहा है। नाराजगी झेलनी पड़ रही है। क्यों? क्योंकि अमेरिका को लगा था कि ईरान अपने ऊपर हुए हमले का जवाब नहीं दे पाएगा। क्योंकि खाड़ी देशों में अमेरिका की पकड़ मजबूत है। वो डर जाएगा। खामने की हत्या के बाद ईरान शोक मनाएगा और युद्ध नहीं कर पाएगा। और यही डोनाल्ड ट्रंप की सबसे बड़ी गलती थी। गलती अपने दुश्मन को कमजोर समझने की। और अब ईरान बब्बर शेर की तरह अकेला खाड़ी देशों के साथ इजराइल अमेरिका की नाक में दम कर रहा है और तैयार बैठा है युद्ध खत्म करने के लिए। यानी आर या पार वाली स्थिति बनते हुए दिखाई दे रही है। जबकि एक्सपर्ट की मानें तो लंबे युद्ध के लिए अमेरिका खुद पूरी तरह तैयार ही नहीं है। अमेरिका के करोड़ों नुकसान होने के
आसार हैं। और अब इसी सब को देखते हुए खाड़ी देशों ने अमेरिका को दबे आवाज में ही सही लेकिन लताड़ना शुरू कर दिया है। और ईरान को नहीं बल्कि अमेरिका को ही युद्ध की वजह बता दी है। जी हां, कट्टर दुश्मन अमेरिका और ईरान एक बार फिर एक दूसरे के खून के प्यासे बन गए हैं और दोनों के बीच भीषण जंग छिड़ गई है। दो देशों के बीच छिड़े इस युद्ध में सबसे ज्यादा नुकसान किसी का हुआ है तो वह है खाड़ी देश। पिछले सप्ताह अमेरिकी और इजराइली हमलों से तिलमिलाए ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाते हुए मिसाइलों की बारिश कर दी। इससे खाड़ी देशों में अब तक कई लोगों की मौत हो गई और लाखों डॉलर का नुकसान हुआ। हालांकि अब यह देश इस नुकसान का दोष ईरान को नहीं बल्कि अमेरिका को ही दे रहे हैं। खाड़ी देशों ने शिकायत की है कि उन्हें अमेरिका और इजराइली हमलों के बाद अपने देशों पर ईरानी ड्रोन और मिसाइलों के बौछार के लिए तैयार होने के लिए पूरा समय ही नहीं दिया गया। उन्होंने अमेरिका पर बड़े आरोप भी लगा
ए हैं। दो खाड़ी देशों के अधिकारियों ने कहा कि उनकी सरकारें अमेरिका के युद्ध को संभालने के तरीके से निराश हैं। उन्होंने कहा कि उनके देशों की अमेरिकी हमले की पहले से जानकारी नहीं दी गई थी। एक अधिकारी ने कहा खाड़ी देश निराश हैं और गुस्से में भी हैं कि अमेरिकी सेना ने उनकी कोई मदद नहीं की। इलाके में यहां माना जाता है कि अमेरिका सिर्फ अपने सैनिकों और इजराइल की सुरक्षा पर ध्यान दे रहा है और खाड़ी देशों को खुद की रक्षा करने के लिए छोड़ दिया गया है। अधिकारी ने यह भी कहा उनके देश के इंटरसेप्टर का स्टॉक तेजी से कम हो रहा है। व खाड़ी देशों ने चेतावनी भी दी थी। जी हां, इससे पहले सऊदी अरब, यूएई और कुवैत जैसे खाड़ी देशों ने डोनाल्ड ट्रंप को पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर युद्ध शुरू हुआ पूरे इलाके में तबाही मच सकती है। रिपोर्ट्स में यह बात भी सामने आई थी कि ट्रंप ने तत्कालीन चुनौतियों को देखते हुए ईरान पर हमला ना करने के खाड़ी देशों के अनुरोध को मान लिया था। हालांकि अब खाड़ी देशों का कहना है कि उनकी चेतावनियों को
नजरअंदाज कर ट्रंप ने बड़ी गलती की है। ईरान ने मिसाइलों की बौछार। ईरान ने युद्ध शुरू होने के बाद से खाड़ी देशों को लगातार निशाना बनाया है। जानकारी के मुताबिक जंग शुरू होने के बाद से ईरान ने 5 अरब खाड़ी देशों को निशाना बनाकर कम से कम 380 मिसाइलें और 10,480 से ज्यादा ड्रोन दागे हैं। अधिकारियों के मुताबिक इन हमलों में कम से कम 13 लोग मारे गए हैं। वहीं ईरान ने सऊदी और बहरीन जैसे देशों में तेल ठिकानों पर भी अटैक किया है। जिससे ग्लोबल ऑयल सप्लाई चेन पर खतरा मंजरा रहा है। अब फिलहाल खाड़ी देशों के इन अधिकारियों ने सीधे तौर पर अमेरिका को दोषी करार दिया है इस युद्ध को लेकर और कहा है कि खाड़ी देश तैयार नहीं था जिस तरीके से ईरान ने हमला किया है। अब इस पूरी खबर पर आपकी जो भी राय हमें कमेंट करके अपनी राय जरूर दें। बने रहिए लाइव हिंदुस्तान के साथ। ओ आजा मिडिल ईस्ट में शुरू हुई जंग का अंत अब कब होगा यह किसी को नहीं पता। इसकी मुख्य वजह है ईरानी सुप्रीम लीडर अली खामिनाई का माना जाना। दरअसल इजराइल की ओर से किए गए अटैक में अली
खामिनाई की मौत हो गई। जिसके बाद अब ईरान भड़का हुआ है। बल्कि ईरान ने खामनाई की मौत का बदला लेने का ऐलान भी कर दिया। इजराइल के हमले के बाद ईरान खाड़ी देशों पर टूट पड़ा है। एक-एक करके ईरान खाड़ी देशों को निशाना भी बना रहा है। यहां तक कि ईरान ने बहरीन में मौजूद अमेरिकी बेसों को अपना निशाना बनाते हुए उस पर हमला किया। इजराइल और अमेरिकी हमलों का ईरान ने बदला लेने का दरअसल ऐलान भी किया था और अब उसका दावा करना शुरू कर दिया है। ईरान ने करीब आठ देशों में मौजूद अमेरिकी बेस पर हमला किया जिसमें बहरीन के नेवल बेस, क़तर, यूएई, सऊदी अरब, इजराइल, कुवैत, दुबई शामिल है। हमलों के बाद बहरीन ने कहा कि अमेरिकी नेवी के पांचवें फ्लिट के हेड क्वार्टर को मिसाइल हमलों से निशाना बनाया गया है। खबर है कि बहरीन में ईरानी शाहिद 136 क्रोन ने अमेरिकन फैसिलिटी को जबरदस्त नुकसान पहुंचाया। सबसे खास बात तो यह है कि इस हमले के बाद बहरीनी लोग खुशी मनाते नजर आए। दुबई में भी ईरान ने जबरदस्त तबाही मचाई है। ईरान ने एयरपोर्ट पर ताबड़तोड़ हमले किए हैं। इसके अलावा द पाम होटल और बुज खलीफा के पास भी हमले किए गए हैं। कतर में भी धमाकों की आवाजें सुनाई दी। आपको बता दें
मिडिल ईस्ट के कई देशों में अमेरिकी मिलिट्री ने अपने बेस बनाए हुए हैं। जहां पर बड़ी संख्या में सैनिकों और हत्यारों की तैनाती मौजूद है। इससे पहले अमेरिका और इजराइल ने शनिवार को पूरे ईरान में टारगेट करते हुए एक बड़ा हमला किया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी लोगों से अपनी सरकार पर कब्जा करने की अपील की थी। [संगीत] [संगीत]


