ईरान, इजरायल, अमेरिका युद्ध अपडेट: ईरानी हमलों से खाड़ी देशों का भड़का गुस्सा, ट्रंप पर निकाला भड़ास
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नोबेल पुरस्कार के सपने देखते हैं। लेकिन उनकी करनी और कथनी में जमीन आसमान का अंतर है। क्योंकि उनके कार्यकाल में कई हमले हो चुके हैं और अब सीधे-सीधे अमेरिका जंग ईरान से कर रहा है। लेकिन इस जंग में जहां डोनाल्ड ट्रंप को लगा था कि उनकी वाहवाही होगी वहीं ट्रंप को जबरदस्त सुनने को मिल रहा है। नाराजगी झेलनी पड़ रही है। क्यों? क्योंकि अमेरिका को लगा था कि
ईरान अपने ऊपर हुए हमले का जवाब नहीं दे पाएगा क्योंकि खाड़ी देशों में अमेरिका की पकड़ मजबूत है। वह डर जाएगा। खामने की हत्या के बाद ईरान शोक मनाएगा और युद्ध नहीं कर पाएगा और यही डोनाल्ड ट्रंप की सबसे बड़ी गलती थी। गलती अपने दुश्मन को कमजोर समझने की और अब ईरान बब्बर शेर की तरह अकेला खाड़ी देशों के साथ इजराइल अमेरिका की नाक में दम कर रहा है और तैयार बैठा है युद्ध खत्म करने के लिए यानी आर या पार वाली स्थिति बनते हुए दिखाई दे रही है। जबकि एक्सपर्ट की मानें तो लंबे युद्ध के लिए अमेरिका खुद पूरी तरह तैयार ही नहीं है। अमेरिका के करोड़ों नुकसान होने के आसार हैं और
अब इसी सब को देखते हुए खाड़ी देशों ने अमेरिका को दबे आवाज में ही सही लेकिन लताड़ना शुरू कर दिया है और ईरान को नहीं बल्कि अमेरिका को ही युद्ध की वजह बता दी है। जी हां, कट्टर दुश्मन अमेरिका और ईरान एक बार फिर एक दूसरे के खून के प्यासे बन गए हैं और दोनों के बीच भीषण जंग छिड़ गई है। दो देशों के बीच छिड़े इस युद्ध में सबसे ज्यादा नुकसान किसी का हुआ है तो वह है खाड़ी देश। पिछले सप्ताह अमेरिकी और इजराइली हमलों से तिलमिलाए ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाते हुए मिसाइलों की बारिश कर दी। इससे खाड़ी देशों में अब तक कई लोगों की मौत हो गई और लाखों डॉलर का नुकसान हुआ। हालांकि अब यह देश इस नुकसान का दोष ईरान को नहीं बल्कि अमेरिका को ही दे रहे हैं। खाड़ी देशों ने शिकायत की है कि उन्हें अमेरिका और इजराइली हमलों के बाद अपने देशों पर ईरानी ड्रोन
और मिसाइलों के बौछार के लिए तैयार होने के लिए पूरा समय ही नहीं दिया गया। उन्होंने अमेरिका पर बड़े आरोप भी लगाए हैं। दो खाड़ी देशों के अधिकारियों ने कहा कि उनकी सरकारें अमेरिका के युद्ध को संभालने के तरीके से निराश हैं। उन्होंने कहा कि उनके देशों की अमेरिकी हमले की पहले से जानकारी नहीं दी गई थी। एक अधिकारी ने कहा खाड़ी देश निराश हैं और गुस्से में भी हैं कि अमेरिकी सेना ने उनकी कोई मदद नहीं की। इलाके में यहां माना जाता है कि अमेरिका सिर्फ अपने सैनिकों और इजराइल की सुरक्षा पर ध्यान दे रहा है और खाड़ी देशों को खुद की रक्षा करने के लिए छोड़ दिया गया है। अधिकारी ने यह भी कहा उनके देश के इंटरसेप्टर का स्टॉक तेजी से कम हो रहा है। व खाड़ी देशों ने चेतावनी भी दी थी। जी हां, इससे पहले सऊदी अरब, यूएई और कुवैत जैसे खाड़ी देशों ने डोनाल्ड ट्रंप को पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर युद्ध शुरू हुआ पूरे इलाके में तबाही मच सकती है। रिपोर्ट्स में यह बात भी सामने आई थी कि ट्रंप ने तत्कालीन चुनौतियों को देखते हुए ईरान पर हमला ना करने के खाड़ी देशों के अनुरोध को मान लिया था। हालांकि अब खाड़ी देशों
का कहना है कि उनकी चेतावनियों को नजरअंदाज कर ट्रंप ने बड़ी गलती की है। ईरान ने मिसाइलों की बौछार। ईरान ने युद्ध शुरू होने के बाद से खाड़ी देशों को लगातार निशाना बनाया है। जानकारी के मुताबिक जंग शुरू होने के बाद से ईरान ने 5 अरब खाड़ी देशों को निशाना बनाकर कम से कम 380 मिसाइलें और 10,480 से ज्यादा ड्रोन दागे हैं। अधिकारियों के मुताबिक इन हमलों में कम से कम 13 लोग मारे गए हैं। वहीं ईरान ने सऊदी और बहरीन जैसे देशों में तेल ठिकानों पर भी अटैक किया है। जिससे ग्लोबल ऑयल सप्लाई चेन पर खतरा मंजरा रहा है। अब फिलहाल खाड़ी देशों के इन अधिकारियों ने सीधे तौर पर अमेरिका को दोषी करार दिया है इस युद्ध को लेकर और कहा है कि खाड़ी देश तैयार नहीं था जिस तरीके से ईरान ने हमला किया है। अब इस पूरी खबर पर आपकी जो भी राय हमें कमेंट करके अपनी राय जरूर दें। बने रहिए लाइव हिंदुस्तान के साथ। ओ मिडिल ईस्ट में शुरू हुई जंग का अंत अब
कब होगा यह किसी को नहीं पता। इसकी मुख्य वजह है ईरानी सुप्रीम लीडर अली खामिनाई का माना जाना। दरअसल इजराइल की ओर से किए गए अटैक में अली खामनाई की मौत हो गई। जिसके बाद अब ईरान भड़का हुआ है। बल्कि ईरान ने खामनाई की मौत का बदला लेने का ऐलान भी कर दिया। इजराइल के हमले के बाद ईरान खाली देशों पर टूट पड़ा है। एक-एक करके ईरान खाली देशों को निशाना भी बना रहा है। यहां तक कि ईरान ने बहरीन में मौजूद अमेरिकी बेसों को अपना निशाना बनाते हुए उस पर हमला किया। इजराइल और अमेरिकी हमलों का ईरान ने बदला लेने का दरअसल ऐलान भी किया था और अब उसका दावा करना शुरू कर दिया है। ईरान ने करीब आठ देशों में मौजूद अमेरिकी बेस पर हमला किया जिसमें बहरीन के नेवल बेस, क़तर, यूएई, सऊदी अरब, इजराइल, कुवैत, दुबई शामिल है। हमलों के बाद बहरीन ने क
हा कि अमेरिकी नेवी के पांचवें फ्लिट के हेड क्वार्टर को मिसाइल हमलों से निशाना बनाया गया है। खबर है कि बहरीन में ईरानी शाहिद 136 क्रोन ने अमेरिकन फैसिलिटी को जबरदस्त नुकसान पहुंचाया। सबसे खास बात तो यह है कि इस हमले के बाद बहरीनी लोग खुशी मनाते नजर आए। दुबई में भी ईरान ने जबरदस्त तबाही मचाई है। ईरान ने एयरपोर्ट पर ताबड़तोड़ हमले किए हैं। इसके अलावा द पाम होटचल औ
र बुज खलीफा के पास भी हमले किए गए हैं। क़तर में भी धमाकों की आवाजें सुनाई दी। आपको बता दें मिडिल ईस्ट के कई देशों में अमेरिकी मिलिट्री ने अपने बेस बनाए हुए हैं। जहां पर बड़ी संख्या में सैनिकों और हत्यारों की तैनाती मौजूद है। इससे पहले अमेरिका और इजराइल ने शनिवार को पूरे ईरान में टारगेट करते हुए एक बड़ा हमला किया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी लोगों से अपनी सरकार पर कब्जा करने की अपील की थी। [संगीत] [संगीत]


