ईरान अमेरिका इजराइल युद्ध के बीच 21 रमजान शहादत मोला अली की तैयारी

नमस्कार अस्सलाम वालेकुम लाइव हिंदुस्तान पर आप देख रहे हैं दीन दुनिया और मेरे साथ हैं मेरे सहयोगी मेरे साथी दिव्यांशु। जी हां, आज रात अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बहुत बड़ी धमकी दी है कि आज रात ईरान में वो होगा जो अब से पहले कभी नहीं हुआ। इसके साथ ही यूनाइटेड किंगडम में एक B1 बमबर तैनात किया गया है। कई तरीके की फ्लिट एक और दूसरी तरफ जो तीसरा एयरक्राफ्ट करियर है अमेरिका का वो भी मूव ऑन कर चुका है मिडिल ईस्ट की ओर। पहले से दो तैनात हैं। और दूसरी तरफ जब मैं आपसे चर्चा कर रहा था तो आपने बैकग्राउंड के लिए हजरत अली के शाइन और साथ में इमाम खाम नहीं और ये भीड़ इस चीज को आपने चुना और मैं ये समझना चाहूंगा और आज दर्शक भी

जहां तक वो देख पाए होंगे कि उन्हें लग रहा होगा कि आखिर ऐसा क्या है आज के? बिल्कुल देखिए ये बहुत बड़ा संदेश है। ये बहुत बड़ा पैगाम है। आज हम जब ये शो कर रहे हैं आज है 17 रमजान और 18 रमजान 17 18 रमजान से ईरान में बड़ी तैयारियां होनी शुरू हो जाती हैं। क्योंकि 19 रमजान वो मौका होता है वो वक्त होता है जब हजरत अली अल सलाम को जरबत लगी थी। मतलब उन पर हमला हुआ था और कूफा में उन पर हमला हुआ था। सजदे में वो थे। नमाज की हालत में वो थे और उन पर हमला हुआ था और दो दिनों तक के वो जख्मों से जूझते रहे थे और उसके बाद में 21 रमजान को उनकी शहादत हुई थी। तो 21 रमजान जो है बहुत खास होता है खासतौर से बहुत एक बड़े तबके के लिए और ईरान में भी खासतौर से बड़े पैमाने पर लोग इसमें लेकर के अज़ादारी करते हैं और हजरत अली की शहादत को लेकर के गम और गुस्से का इजहार करते हैं और ऐसे वक्त में जब ईरान जंग में है और ऐसे वक्त में जब इमाम खामने की भी शहादत हो चुकी है तो ये एक जैसा कि एक्सपर्ट बता रहे हैं दिव्यांशु ये एक हमासा एक हमासा का वक्त हो जाएगा एक हमासा शुरू हो जाएगा। हमासा का मतलब होता है जैसे

हमारे यहां एक वीर रस की बात होने लगती है। जब युद्ध शुरू हो जाता है उसको कहते हैं हमासा ईरान में। तो एक तो और इस बार हमासा के लिए दो तीन वजह है वहां पर। एक तो ये है कि इमाम खामने की शहादत हो गई और फिर 21 रमजान आने वाला है। 19 रमजान से ही शुरू हो जाएगा। आज 17 रमजान है तो और ऊपर से प्रेसिडेंट ट्रंप की धमकी कि ऐसा बड़ा हमला करेंगे जो आप बता रहे हैं कि बी वन बमबर लगा रहे हैं। तो कुल मिलाकर देखा जाए तो एक युद्धोमाद है आवाम के अंदर भी और आवाम पीछे नहीं क्योंकि इमाम आयतुल्लाह अली खामई ये कहते रहे कि आवाम को निकलना पड़ेगा। वो हमेशा कहते थे अपनी तकरीरों में अपने भाषण में अपने संबोधन में कि आवाम को साथ रहना होगा। तभी हम दुश्मन को पछाड़ सकते हैं। दुश्मन से निपट सकते हैं। तो आवाम उनके कॉल की का भ्रम रख रही है। उनकी उनकी इस आज्ञा का पालन कर रही है। और बड़े पैमाने पर ईरान में आज भी 17 रमजान को 18 रमजान को और 19 20 21 रमजान को तो एक अलग ही माहौल होने जा रहा है। और ऊपर से आप सोच सकते हैं वो सब कुछ सारे वो रिचुअल्स करेंगे जो वो हर साल करते हैं। लेकिन इस बार उनके रहबर उनके साथ नहीं है। रहबर की बातें उनके साथ नहीं। तो इसमें और बड़ा जो है एक बड़ा एक बड़ी एक और ज्यादा वलवला होगा। एक बहुत बड़ा

मजमा होगा और इजराइल और अमेरिका शायद कुछ ना कर पाए क्योंकि आवाम की शक्ति के आगे आप क्या ही कर लोगे? हम यानी मनोबल बढ़ाना, उनके अंदर जुनून पैदा करना, कुछ इस तरीके की चीज़ हैं। होगा अपने आप ही होगा क्योंकि हजरत अली की शहादत का वक्त आ रहा है। इमाम खामने शहीद हो चुके हैं। तो ईरान के लिए ये मौका बहुत बहुत बड़ा हो जाता है और साथ में दुश्मनों की धमकी कि बहुत बड़ा हमला करेंगे। तो वो दिखाना चाहते हैं कि करके दिखाओ। हम भी तो देखें कि आप कितना बड़ा हमला करते हो। तो एक तरह इस तरह का माहौल वहां पर बन रहा है क्योंकि मैं आपको बता दूं और हमारे दर्शक भी इस चीज को जानते हैं कि जो है 19 रमजान की को जो है हजरत अली की शहादत हुई थी और कूफा की मस्जिद में फजर की नमाज वो अदा कर रहे थे और इस दौरान सिर पर जहर बुझी तलवार से उन पर हमला किया था दुश्मनों ने और यहां पर उन्हें शहीद 21 रमजान को शहीद हुए दो दिनों तक और कहीं ना कहीं ये जो शहादत है वो आलिम इस्लाम के लिए बहुत मायने रखती है। ऐसे में ईरान में जिस तरह का माहौल चल रहा है उसको देखते हुए दुनिया भर में कहीं ना कहीं इसको लेकर एक अलग ही जज्बा देखने के लिए मिलेगा। हम ये 17 18 यानी एक दिन है 17 देखिए रमजान मतलब रमजान का जो महीने चल रहा है इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक इस्लामिक कैलेंडर जो है वो जो अंग्रेजी कैलेंडर की तारीखों के हिसाब से नहीं चलता है तो इस्लामिक कैलेंडर रमजान एक महीना है तो जैसे होता है ना नवंबर दिसंबर जनवरी फरवरी तो महीना अभी चल रहा है मार्च जो कैलेंडर है अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से लेकिन इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक ये रमजान का महीना चल रहा है और आज रमजान की 17 तारीख है आज 17 रमजान है रमजान की 17 तारीख है 19

तारीख को हजरत अली पर जो है जख्म होने उन्हें दिया गया था। उन पर तलवार मारी गई थी और हमला हुआ था और 21 रमजान को यानी रमजान के महीने की 21 तारीख को वो शहीद हो गए थे। तो कहीं ना कहीं जब बोलते हैं हम लोग तो ऐसा बोलते हैं कि आज 17 रमजान है। 19 रमजान से लेकर 21 रमजान तक ईरान में हजरत अली की शहादत को लेकर बड़ी अज़ादारियां होती है। अज़ादारी मतलब शोक व्यक्त करते हैं। उसमें इमाम हुसैन को भी याद करते हैं। हजरत अली की शहादत को याद करते हैं। और इस बार वो खास इसलिए है क्योंकि इमाम खामने साहब की भी कहीं ना कहीं यादें लोगों के ज़हन में हैं। और वह जब अज़ादारी करेंगे तो इमाम हुसैन और हजरत अली को तो याद करेंगे लेकिन जो गम है जो गुस्सा है और यह एक और मैं खबर देख रहा था मीडिया इसको हाईलाइट कर रहा है। हालांकि इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है लेकिन मीडिया ने जिस तरह से हाईलाइट किया और कहीं ना कहीं वो लक्ष्य है वो हद है ही कि आईआरजीसी ने कहा है कि पीएम बेंजामिन नितिन याू को जब तक के हम मिटा नहीं देते। ये आईआरजीसी ने कहा है तब तक हम चैन से नहीं बैठेंगे। वो अपने इमाम की शहादत का जब तक बदला नहीं लेते, इमाम खामने की शहादत का जब तक बदला नहीं ले लेते तब तक वो चैन से नहीं बैठेंगे। इस तरह की खबरें भी मीडिया में चल रही थी जो हमने आपके सामने रखी। हालांकि अभी इसकी हम ऑफिशियल पुष्टि नहीं करते लेकिन इस तरह की खबरें आज मीडिया पर आम रही। हम चलिए इसी के साथ खबर में आगे बढ़ते हैं। आखिर किस तरीके से जो पूरा माहौल है वह बहुत ज़्यादा तनावपूर्ण होता जा रहा है। एक तरीके से कहें तो पूरे क्षेत्र में युद्ध फैलता जा रहा है। एक रिपोर्ट आपको दिखाते हैं। अमेरिका को अब तक बहुत भारी नुकसान हुआ है

इस जंग में और वो पूरी तरीके से कहा जाए तो वो बैकफुट पर आ चुका है। भले वो तीसरा एयरक्राफ्ट अपना यहां पर डिप्लॉय करना चाहता हो। B1 बमबर लगा रहा हो। दूसरी तरफ वो सारी खबरें चल रही हैं। लेकिन सवाल ये है कि देखिए ये खबर है अपने आप में यूएस ने आखिरकार इस बात को मान लिया है कि इसका जो रडार सिस्टम है जो एक तरीके का सर्टी एयरबेस पर तैनात जॉर्डन में 300 मिलियन डॉलर इसकी प्राइस बताई जा रही है। इसका मूल्य मूल्यांकन है ये और उतने का ये पूरा सिस्टम जो रडार है वो खत्म हो चुका है। जी जॉर्डन में हां बिल्कुल जॉर्डन में और हम लोग कई बार रिपोर्ट में ये दावा करते रहे हैं दिखाते भी रहे बकायदा तस्वीरें कि जॉर्डन में किस तरीके से तैनात किया गया था वो 15 ई लेकर हो या 15 ईगल स्ट्राइककर जो है उन सबको और इसके अलावा थर्ड एयर डिफेंस सिस्टम हो वहां पर या फिर ये जिस तरीके से ये रडार सिस्टम था वो सब कुछ भस्त हो चुका है। कतर का हमने देखा 1.1 बिलियन डॉलर का वो किस तरीके से वहां पर पूरी तरीके से खत्म कर दिया ईरान ने और इसके अलावा यूएई में या फिर सऊदी अरबिया में जो भी इनके बेससेस हैं उनको पूरी तरीके से नष्ट कर दिया है और एक के

बाद एक कई तरीके की स्ट्राइक जो ईरान की तरफ से की जा रही है वो मिसाइल के हमले हो या फिर दूसरे वो लगातार जारी है। एक और खबर आती है सऊदी अरब को लेकर कि वो खबर हम स्लाइड दिखाएंगे। किस तरीके से जो अभी मसूद पिचकियान की तरफ से एक बयान जारी किया गया था कि हम माफी मांगते हैं अपने जो नेबर्स हैं हमारे जो पड़ोसी हैं उनको लेकर लेकिन उसके कुछ ही देर बाद एक यूएई पर हमला हो जाता है और दूसरा हमला सऊदी के जो वहां से नजदीक एक यही यही ठीक है जो एक सऊदी से कुछ 10 नॉटिकल माइल्स दूरी पर पर्शियन गल्फ में जो है एक हमला कर देते हैं एक जहाज पर एक वेसल पर और ये देखिए जुबैल ये टारगेट है जो ईरान काल नियर सऊदी अरबै टारगेटेड बाय ईरान और उसमें आग लग जाती है। एक तरफ वो कहते हैं कि हम अपने पड़ोसियों के साथ रिश्ते अच्छे करेंगे और हम उन पर हमला नहीं कर रहे हैं जब तक कि उनके यहां से हम पर ना किया जाए। तो ये चीज किसके लिए? देखिए ये भी स्पष्ट कर दें। ईरान के प्रेसिडेंट मसूद पजेशियान ने एक माफी मांगी। इसको ट्रंप ने कहा कि सरेंडर कर दिया ईरान ने। आप इसको बहुत गौर से समझिए। इस पर हमने एक और वीडियो बनाया था अभी इससे पहले। लेकिन दुनिया तक हम इसको और स्पष्ट कर देते हैं ताकि आवाम या लोग जो दर्शक हैं जो सोच रहे हैं कि क्या ईरान सरेंडर हो गया या ईरान के प्रेसिडेंट ने जब ये बात ईरान के प्रेसिडेंट ने सिर्फ दो

मुल्कों के लिए ये बात कही है। एक है तुर्की और एक है तुर्की और एक है अज़र भाईजान तो उनके लिए ये बात कही है। उन्होंने कहा है कि वहां से हमला नहीं हुआ था लेकिन हमारी तरफ से हमला हो गया। इसीलिए उनसे माफी चाहते हैं। लेकिन जिनके यहां बेस है, जिनके यहां से लगातार हमले हो रहे हैं, उनके लिए माफी थोड़ी ना मांगी और उन पर तत्काल अटैक हो गया तो आईआरजीसी तो अपना काम कर ही रही है। तो उन्होंने जो माफी मांगी है और एक बड़ा दिल होता है। देखिए ईरान बड़ा दिल भी दिखा रहा है और ये होता है पड़ोसियों के साथ बड़ा दिल दिखाना भी पड़ता है क्योंकि हमें आपको हमेशा उनके साथ रहना है। हमेशा ये याद रखो ये कहा भी गया है कि अपने पड़ोसी को अपने रिश्तेदार की तरह समझो। जरूरत पड़ने पर पहले वो तुम्हारे काम आएगा। बाकी तुम्हारे रिश्तेदार तो कहीं और से आएंगे। तो पड़ोसी को इज्जत दो। उसके साथ बहुत अच्छा व्यवहार रखो। तो यही एक बड़ा दिल दिखाते हुए उन्होंने तुर्की और अज़रबजान से माफी मांगी है कि जो हमला हुआ था वो

गलती से हो गया होगा क्योंकि आपके यहां से नहीं हुआ था और हो गया। युद्ध में ये चलता है। क्षमा कीजिए माफ कीजिए। लेकिन जहां से हो रहा है उनके लिए कोई माफी नहीं है। उनको उनकी तबाही का सारा इंतजाम आईआरजीसी ने कर रखा है और भारी तबाही हो रही है उनके यहां पर। आप खुद बता रहे हैं यूएई में सऊदी में वो तो मार रहे हैं भाई उनको उन्होंने बेस क्यों दिया आपने अमेरिका को मना करने पर भी आपने अपनी जमीनें क्यों दी बार-बार कहने के बावजूद भी क्यों दी अब भुगतिए परिणाम एक और चीज श में मैं चाहूंगा फिर आगे बढूंगा इलहाम अली जो अजरानी राष्ट्रपति है जब उनके यहां पे एक ड्रोन अटैक होता है उसके बाद वो साफ तौर पर इशारा करते हैं कि मुझे ईरान की तरफ से माफी चाहिए वरना हम भी हमला करेंगे तो क्या ये मसूद पिचकियान की तरफ से कूटनीतिक तौर पर उसी माफी जवाब और माफ़ मांगना कोई अच्छी बुरी बात थोड़ी ना है। माफ़ी मांगना अच्छी बात है। और वही माफ़ मांगते हैं जिनके दिल बड़े होते हैं जो और ताकतवर ही माफी मांगता है। क्षमा वीरस भूषणम। तो इसलिए कोई इसमें हैरत की बात नहीं है। उन्होंने उन्हीं दो देशों के लिए ये शब्द कहे। तो प्रेसिडेंट ट्रंप ने इस बात को लपक लिया और उन्होंने एक लिखा कि भाई ईरान ने सरेंडर कर दिया है। वो तो

माफी मांग रहे हैं। ऐसा कुछ भी नहीं है जो कि मीडिया रिपोर्ट्स बता रही है। जितना हमने पढ़ा भी है तो अपने दर्शकों को भी जिन्हें ये कंफ्यूजन है और इस तरह की बातें भी कहीं ना कहीं वेस्टर्न मीडिया शुरू करता है ना फैलाना कि ईरान ने माफी मांगी। ईरान सरेंडर कर रहा है अरब देशों से। अरब देशों से कोई माफी नहीं मांगी है। सिर्फ तुर्की और अज़र भाईजान के लिए उन्होंने ये शब्द कहे हैं कि हम माफी चाहते हैं कि आपने नहीं किया था फिर भी हमला हो गया। आप पर अटैक हो गया। बस इतनी सी बात है। बाकी जहां से अटैक हो रहा है वहां पर जवाब दिया जा रहा है। ऐसा मीडिया रिपोर्ट बता रही है। चलिए खबरों में आगे बढ़ते हैं और आपसे आपको वो चीजें दिखाते हैं। अब किस तरीके से जो अभी युद्ध है वो लगातार बढ़ता जा रहा है। देखिए ये खबर आ रही है यूनाइटेड किंगडम से। अब जो यूके है उनके प्रधानमंत्री के स्टारमर की तरफ से आपने वो बयान सुना होगा जिसमें वो कहते हैं कि हम इस युद्ध में नहीं फंसने जा रहे हैं। ना ही हमारी कोई इंटरेस्ट है इसमें। लेकिन अब खबर निकल कर आई है यूके प्रिपेयरिंग एचएमएस प्रिंस ऑफ वेल्स फॉर फॉर पॉसिबल डिप्लॉयमेंट अप टू मिडिल ईस्ट स्काई न्यूज़ के हवाले से ये खबर है इनका जो एक एयरक्राफ्ट करियर है उसे अब ये डिप्लॉय करने जा रहा

है मिडिल ईस्ट में एक तरीके से अमेरिका जो चाहता है कई देशों को घसीट के लाना वो हमने देखा कई बार ईरान ने मना किया कि हमने तुर्की पे नहीं मारा था हमने अज़रबजान पे नहीं मारा था लेकिन हालांकि वो बाद में माफी मांगते हैं लेकिन कहीं ना कहीं ये खबरें निकल कर आ रही है कि जो इजराइल है जो अमेरिका है वो चाहता है कि मिलिस के वो देश चले आए घसीट के और इजराइल की पूरी कोशिश है कि पूरा और अमेरिका की भी कोशिश है इस समय कि आप भी आओ आप भी इस जंग में कूदो और देखो आपको मार रहा है तो भाई क्यों मार रहा है इसको भी वो भी समझ रहे हैं और ईरान भी समझा रहा है कि मार इसलिए रहे हैं क्योंकि अमेरिकन बेस वहां पे हैं। अमेरिकन ठिकाने वहां पे अमेरिकन सेंटर्स हैं और बाकी उनके कारोबारी सेंटर्स हैं। उनको मार रहे हैं। उनको हम कहीं ना कहीं टारगेट कर रहे हैं। तो इनकी पूरी कोशिश है कि सारे लोग इस जंग में आए ताकि हमें यह कहने को हो जाए कि हम सही थे। जबकि इस बात के लिए जब सवाल उठेंगे यूनाइटेड नेशंस से पूछा जाएगा कि आपने क्यों हमला किया था? उसका जवाब दीजिए। पहला हमला आपने ईरान पर क्यों किया था? जब बातचीत चल रही थी। इसका कोई जवाब है? उसी की काट है कि सारे लोग आ जाओ ताकि जंग इस

तरह का हो जाए कि देखिए सब लोग हमारे साथ आ गए थे कि ईरान सबको परेशान कर रहा था। सबको मार रहा था। जब ये बातें होंगी, जब ये सवाल किया जाएगा तो निश्चित तौर पर इसका जवाब अमेरिका और इजराइल को देना मुश्किल हो जाएगा कि बीच बातचीत में आपने दो बार दूसरी बार ये विश्वासघात क्यों किया? हम एक खबर यह भी निकल कर आई है। आगे चलेंगे कि यूएई में जो है वो दावा किया जाता है देखिए एक खबर यह भी है कि बहरीन में बहुत बड़े पैमाने पर भी बैलस्टिक मिसाइल और ड्रोन से हमला किया गया है ईरान की तरफ से और ये जो ये खबर वही चीज बता रही है जैसा आपने बताया कि ये इशारा जो है वो सिर्फ अज़रान और तुर्की के लिए था। तो इसमें भी जो मिडिल ईस्ट के आउटलेट्स हैं उनकी तरफ से भी यही समझाया गया है कि पिजुषकियान का जो जो की जो जो बातें थी वो असल में अज़रान और तुर्की के लिए थी ना कि किसी और दूसरे के लिए। चलिए अब आगे बढ़ते हैं। जो यूएई है वहां पर ऐसी खबरें निकल कर सामने आई हैं जो खत्म अल अनबिया है हेड क्वार्टर है तेहरान में वहां से यह कहा गया है कि 200 जो जवान है यूएस के उनको किल किया गया है उनको मार दिया गया है इसके अलावा जो अलदाफरा जो हमने लाइव हिंदुस्तान पर एक रिपोर्ट दिखाई थी यूएई में जो अलदाफरा एयरबेस है वहां पर और यूएस नेवी के फिफ्थ फ्लिट को भी बहुत हद तक लॉस पहुंची है। करीब 21 जो पर्सनल है इसके उनको किल किया है। तो ये चीजें अपने आप में बहुत आगे बढ़ रही है। क्या इस इन चीजों पर विश्वास कर सकते हैं? जिस तरीके से आज जिसने क्लेम किया कि 200 लोगों को हमने आज ही मार दिया। इस पर इस तरह से यकीन इसलिए भी किया जा सकता है क्योंकि आठवां दिन है। आठवें दिन में भी हम देखते हैं अमेरिका और इजराइल ईरान को नहीं झुका पाए हैं। ऐसे में जब ये हमले हुए हैं इसका मतलब जो खत्म अंबिया

जो उनके वहां हेड क्वार्टर से ये बात सामने आई है तो ऐसी स्थिति में ज तो या इसी वजह से तो प्रेसिडेंट ट्रंप को ये कहना पड़ा है कि हम बड़े हमले करने जा रहे हैं। बी वन बमबर लगा रहे हैं। तो बड़े हथियार ला रहे हैं। इसका मतलब आप आठ दिन से अपने सारे हथियार चला कर देख चुके हैं। ईरान और उसकी आवाम पर फर्क ही नहीं पड़ रहा है। आवाम तो हजरत अली की शहादत की तैयारियों में लगी है। और इमाम खामने की शहादत को लेकर गमो गुस्से में है। तो कहीं ना कहीं ये वो जज्बा है जो एक साथ नजर आ रहा है ईरान के अंदर में और ये उनके दुश्मनों के लिए साफ पैगाम है कि ना डरेंगे ना झुकेंगे। क्योंकि जो डर गया वो मर गया वाली जो कहावत है वो ईरान पूरी तरह से बदल कर रख देना चाहता है। तो ये है जज्बा। तो हम देखेंगे हम जानेंगे कि 17 18 19 20 21 रमजान 17 रमजान आज है उन 18 19 20 21 रमजान से एक अलग वलवला एक अलग जोश ईरान के अंदर देखने के लिए मिलेगा और उनके दुश्मनों को भी सीधा पैगाम सीधा संदेश होगा और यही वजह है कि वो बड़े हमले की तैयारी कर रहे हैं। इस पर हमारी नजर बनी हुई है। लौटेंगे आप रहि

ए लाइव हिंदुस्तान के साथ और दीन दुनिया शो में हमने जो आपके सामने बातें रखी इसको आप किस तरह से देखते हैं जरूर बताइएगा। कमेंट बॉक्स पर कमेंट जरूर करते रहिए। वीडियो को ज्यादा से ज्यादा शेयर कीजिए और मेरी और दिव्यांशु की बातचीत और जिस तरह का विश्लेषण आप चाह रहे हैं अगर आपको अच्छा लग रहा है तो वो हमें कमेंट बॉक्स पर बताइए और जो कुछ भी आप सोच रहे हैं हमें कमेंट बॉक्स पर बताइए। बहुत शुक्रिया दिन दुनिया देखने के लिए। अपना ख्याल रखिए। अपनी दुआओं में हमें याद रखिए।

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