ईरान इजराइल अमेरिका युद्ध अपडेट: युद्ध 7 दिन और चला तो… दिखाने वाला खुलासा
सात दिन और चला युद्ध तो पूरी दुनिया महामंदी यानी ग्रेट डिप्रेशन के दौर में प्रवेश कर सकती है। इतिहास गवाह है कि लंबे समय तक चलने वाले युद्ध न केवल जान माल की हानि करते हैं बल्कि दशकों की आर्थिक प्रगति को भी पीछे धकेल देते हैं और अब ईरान इजराइल अमेरिका युद्ध को लेकर भी ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ने वाला है। स्कॉटलैंड की संस्था वुड मैकेंजी ने मध्य पूर्व जंग से उपजे संकट को लेकर नई चेतावनी दी है। इसमें दावा किया गया है कि अगर ईरान इजराइल युद्ध अगले 7 दिन तक और चलता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था 1929 की महामंदी ग्रेट डिप्रेशन के दौर में प्रवेश कर सकती है। इसमें यह भी कहा गया कि स्टेट ऑफ हॉर्मोस में गतिरोध बने रहने से
दुनिया की अर्थव्यवस्था पर इसके परिणाम 1970 के दशक के तेल संकट से भी बड़े होने की संभावना है। क्या है महामंदी? यह 1929 में अमेरिका से शुरू हुई आधुनिक इतिहास की सबसे भयंकर वैश्विक आर्थिक गिरावट थी जो 1929 से 1940 तक चली। अक्टूबर 1929 के वॉल स्ट्रीट शेयर बाजार के पतन से शुरू होकर बैंकों के ठप होने, उत्पादन में भारी कमी और रिकॉर्ड तोड़ बेरोजगारी के साथ पूरी दुनिया में फैल गई। सिर्फ अमेरिका में ही 1933 तक 1.5 करोड़ लोग बेरोजगार हो गए थे। इसके पीछे 1929 का स्कॉट मार्केट क्रैश बैंकों का विफल होना गलत मौद्रिक नीतियां और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में कमी जैसे अनेक मिश्रित कारण थे। यह एक दशक तक चलने वाला यानी कि 1929 से 1939 आर्थिक संकट था। आर्थिक मंदी द्वितीय विश्व युद्ध 1939 के शुरू होने के साथ समाप्त हुई। जिसने उत्पादन को बढ़ावा दिया और रोजगार के
अवसर पैदा किए। इस आधार पर आशंका जताई जा रही है। वुड मैगज़नी के मुख्य अर्थशास्त्री पीटर मार्टिन के अनुसार कच्चे तेल के दाम $19 प्रति बैरल के पास हैं। हॉर्मोस से गुजरने वाले 1.2 से 1.4 करोड़ बैरल कच्चे तेल की आपूर्ति रुकने से कीमतें 125 से 150 प्रति बैरल तक जा सकती है। तेल $200 प्रति बैरल को पार करता है तो यह 1970 के दशक जैसा झटका होगा। मध्य पूर्व में ज्वारी युद्ध शनिवार को आठवें दिन में प्रवेश कर गया। 28 फरवरी को इजराइल और अमेरिका ने संयुक्त रूप से ईरान पर हमला किया था। पिछले एक हफ्ते से जारी लड़ाई में कुल 16 देश प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर प्रभावित हैं। जिसमें लाखों लोगों के जीवन और आजीविका को खतरा पैदा हो गया है। हिंसा मध्य एशिया से लेकर यूरोप के छोर तक फैलती जा रही है। अगर यह जंग बढ़ती है तो हालात और भयावह होंगे। अल्लाहू अकबर अल्लाहू अकबर अल्लाहू अकबर रिपोर्ट में गैस संकट को लेकर भी चिंता जताई गई है।
दुनिया का 20% एलएनजी हॉर्मोन से गुजरता है। इसकी रुकावट 2022 में रूस यूक्रेन युद्ध के दौरान हुई गैस कटौती से कहीं अधिक गंभीर होगी। इससे यूरोप और एशिया में गैस की कीमतें 130% तक बढ़ सकती है। वुड मैकसी का अनुमान है कि तेल की कीमतें $150 प्रति बैरल के स्तर पर रहने से वैश्विक जीडीपी विकास दर 2% से नीचे गिर जाएगी। मुख्य अर्थशास्त्री पीटर मार्टिन ने कहा कि आधिकारिक तौर पर मंदी और फिर डिप्रेशन जैसे हालात को बढ़ावा देंगे। उनके मुताबिक बेरोजगारी और मुद्रास्फीति के कारण 1930 जैसी लंबी मंदी पैदा हो सकती है। व अभी ईरान युद्ध के बड़े अपडेट आपको बता दें। ईरानी रेड क्रिसेट सोसाइटी के अनुसार एक सप्ताह पहले बमबारी शुरू होने के बाद से अमेरिका और इजराइल के हमलों में ईरान में 1230 लोग मरे गए हैं। जबकि 5000 से अधिक लोग घायल हैं। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने हमलों में 217 की
मौत और 798 घायल बताए हैं। जबकि 1 लाख विस्थापित हुए हैं। इजराइल में 12 नागरिकों की मौत हुई है। 1600 अधिक लोग घायल हैं। अमेरिका के छह सैन्य कर्मियों की मौत की पुष्टि हुई है और 20 घायल हैं। कुवैत में चार, यूएई में तीन, बहरीन में दो और ओमान में एक की मौत हुई है। युद्ध के पहले पांच दिनों में वैश्विक शेयर बाजारों में लगभग 3.2 ट्रिलियन डॉलर यानी लगभग 265 लाख करोड़ का नुकसान होने का अनुमान है। इसमें डॉक ज़ों्स और एशियाई बाजारों में 2 मार्च को गिरावट दर्ज की गई है। हॉर्मोस जलडमरू मध्य बंद रहने से वैश्विक मुद्रास्फीति में 1% तक की वृद्धि का अनुमान है। ब्रेड क्रूड ऑयल की कीमतें शनिवार को 92 प्रति बैरल को पार कर गई है। संघर्ष लंबा चलने पर 100 से $130 प्रति बैरल तक जा सकता है। जिससे पूरी दुनिया में माल जुलाई 20% महंगी हो जाएगी। हॉर्मोंस के रास्ते 20% तेल और एनएलजी की सप्लाई रुकने से चीन और भारत, जापान जैसे देशों की ऊर्जा सुरक्षा खतरे में है। पिछले एक हफ्ते से दुनिया भर में 21,300 से
अधिक उड़ाने रद्द की गई हैं। दुनिया भर के हवाई अड्डों पर 6 लाख से अधिक यात्री फंसे हुए हैं। Air इंडिया, इंडिगो एमिरेट्स और कतर एयरवेज ने अपनी सेवाओं को निलंबित कर दिया है या रूट बदल दिए हैं। से प्रति उड़ान लागत $00 तक बढ़ गई है। भारत से यूरोप जाने वाली उड़ानों को अब लंबा चक्कर काट कर जाना पड़ रहा है जिसमें कीमतें बढ़ गई हैं। तो इस तरीके से कयास लगाए जा रहे हैं कि अगर यह युद्ध लंबा चलता है तो महंगाई अपने चरम पर पहुंचती है और अगर महंगाई चरम पर पहुंचेगी तो इससे पूरी दुनिया हिल सकती है। 16 देश इसमें ज्यादा
प्रभावित होंगे। भारत पर भी इसका साफ असर देखा जाएगा और इसकी शुरुआत थोड़ी बहुत हुई है। जैसे कि गैस के दाम बढ़ गए हैं। तेल की कीमतों में भी अब रूस से हमें तेल लेना पड़ रहा है और अमेरिका की अनुमति के बाद ऐसा हो पाएगा और यह मात्र 30 दिन के लिए है। 30 दिन के बाद क्या कुछ स्थिति होगी इस युद्ध पर निर्भर करता है। फिलहाल इस खबर पर आपकी जो भी राय हमें कमेंट करके जरूर बताएं। बने रहिए लाइव हिंदुस्तान के साथ। [संगीत] [संगीत]


