ईरान के साथ आए 43% अमेरिकी.. पेंटागन ने ट्रंप को माना गलत ! होगा तख्तापलट ?
नमस्ते, मेरा नाम निकिता मिश्रा है और आप देख रहे हैं बोलता हिंदुस्तान। इजराइल अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत हो गई। अब ईरान ने भी पलटवार करते हुए खाड़ी के कई देशों में स्थित अमेरिकी बेस पर हमला किया है। वर्तमान में मिडिल ईस्ट में बेहद तनाव का माहौल है। पश्चिमी एशिया में जारी तनाव पर एक सर्वे रिपोर्ट चर्चा का केंद्र बना हुआ है। आज हम बात कर रहे हैं एक ऐसे घटनाक्रम की जिसने पूरी दुनिया की राजनीति को हिला कर र
ख दिया है। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान की शुरुआत के कुछ ही घंटों बाद एक चौंकाने वाला सर्वे सामने आया है। इस सर्वे के नतीजे बताते हैं कि अमेरिकी जनता इस युद्ध को लेकर उत्साहित नहीं है। अमेरिकी जनता नहीं चाहती थी कि यह युद्ध हो बल्कि बड़ी संख्या में लोग इसका विरोध कर रहे हैं। यह सर्वे मशहूर समाचार एजेंसी राइटर्स और रिसर्च फर्म इ्सो द्वारा किया गया है। सर्वे शनिवार से शुरू होकर रविवार को समाप्त हुआ। यानी ठीक उसी समय के आसपास जब राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रशासन ने पुष्टि की कि इस संघर्ष में पहले अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है। अब आंकड़ों पर ध्यान दीजिए। केवल 25% अमेरिकी इन हमलों का समर्थन करते हैं। वहीं 43% लोग युद्ध के खिलाफ हैं। जबकि 29% लोग अभी भी अनिश्चित हैं
। यानी साफ तौर पर देखा जाए तो समर्थन बेहद कम है। अब बात करते हैं राजनीतिक ध्रुवीकरण की। रिपब्लिकन मतदाताओं में 55% ने हमलों का समर्थन किया है। 13% ने विरोध किया है। वहीं 32% ने अनिश्चित रहे हैं। लेकिन असली तस्वीर डेमोक्रेटिक मतदाताओं में दिखती है। 74% ने हमलों का विरोध किया। केवल 7% ने समर्थन में रहे हैं। वहीं 19% अनिश्चित रहे हैं। इसका मतलब है कि देश के अंदर इस मुद्दे पर गहरी राजनीतिक दरार है। यानी यह कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी हमलों का विरोध करने वालों की संख्या समर्थन करने वालों से कहीं अधिक है। वहीं इसी के साथ एक और खुलासा सामने आया है। एक और खुलासा हुआ है। जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के अधिकारियों ने कांग्रेस के लोगों को बंद कमरे में बताया कि उनके पास ऐसी कोई पक्की खुफिया जानकारी नहीं थी जिससे यह साबित हो कि ईरान पहले अमेरिका पर हमला करने वाला था। यानी साफ शब्दों में ईरान के हमले का कोई ठोस सबूत नहीं था। लेकिन इससे पहले मीडिया के सामने कहा गया कि ईरान शायद पहले हमला कर सकता था। इसी बात को आधार बनाकर अमेरिका और इजराइल ने बड़ा सैन्य ऑपरेशन शुरू किया। लेकिन अब यह खुलासा हुआ है कि ईरान पहले हमला नहीं करता। रिपोर्ट के अनुसार पेंटागॉन में करीब 90 मिनट की बीफिंग हुई। वहां अधिकारियों ने माना कि हां ईरान
की मिसाइलें और उसके समर्थित गुट खतरा हो सकते थे। लेकिन यह पक्की जानकारी नहीं थी कि ईरान तुरंत हमला करने वाला था। यानी संभावित खतरा था पर तुरंत हमला का सबूत नहीं था। रिपोर्ट के अनुसार पेंटागॉन में करीब 90 मिनट की ब्रीफिंग हुई। वहां अधिकारियों ने माना कि ईरान की मिसाइलें और उसके समर्थित गुट खतरा हो सकते थे। लेकिन यह तुरंत करते इस बात की कोई जानकारी नहीं थी। वहीं आपको बता दें कि डेमोक्रेट नेताओं का आरोप है कि यह युद्ध ट्रंप ने अपनी मर्जी से शुरू किया। शांति वार्ता की कोशिशें अभी बाकी थी और बिना ठोस सबूत के इतना बड़ा कदम उठा लिया गया। उनका कहना है कि अगर हमला होने वाला ही नहीं था तो इतनी जल्दी युद्ध क्यों? अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे हालात में दो बड़ी बातें सामने आई हैं। और दोनों मिलाकर मामला काफी गंभीर हो जाता है। पहली बात अमेरिका और इजराइल ने मिलाकर ईरान पर बहुत बड़ा सैन्य हमला किया। बताया जा रहा है कि 1000 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया गया। कई युद्धपोत डुबो दिए गए और ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत हो गई। वहीं राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि यह मिशन तब तक चलेगा जब तक सारे टारगेट पूरे नहीं हो जाते हैं। उन्होंने यह भी माना कि आगे और अमेरिकी सैनिकों की मौत हो सकती है। खबर एजेंसी रॉयर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप
प्रशासन के अधिकारियों ने कांग्रेस के लोगों को बंद कमरे में बताया कि उनके पास ऐसी कोई पक्की खुफिया जानकारी नहीं थी। जिससे साबित हो कि ईरान पहले अमेरिका पर हमला करने वाला था। यानी सार्वजनिक तौर पर कहा गया कि ईरान शायद हमला कर सकता था। लेकिन अंदर की ब्रीफिंग में माना गया कि ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं था। हां, अधिकारियों ने यह जरूर कहा कि ईरान की मिसाइलें और उसके समर्थित गुट खतरा हो सकते थे। पर तुरंत हमला होने वाला था। इसकी इसकी कोई जानकारी नहीं थी। इसका कोई पक्का इनपुट नहीं था। और अगर अमेरिका के लोगों की बात करें तो सर्वे की बात करें तो 25% अमेरिकी इन हमलों के समर्थन में है। वहीं 43% लोग इसके खिलाफ हैं
और 29% लोग अभी तक कंफ्यूजन में है या उन्हें नहीं पता। नहीं पता कि वो क्या करें और किसका साथ दें? फिलहाल इस खबर में इतना ही है। आपको क्या लगता है इस पूरे खबर पर आप क्या सोचते हैं? अपनी राय हमें कमेंट्स के जरिए जरूर बताएं। तब तक के लिए देखते रहें बोलता हिंदुस्तान। शुक्रिया।


