ईरान ने बताई मिडिल ईस्ट देशों पर हमले रोकने की पहली शर्त!

पश्चिम एशिया का महायुद्ध अब उस मोड़ पर पहुंच गया है जहां से वापसी का रास्ता सिर्फ तबाही की ओर जाता है। ईरान ने अब अपने पड़ोसी खाड़ी देशों को एक ऐसी अंतिम चेतावनी दे दी है जिसने पूरी दुनिया की धड़कनें बढ़ा दी हैं। तेहरान का फरमान साफ है। अगर मिसाइलों के कहर से बचना है तो अपने मुल्क से अमरीकियों और उसके सैन्य ठिकानों को बाहर निकाल फेंको। तैरान टाइम्स के हवाले से एक ईरानी सांसद ने सऊदी अरब, यूएई, कुवैत, कतर और तुर्की जैसे देशों के नेताओं को सीधी धमकी दी है। उन्होंने कहा है कि अगर यह देश ईरानी ड्रोन और मिसाइलों के निशाने पर नहीं आना चाहते तो उन्हें अपने क्षेत्र से अमेकी नागरिकों

और सेना को तुरंत हटाना होगा। यह चेतावनी उस समय आई है जब अमेरिका और इजराइल के हमले ईरान को भीतर तक जख्मी कर रहे हैं। युद्ध की लपटें अब समंदर की गहराई तक पहुंच चुकी हैं। बुधवार को हिंद महासागर में अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी युद्धपोत डेना को डुबो दिया। इस हमले में 80 से ज्यादा ईरानी नौसैनिकों की मौत हो गई है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराची ने इसे समुद्र में किया गया अत्याचार बताया। उन्होंने गुस्से में कहा कि डेना भारतीय नौसेना का मेहमान बनकर अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में गया था। जहां बिना चेतावनी उस पर हमला किया गया। ईरान ने कसम खाई है कि अमेरिका को इस पाप का पछतावा होगा। बदला लेने की शुरुआत भी हो चुकी है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया है कि उन्होंने खाड़ी में एक अमेरिकी

तेल टैंकर को निशाना बनाया है जिसमें भीषण आग लग गई। हालांकि अमेरिका अभी इस पर चुप है। लेकिन हकीकत यह है कि ईरान के शदीप ड्रोंस ने पूरे क्षेत्र में अफरातफरी मचा रखी है। डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर यह युद्ध लंबा खिंचा तो अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए ईरानी मिसाइलों की बारिश को झेल पाना नामुमकिन हो जाएगा। इस खूनी संघर्ष में इंसानी जानों की कीमत बेहद भारी है। सुप्रीम लीडर खामने की मौत के बाद भी ईरान ने घुटने टेकने से इंकार कर दिया है। फाउंडेशन ऑफ मार्टिस के मुताबिक अब तक इस युद्ध में कम से कम 1230 लोग अपनी जान गवा चुके हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी दी है कि यह युद्ध लंबा चल सकता है। लेकिन सवाल यह है कि

क्या खाड़ी देश अमेरिका की दोस्ती के लिए ईरान के मिसाइलों का सामना करने के लिए तैयार है या फिर ईरान की इस धमकी के बाद पश्चिम एशिया के नक्शे पर दोस्ती और दुश्मनी की नई लकीरें खींचेगी। बारूद की यह गन अब पूरी दुनिया को अपनी चपेट में लेने को तैयार है। मिडिल ईस्ट में जंग का आज सातवां दिन है और सातवें दिन भी यह संघर्ष अपने सबसे खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। आसमान में मिसाइलों की गर्जना है। ड्रोन की बनबनाहट है और पूरे इलाके में डर का माहौल बना हुआ है। इजराइली और अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने जिस तेजी के साथ पलटवार किया उसने पूरे क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंक दिया है। बताया जा रहा है कि ईरान की मिसाइल और ड्रोन ने इजराइल के कई इलाकों में भारी तबाही मचाई है। तेल, अीब समेत कई शहरों से विस्फोटों, धुएं और क्षतिग्रस्त इमारतों की तस्वीरें सामने आने लगी हैं। दावा किया जा रहा है कि ईरान ने दर्जनों सबम्यनिश से लैस खुर्रम शहर फ्लस्टर मिसाइल का इस्तेमाल किया जिसने हमलों को और भी ज्यादा भयानक बना दिया है। इन हमलों को लेकर कहा जा रहा है कि यह इजराइल के सबसे बड़े झटकों में से एक हो सकता है। लेकिन इसी

बीच बहरीन से खबर सामने आई जिसने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक गुरुवार को ईरान ने बहरीन की सरकारी तेल रिफाइनरी पैपको को मिसाइल से निशाना बनाया। हैरानी की बात तो यह है कि जब ये हमला और निशाना बनाया गया तो लोग खुशी से झूम उठे। जश्न मनाने लगे। यह रिफाइनरी देश के पूर्वी तट पर स्थित सितरा द्वीप पर स्थित है जो राजधानी मनामा के दक्षिण में पड़ता है। हमले के बाद रिफाइनरी की एक यूनिट में आग लग गई जिससे कुछ देर के लिए पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। हालांकि बाद में आग पर काबू पा लिया गया। इस बात का भी दावा किया जा रहा है। बहरीन के राष्ट्रीय संचार केंद्र के मुताबिक फिलहाल रिफाइनरी का संचालन सामान्य रूप से जारी है। लेकिन नुकसान का आकलन किया जा रहा है। यह रिफाइंडिंग कॉम्प्लेक्स रोजाना करीब 260000 बैरल तेल प्रोसेस करता है और इसका अधिकांश कच्चा तेल पड़ोसी सऊदी अरब से आता है। यही वजह है कि इसे पूरे गल्फ क्षेत्र की रिफाइनिंग और एक्सपोर्ट चेन का अहम हिस्सा माना जाता है। वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा ढांचे पर इस तरह के हमले वैश्विक तेल बाजार को सीधे प्रभावित कर सकते हैं। बैको पर हमले से गल्फ क्षेत्र में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर जोखिम बढ़ गया है।

अगर तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो ब्रांड क्रूड की कीमतों में उछाल आ सकता है। शिपिंग इंश्योरेंस प्रीमियम बढ़ सकते हैं और इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। भारत जैसे तेल आयात पर निर्भर देशों के लिए यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली मानी जा रही है। इसी बीच खबर है कि बहरीन में दो होटलों को भी निशाना बनाया गया। जबकि राजधानी मनामा में ड्रोन धमाकों से नुकसान की खबरें सामने आई हैं। व कुवैत में स्थित अली अल सलीम एयरबेस के पास भी विस्फोट और आग लगने की सूचना मिल रही है। हालांकि इसकी तस्वीरें भी सामने आई है जिससे साफ हो चुका है कि कुवैत में भी ईरान ने भयंकर तबाही मचाई है। तनाव यहीं नहीं रुका। दुबई से भी बड़े धमाकों की खबरें सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि इन हमलों के बाद शहर के कुछ इलाकों में भारी नुकसान हुआ है और हालात को काबू करने की कोशिशें की जा रही है। लेकिन अब आपको बता दें ईरान दुबई पर भी ताबड़तोड़ हमले कर रहा है। कुल मिलाकर मिडिल ईस्ट में युद्ध का सातवां दिन पूरे

क्षेत्र के लिए बेहद खतरनाक संकेत लेकर आया है। मिसाइलों और ड्रोन के इस टकराव को ना सिर्फ क्षेत्रीय सुरक्षा को हिला कर रख देने वाला बताया जा रहा है बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था ऊर्जा बाजार अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी गहरे असर की आशंका पैदा इसने कर दी। दुनिया की नजरें अब इस युद्ध पर टिकी है क्योंकि अगर यह संघर्ष और बढ़ा तो इसके परिणाम बेहद दुर्गामी हो सकते हैं। लेकिन आपको बता दें ईरान ने साफ कर दिया है कि उनका जो दुश्मन है और जिन्होंने दुश्मनों का साथ दिया है उसे वो बिल्कुल भी छोड़ने के मूड में तो नहीं दिख रहा और यही

अब हो रहा है। ओ मिडिल ईस्ट में शुरू हुई जंग का अंत अब कब होगा यह किसी को नहीं पता। इसकी मुख्य वजह है ईरानी सुप्रीम लीडर अली खामिनाई का माना जाना। दरअसल इजराइल की ओर से किए गए अटैक में अली खामिनाई की मौत हो गई। जिसके बाद अब ईरान भड़का हुआ है। बल्कि ईरान ने खामनाई की मौत का बदला लेने का ऐलान भी कर दिया।

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