ईरान ने अमेरिका का सबसे बड़ा रडार बेस उड़ाया? 4 सुपरपावर देशों ने साथ छोड़ दिया!

नमस्ते, मेरा नाम निकिता मिश्रा है और आप देख रहे हैं बोलता हिंदुस्तान। ईरान इजराइल वॉर में इस समय सबसे बड़ी खबर सामने निकल कर के आ रही है। अमेरिका और इजराइल के लिए यह खबर बहुत बुरी साबित हो सकती है। एक तरफ जहां ईरान अब पीछे हटते हुए नहीं दिखाई दे रहा है। वहीं अब दूसरी तरफ सुप्रीम लीडर की मौत के बाद मौत का बदला ईरान अब अमेरिका और इजराइल पर आग की तरह बरस कर ले रहा है। वहीं अब जो खबर निकल कर सामने आ रही है उसमें इजराइल और अमेरिका को बहुत ज्यादा नुकसान हो सकता है। कनाडा, यूके, जर्मनी,

स्पेन और फ्रांस ने अमेरिका को अकेले छोड़ दिया है। यह सारे देशों ने अमेरिका का साथ देने से मना कर दिया है। यह तमाम मुल्क वो मुल्क हैं जो यूएस के साथ इंपॉर्टेंट एलाइन में से एक हैं। इन्होंने यूएस को यानी कि अमेरिका को अकेले छोड़ दिया है। अब हालात ये हो गई है कि अमेरिका को खुद उसके इंपॉर्टेंट अलायंस आंख दिखा रहे हैं कि आपने किससे पूछकर इतना बड़ा ईरान पर हमला बोल दिया है और अब बोल दिया है तो आप खुद ही भुगतिए। हम तो इसमें अपने हाथ जलाने वाले नहीं हैं। यानी हम आपका साथ देने के लिए इस युद्ध में तैयार नहीं है। वहीं दूसरी ओर इजराइल में भी भयंकर तबाही मची हुई है। विदेशी मीडिया बता रहे हैं कि कितनी इमारतें धराशाही हो गई है। आप सबको बता दूं कि

इजराइल और ईरान का यह युद्ध चौथे दिन भी पहुंच चुका है। किसी को कुछ नहीं पता। लेकिन अमेरिका के जो इंपॉर्टेंट साथी हैं जैसे कनाडा, यूके, जर्मनी, स्पेन, फ्रांस सब ने इस पूरे टकराव से अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं। उन्होंने साफ कह दिया है कि हम इस युद्ध में किसी के साथ नहीं हैं। अमेरिका से बकायदा पूछना शुरू कर दिया है कि किससे पूछकर आपने इस तरह से ईरान पर हमला कर दिया है। ईरान पर हमले को लेकर जर्मनी के फॉरेन मिनिस्टर ने साफ तौर पर कहा है कि हमारे उस रीजन में जहां पर यह पूरा संघर्ष चल रहा है। वहां पर ना तो कोई बेस है और ना ही हमारा कोई बहुत नेसेसरी मिलिट्री सोर्सेस है। जर्मनी की गवर्नमेंट का कोई इंटेंशन नहीं है कि इस पूरे हालात में हम पार्टिसिपेट

करें। यानी जर्मनी ने साफ कर दिया है कि इस युद्ध के खिलाफ है वो। वहीं दूसरी ओर स्पेन के प्रधानमंत्री ने भी साफ कह दिया है कि हम गलत के साथ नहीं हैं। उन्होंने साफ कहा कि हम इसका विरोध करते हैं। स्पेन के प्रधानमंत्री का कहना है साफ कहना है कि युद्ध तुरंत रोका जाए। अब बात करते हैं कनाडा की। कनाडा के फॉरेन मिनिस्टर का साफ कहना है। उन्होंने साफ कह दिया है कि कनाडा ना तो इनवॉल्व है ना ही हमको बताया गया कि यूएस ऐसा कुछ करने वाला है। उन्होंने आगे कहा कि एंड वी डू नॉट हैव एनी इंटेंशन कि हम इस युद्ध में उतरने का हमारे पीछे कोई इंटेंशन नहीं। हमारा कोई मकसद नहीं है। किसी भी तरह से मिलिट्री ऑपरेशन या मिलिट्री स्ट्राइक में इनवॉल्व होने का हमारा कोई इरादा नहीं है। यह साफ कह दिया गया है कनाडा की तरफ से। यानी अब कनाडा ने भी अपने हाथ खड़े कर दिए हैं और हाथ पीछे खींच लिए हैं अमेरिका से। अब हम आते हैं यूके पर। यूके के प्रधानमंत्री ने भी क्लियर कह दिया है।

उन्होंने अपने संसद में यह बात क्लियर कर दी है कि वी आर नॉट जॉइनिंग द यूएस एंड इजराइल अटैक। हम यूएस और इजराइल अटैक को जॉइ नहीं करने वाले हैं। हमको कोई दिलचस्पी नहीं है। हालांकि ब्रिटेन ने यह भी साफ कर दिया है कि वो वहां से जल्द से जल्द अपने लोगों को निकालेंगे मिडिल ईस्ट से। ऐसा साफ कहना है ब्रिटेन की तरफ से। वहीं फ्रांस के विदेश मंत्री ने साफ कहा है कि ईरान पर इजराइल और अमेरिका के एकतरफ़ा हमले पर संयुक्त राष्ट्र में बहस होनी चाहिए थी। मतलब फ्रांस के विदेश मंत्री कह रहे हैं कि जो एक तरफ़ा हमला किया गया है इस पर बहस होनी चाहिए थी संयुक्त राष्ट्र में। आपने बहस करवाए बिना हमला कैसे कर दिया? जो कि बिल्कुल सही भी सवाल उठाया जा रहा है फ्रांस की तरफ से। वहीं अब पेंटागॉन ने कांग्रेस को बता बताया है कि यूएस के पास कोई भी ऐसी रिपोर्ट नहीं थी कि ईरान अमेरिका पर पहले हमला करने वाला है। जिस तरह से बताया जा रहा था कि ईरान से

खतरा है। ईरान पहले हमला कर सकता है। इसके पहच में जैसे युद्ध शुरू किया गया अमेरिका की तरफ से। अब पेंटागॉन से ये खबर आ रही है। यह बताया जा रहा है कि ईरान की तरफ से ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं थी कि ईरान पहले हमला कर सकता है। आप सबको मालूम होगा कि कल मैंने इस पर रिपोर्ट भी की थी और मैंने बताया था कि किस तरह से 90 मिनट की ब्रीफिंग में यह बात सामने कही गई थी और बताया गया था ब्रीफिंग में कि कांग्रेस में जो पेंटागॉन के जो रक्षा मंत्रालय के लोग थे उन्होंने साफ तौर पे कहा था कि ऐसी कोई भी सूचना नहीं थी या ऐसी कोई भी रिपोर्ट नहीं थी कि ईरान पहले हमला कर सके। किसी भी तरह का खतरा नहीं था। फिर भी अमेरिका ने हमला किया और यह भी कहा गया कि अमेरिका को किसी भी तरह का खतरा नहीं था। लेकिन फिर भी अमेरिका ने पहले हमला किया और अब जब जवाबी हमले हो रहे हैं तो अमेरिका इस हमले से परेशान है। कल अमेरिका के जो राष्ट्रपति हैं उनका साफ बयान था कि अभी और भी मौतें हो सकती हैं। यानी अभी और भी नुकसान हो सकता है। इस तरह के बयान दिए गए थे और अब तमाम जो

देश हैं वो अब अमेरिका का साथ नहीं दे रहे हैं। उनसे हाथ पीछे कर लिए हैं। वही फ्रांस के विदेश मंत्री कह रहे हैं कि अगर यह युद्ध होना था, अगर यह युद्ध की तैयारी थी, तो पहले इस पे चर्चा करनी चाहिए थी जो कि नहीं किया गया। चर्चा नहीं हुई इस बात पे। तो वहीं अब ये खबर भी सामने आ चुका है कि कितने देश जो हैं वो अमेरिका के साथ नहीं है। फिलहाल इस खबर पर आपको क्या लगता है? आप क्या सोचते हैं? अपनी राय हमें कमेंट्स के जरिए ज़रूर बताएं। तब तक के लिए देखते रहें। बोलता है हिंदुस्तान, शुक्रिया।

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