जेल गए राजपाल यादव लेकिन क्या 9 करोड़ से बच गए? कहानी में है बड़ा ट्विस्ट। 6 महीने की सजा पूरी फिर भी पीछा नहीं छोड़ेंगे 9 करोड़। वैभव ने खोला कानून का राज। क्या जेल काटते ही खत्म हो जाता है कर्ज। राजपाल यादव केस ने सबको चौंकाया। करोड़ों कमाने वाला स्टार तिहाड़ की सलाखें और अधूरा कर्ज। सच जानकर हैरान रह जाएंगे। राजपाल यादव अकेले नहीं फंसे। वैभव ने बताया चेक बाउंस का वो नियम जो कोई नहीं जानता। [संगीत] सोचिए एक ऐसा स्टार जो कभी करोड़ों कमाता था। आज तिहाड़ जेल की सलाखों के पीछे खड़ा है। आंखों में आंसू, आवाज में बेबसी और सवाल सिर्फ एक। क्या जेल जाने के बाद 9 करोड़ का कर्ज खत्म हो जाएगा? यही सवाल उठा। दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर राजपाल यादव ने आत्मसमर्पण किया।
लोग सोचने लगे कि शायद अब कहानी यहीं खत्म हो जाएगी। लेकिन असली ट्विस्ट तो यहीं से शुरू होता है। वैभव बताते हैं कि चेक बाउंस का कानून सिर्फ सजा नहीं बल्कि जिम्मेदारी भी तय करता है। साल 2010 में फिल्म अता पता, लापता के लिए लिया गया 5 करोड़ का कर्ज, ब्याज और जुर्माने के साथ 9 करोड़ बन चुका है। चेक बाउंस हुए, नोटिस गए, मोहलत मिली लेकिन रकम नहीं चुकाई गई। कानून साफ कहता है कि जेल की सजा अपराध की होती है। कर्ज की नहीं। यानी राजपाल यादव भले ही 6 महीने जेल में रहे लेकिन बाहर आने के बाद भी यह 9 करोड़ उनका पीछा नहीं छोड़ेंगे।
अगर पैसे नहीं दिए गए तो संपत्ति कुर्क हो सकती है। भविष्य की कमाई से वसूली हो सकती है। वैभव के मुताबिक यही वह सच्चाई है जिसे अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं। तो सवाल अब भी कायम है। क्या राजपाल यादव कभी इस 9 करोड़ के जाल से बाहर निकल पाएंगे? या यह कर्ज उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी सजा बन जाएगी।