सोशल मीडिया पर इन दिनों कनिका शर्मा और साकिब सैफी को लेकर काफी चर्चा हो रही है। मामला तब शुरू हुआ जब रमजान में रोजे पर कनिका शर्मा ने साकिब के साथ अपना एक्सपीरियंस शेयर किया। वीडियो में साकिब रोजा रखते दिखे। कनिका ने भी उनका साथ दिया। इफ्तार किया और इस्लामी शब्द जैसे कलमा अल्हम्दुलिल्लाह बिस्मिल्लाह सीखती हुई भी नजर आई। कुछ लोग इसे प्यार और सम्मान कह रहे हैं तो कुछ इसे धार्मिक भावना से खेलने का आरोप बता रहे हैं। तो असली सवाल क्या है? क्या यह एक पर्सनल चॉइस है या सोशल मीडिया कंटेंट की एक स्ट्रेटजी? वीडियो में कनिका से
साकिब ने कुछ इस्लामी शब्द बोलने को कहा। कुरान की आयत पढ़वाने की कोशिश भी की। कनिका ने अपनी मां से वीडियो कॉल पर बात की। अपना लुक दिखाया और बताया कि उन्होंने रोजा रखा है। जिस पर उनकी मां नाराज दिखी। हालांकि यह पहली बार नहीं दोनों पहले भी इस तरह के धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर वीडियो बना चुके हैं। दोनों कपल है या शादीशुदा इसकी ऑफिशियल जानकारी नहीं है। लेकिन इनकी केमिस्ट्री से साफ है कि दोनों एक दूसरे के बेहद करीब हैं और इनके बीच कुछ ना कुछ तो रिश्ता है ही। सोशल मीडिया पर रिएक्शन दो हिस्सों में बंट गए हैं। कनिका शर्मा के धर्म से जुड़े लोगों का कहना है कि कनिका अपनी पहचान बदल रही हैं। धर्म के साथ
एक्सपेरिमेंट किया जा रहा है। यह व्यूअर्स को प्रोवोक करने का तरीका है। वहीं साकिब के धर्म के कुछ लोग कह रहे हैं कि अगर कोई इस्लाम सीख रहा है तो इसमें क्या बुराई है? रोजा रखना और सीखना अपना व्यक्तिगत फैसला है। लेकिन दोनों तरफ से एक्सट्रीम रिएक्शंस भी आ रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “उधर केरला स्टोरी के नाम पर नफरत परोसी जा रही थी। इधर कनिका शर्मा ने साकिब के प्यार में पहली बार रोजा रख लिया। विकर्जन ने लिखा कनिका शर्मा अल्हम्दुलिल्लाह मैंने यह हिजाब बांधा है मुस्लिम लग रही हूं। कनिका शर्मा कहती नजर आई साकिब क्या बनाऊं बताओ बाबू? साकिब कहते हैं सहरी बनाओ कनिका शर्मा। मृदुल तिवारी और प्रगति तिवारी को यह वाला रियल लव जिहाद दिखाई नहीं दिया जो काल्पनिक बनाने चले थे। मैग्जी ने लिखा कनिका शर्मा ने समाज को शर्मसार कर दिया है। मैगजीन ने
लिखा ब्राह्मण लड़की कनिका शर्मा ने मुस्लिम लड़के साकिब के साथ पहले रोजे पर अपने अनुभव शेयर किया। साकिब ने रोजा रखा और कनिका शर्मा ने साकिब का पूरा साथ दिया और इफ्तार भी किया। कनिका शर्मा अब धीरे-धीरे इस्लाम धर्म की तालीम सीख रही हैं। कलमा सीख रही हैं, वक्त बिता रही हैं। क्या कनिका शर्मा जल्दी इस्लाम कबूल कर सकती [संगीत] हैं? मैगजन ने लिखा, सूटकेस भी लेकर रख लिया है साकिब ने। अगर बात नहीं मानी तो इसको पैक करके भेज देगा। वगज़ ने लिखा, दो लोगों की जिंदगी है। फैसला भी उन्हीं का ही होगा। दुनिया को जज करने की जरूरत नहीं।” दरअसल, असल मुद्दा धर्म बदलना या ना बदलना नहीं है। असल सवाल यह है कि क्या धर्म को कंटेंट का हिस्सा बनाकर सेंसेशनल [संगीत] बनाना सही है? आज
कल व्यूज एंगेजमेंट और वायरल होने के लिए रिलीजन सबसे सेंसिटिव और पावरफुल टॉपिक बन चुका है। जब पब्लिक [संगीत] फिगर्स धर्म से जुड़ा कंटेंट बनाते हैं तो उन्हें यह समझना चाहिए कि लाखों लोग देख रहे हैं। भावनाएं जुड़ी होती हैं और गलत प्रेजेंटेशन से नफरत बढ़ सकती है। अलग धर्म के लोग साथ काम करें, दोस्ती करें या रिश्ते रखें। यह पूरी तरह उनकी पर्सनल चॉइस है और उनका अधिकार है। भारत एक बहुधर्मी देश है जहां इंटरफेथ फ्रेंडशिप या रिलेशनशिप कोई नई बात नहीं है। लेकिन पब्लिक प्लेटफार्म पर धर्म को बार-बार हाईलाइट करना और उसे ड्रामेटिक बनाना
यहां कंट्रोवर्सी पैदा कर सकता है। फैंस को कभी-कभी लगता है कि उन्हें प्रवोक किया जा रहा है या व्यूज के लिए नैरेटिव बनाया जा रहा है। साफ बात यह है अगर कनिका इस्लाम सीखना चाहती हैं, यह उनका व्यक्तिगत फैसला है। अगर साकिब उनका साथ दे रहे हैं, यह भी उनका निजी मामला है। लेकिन धर्म को कंटेंट स्ट्रेटजी बनाना खतरनाक हो सकता है। क्यों? क्योंकि इससे समाज में अननेसेसरी पोलराइजेशन बढ़ता है। फैंस डिवाइडेड हो जाते हैं और छोटी सी बात कम्युनल डिबेट बन जाती है। हमें दो बातें अलग रखनी होंगी। पर्सनल फेथ और पर्सनल रिलेशनशिप। पब्लिक कंटेंट [संगीत] और सोशल इंपैक्ट। हर इंसान को अपनी आस्था चुनने का हक है। लेकिन पब्लिक इन्फ्लुएंस होने के साथ जिम्मेदारी भी आती है। अगर कंटेंट से लोगों को चिढ़ाया जाए या प्रवोक किया जाए तो वह कंस्ट्रक्टिव नहीं डिस्ट्रक्टिव बन
जाता है। धर्म दिल का मामला है। व्यूज का नहीं। अगर कोई सीख रहा है सम्मान दीजिए। अगर कोई अलग सोचता है सम्मान दीजिए। लेकिन नफरत को फ्यूल मत दीजिए। आपका क्या मानना है पर्सनल चॉइस या कंटेंट स्ट्रेटजी? कमेंट में बताएं। वीडियो को लाइक करें, शेयर करें और चैनल को सब्सक्राइब करना बिल्कुल ना भूलें।