खामेनेई की मौत, पलटवार की कैसे तैयारी कर रहा ईरान? ट्रंप ने अब क्या धमकी दी है?
ईरान के सुप्रीम लीडर ऐतुल्लाह अली खामनई तो मारे जा चुके हैं, लेकिन, उनकी इस्लामी सत्ता जो थी, उसकी ताकत का जो ढांचा है, वह जस का तस है। उनकी आईआरजीसी जो है इस्लामी इस्लामिक रिवोलशनरी गार्ड स्कोर, वह जस की तस है। आईआरजीसी ने यह दावा किया है यह उसका जो है, उसकी धमकी है ट्रंप को कि हम ईरान के इतिहास का सबसे विनाशकारी सैन्य ऑपरेशन जो है, कुछ ही पलों में शुरू करने जा रहे हैं। इस धमकी के बदले में ट्रंप ने जो चेतावनी दी है उनका कहना है कि अगर आपने ऐसा किया अगर आपने ऐसी हिमाकत की तो हम ऐसा जवाब देंगे जो कभी किसी ने देखा नहीं होगा। तो आगे क्या होने वाला
है? सवाल उठ रहे हैं कि कामनेई के जाने के बाद अब ईरान के पास ऑप्शंस क्या है? क्या वाकई ईरान के पास इतनी ताकत बची है कि वो अमेरिका को और उसके जो साथी हैं उस पूरे मिडिल ईस्ट में पूरे गल्फ कंट्रीज जो हैं उनको जवाब दे सके। क्या करेगा ईरान? हमारे साथ प्रोफेसर मोहसिन रजा खान मौजूद हैं। इंटरनेशनल रेडेंस के प्रोफेसर हैं सर। ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी में हम उनसे आज ये समझने की कोशिश करेंगे कि ईरान के पास क्या ऑप्शंस है। सर शुक्रिया। तो सर ईरान के पास अभी सबसे पहले ये जानते हैं कि ताकत कितनी बची है जवाब देने के लिए। तो पहले तो क्या ऑपरेशन कर चुका है अमेरिका। इस पे थोड़ा सा गौर करें। कह रहे हैं 900 से 1000 स्ट्राइक्स हुए हैं कल। हम्म। तो 1000 स्ट्राइक कोई मजाक नहीं होता। इसको अब्सॉर्ब कर पाना यानी कि उनकी कुछ मिसाइल कैपेबिलिटी ड्रोन कैपेबिलिटी पे भी और लीडरशिप पे भी असर हुआ है। अब इस पे दो तरह के असर हैं। एक तो ह्यूमन इंपैक्ट है और एक मटेरियल। कुछ मटेरियल इंपैक्ट तो हुआ है क्योंकि ईरान उस स्पीड पे नहीं मिसाइल्स ल्च कर रहा जैसे पहले ल्च कर रहा था जून 2025 में। एक ये भी वजह है कि इस बार टारगेट्स बहुत
ज्यादा है। यानी कि आठ गल्फ के मुालिक हैं। गल्फ के कंट्रीज हैं। आठ जीसी के और फिर ईरान और इजराइल और अमेरिकन बेस और शिप्स अमेरिकन। तो बहुत सारे टारगेट है तो वो थिन स्प्रेड आउट हो गए हैं। उसके जो मिसाइल्स हैं और ड्रोंस हैं। हालांकि आप समझे कि ईरान दुनिया के बड़े ड्रोन प्रोड्यूसर्स में से रशिया तक की मदद कर रहा है। तो उसके पांच ड्रोन जो उसने रशिया को दिए हैं। शायद ड्रोन वो बहुत सोफिस्टिकेटेड तो नहीं है। बट तादाद में ज्यादा है पर उतने फायर नहीं कर पाया है। मिसाल के तौर पे अभी तक दुबई में सिर्फ पांच ड्रोन हिट किए हैं। तो मेरी राय ये है कि अमेरिका ने कुछ नुकसान तो किया है क्योंकि दिख रहा है कि उस रेंज पे और उस स्पीड पे फायरिंग नहीं हो रही है। दूसरा हमें ये भी पता चला है कि उनकी टॉप लीडरशिप का काफी भारी नुकसान हुआ है। ये अजीब बात है कि एक बार वो कर चुके थे
सफर ईरान जून में तो इस बार ज्यादा तैयारी होनी चाहिए पर पता ये चल रहा है कि जब मीटिंग हो रही थी खमनई सुप्रीम लीडर के घर पे ऑफिस पे तो उसमें काफी टॉप लीडरशिप एलिमिनेट हो गई है। डिफेंस काउंसिल के हेड शमखानी फिर आईआरजीसी के हेड डिफेंस मिनिस्टर इंटेलिजेंस के डेपुटी हेड और अलग से एक स्ट्राइक हुई इंटेलिजेंस हेड्स के ऊपर। ऐसा बताया जा रहा है कि करीब 40 जो है सीनियर लीडर्स जो उनके पूरी पावर स्ट्रक्चर का हिस्सा थे उनका खात्मा कर दिया गया। ऐसा इजराइल का दावा है और इंटेलिजेंस के जितने भी लोअर लेवल के थे ना सीनियर लीडर्स उनको मारा है। सुप्रीम लीडर इंटेलिजेंस के बचे हुए हैं अभी। पर उससे इंटेलिजेंस कैपेबिलिटीज पे भी असर पड़ता है। तो देखना ये है कि लारेजानी अभी तक बचे हुए हैं। लरेजानी जो थे वो इफेक्टिव कमांडर हैं इस वक्त और पहले भी थे मतलब खमे ने उनको डिपट कर दिया था अली लारेजानी। वो पहले आईआरजीसी के भी हेड रह चुके हैं। किस वक्त स्पोर्ट्स पे हैं? इस वक्त उनको बना दिया है सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल का हेड। अच्छा। सो वो टॉप पोजीशन पे हैं। यानी के जो प्रेसिडेंट है पोज़िशन वो भी सब उनके थ्रू ही करवाते हैं। जैसे उनके पास
कोई रिक्वेस्ट आती है पोज़िशन के पास तो वो कहते हैं मेरे पास नहीं लारेजानी से अप्रूवल लो। हमला करने को लेकर के जवाब देने को लेकर के सारी स्ट्रेटजी जो है उसको जो है उस पर मुहर्र अली अली लारेजानी का ही की ही लगेगी। और इसीलिए उन्होंने कहा है वो जो स्टेटमेंट दिया है कि हम आज सख्त जवाब देंगे। अब सख्त जवाब का मतलब क्या है? ये ऑप्शंस जो है सख्त जवाब में क्या हो सकता है? ये सवाल जैसे हमने अभी तक देखा कि पिछले 24 घंटे में हमने देखा कि जो भी करीब करीब सात देशों पर आठ देशों पर ईरान ने जो है जवाबी कार्रवाई की। इसके अलावा क्या ऑप्शंस हैं ईरान के पास? या फिर इसमें भी क्या वो और आगे बढ़ना चाहेंगे? हम तो देखिए जैसे मैंने आपसे कहा कि ये तो मुमकिन नहीं है कि उनके ड्रोन खत्म हो गए हो क्योंकि जब वो रशिया को सप्लाई कर रहे हैं तो अपने लिए तो उन्होंने हजारों ड्रोन रखे होंगे पर वो पूरी तरह से अभी तक फायर नहीं हुए थे। क्या वजह है उसकी समझ में नहीं आ रहा या तो फिर सरप्राइज हो गया उनके ऊपर वो एक्सपेक्ट नहीं कर रहे वो समझ रहे थे कि एग्रीमेंट साइन होने वाला है। इस तरह से
अमेरिका और इजराइल ने दोनों दफा जो है वो एक तरह से आप देखें धोखा दिया है कि वो दिखाते हैं कि हम नेगोशिएट करने की कोशिश और पीछे से खंजर घूपते थे। तो ये हो सकता है पर मुझे लग रहा है कि जैसे दो-चार दिन के बाद रिकवर किया था ईरान। पिछली बार भी दो-चार दिन पहले थोड़ा ठंडा था। फिर फायरिंग रैपिडली शुरू हुई। मिसाइल। मिसाइल तारने शुरू हुए। तो हो सकता है कि फिर से ये हो जाए और हो सकता है फिर से ईरान जो है वो स्पीड पकड़ ले। तो मैं ये कह नहीं सकता पर लग ऐसा रहा है दो तीन चीजें होंगी एक तो होरमूस का क्लोज डाउन मुझे लग रहा है यानी कि वो जो उन्होंने ऑलरेडी कर रखा है कर रखा है पर उसको पूरी तरह होमूस एक बार जो है हम नक्शे पर भी एक बार देख ले ऑडियंस के लिए ये जो है हरमूस कीड़ी हम ये ईरान है और ये इसका शटडाउन मतलब तेल $ भी पार कर सकता है 150 भी पार कर सक
ता है अभी हमें पता नहीं चलेगा संडे की शाम को तेल के बाजार खुलेंगे सबसे पहले ईस्ट एशिया में खुलते हैं जापान में तो संडे की शाम को ही खुल जाते हैं। अमेरिका के टाइम से और यूरोप के टाइम से। हमारे टाइम से समझिए संडे रात को। नहीं तो हमें बेसिक्स जो है ऑडियंस के लिए बताइए कि ऐसा क्या तेल का व्यापार इस इस खाड़ी से कैसे जुड़ा हुआ है और क्या फर्क पड़ेगा तेल के दामों में? हां। तो तो जितने भी सऊदी अरब के भी ऑयल टर्मिनल है यानी सऊदी अरब भी अपना ऑयल यहां से बेचता है। दूसरे रेड सी से नहीं बेचता। यहां से ही बेचता है। क़तर यहीं से बेचता है। अपना तेल और गैस। एंड यहीं से होते हुए जाता है। यूएई, कुवैत, इराक इन सबका तेल यहां से जाता है। यूएई ने एक इस तरफ भी बनाया हुआ है। पर वो भी हॉर्मूस में ही समझिए क्योंकि वो भी अगर हॉर्मूस बंद है तो वो भी उस वहां पे भी नहीं आएंगे जहाज। और क्या होता है कि ये जो तेल की कंपनियां होती है ना शिपिंग कंपनी ये इनका इंश्योरेंस कॉस्ट होती है एक। हम्। तो इंश्योरेंस कॉस्ट जैक अप हो जाती है। हाई हो जाती है। जंग हो रही है। शिप डूब सकता है। तो वह खुद ही शिपिंग कंपनीज़ बंद कर देती हैं। तो ये जरूरी भी नहीं है कि आप यहां पे जरूरी नहीं है कि आप यहां पे सुरंगे लगाएं। माइंस लगाएं या यानी
ब्लॉकेड ना भी करें तो हो सकता है अपने आप। तो वो अपने आप बंद कर देते हैं। तो वैसे ही शिपिंग कंपनीज़ ने वैसे ही बंद किया और 20% तकरीबन दुनिया का तेल यहां से रोज गुजरता है। 20% 20 और हमारे लिए तो बहुत ज्यादा क्योंकि हम तो आप पता है हम 80% हिंदुस्तान जो है वो इंपोर्ट करता है अपना तेल। तो मंडे की मॉर्निंग हमें असल में कुछ काफी हद तक कितना हिस्सा हम इस इलाके से जाते हुए हम तक पहुंचता है क्योंकि हम रशिया से भी तेल लेते हैं तो हां तो अब अब सर्टेन ही है पहले तो हम 80% यहीं से लेते थे अपना तेल अच्छा पर जब से रशिया का हुआ है पर अब रशिया का भी हमने कम कर दिया है तो एग्जैक्टली क्या पोजीशन है आई थिंक इस वक्त रशिया की 1 मिलियन बैरल्स पर डे हम रशिया से लेते हैं मेरे ख्याल से पर क्लियर नहीं है गवर्नमेंट भी साफ बता नहीं रही है कि कितना रशिया से लेते हैं तो हमारे ऊपर हम रशिया से और बढ़ा सकते हैं। तो हमारे ऊपर इंपैक्ट थोड़ा कम होगा। पर तेल का प्राइस ऐसे नहीं डिसाइड होता कि हम रशिया से लेते हैं या हम कहां से लेते हैं। तेल एक फंजेबल कमोडिटी है। फजेबल का मतलब होता है कि जो चीज कहीं से कहीं पे भी पहुंचाई जा सकती हो जिसका दाम विश्व स्तर पे डिसाइड होता हो। तो तेल का जो सप्लाई है और डिमांड वो एक वर्ल्ड मार्केट में आती है और वर्ल्ड मार्केट के लेवल पे डिसाइड होती है। तो मिसाल के तौर पे यहां पे अगर बंद हुआ तो पूरे विश्व में तेल की कीमत ऊपर जाएगी। उसका असर अमेरिका पे भी पड़ेगा। अमरी एक्सजेक्टली वो यही चाहता है ईरान कि अमेरिका और यूरोप पे
। हालांकि अमेरिका सेल्फ सफिशिएंट है तेल में इस वक्त हम पर अगर तेल की कीमत यहां गई तो अमेरिका में भी ऊपर जाएगी तो अमेरिकन कस्टमर पे भी कंपनियों पे भी वोटर्स के ऊपर यूरोप के वोटर्स के ऊपर कस्टमर्स पे सब पे असर पड़ेगा। तो वो ये चाहते हैं कि इस तरह से एक पेन पॉइंट ये होगा। पर हमारे लिए बहुत खतरनाक है ये। क्योंकि हम तो 80% इंपोर्ट करते हैं अपना तेल। हमारे महंगाई भी बढ़ेगी, हमारा रुपया भी गिरेगा और क्योंकि रेमिटेंस भी बंद हो जाएंगे। रोज बिलियंस ऑफ़ डॉलर्स के रेमिटेंस आते हैं से क्योंकि 9 मिलियन इंडियंस यहां रहते हैं। 9 मिलियन यानी कि 90 लाख के करीब इंडियन यहां पे काम करते हैं। इलाकों में इन इलाकों में खाड़ी के इलाकों में तो वो बेचते हैं और वो जो रेमिटेंस हमें आता है ना वो हमारे बैलेंस ऑफ़ पेमेंट्स को बैलेंस करता है। क्योंकि हमारा हमेशा ट्रेड डेफिसिट रहता है दुनिया के साथ। यानी हिंदुस्तान हमेशा ज्यादा इंपोर्ट करता है गुड्स में और कम एक्सपोर्ट करता है। तो सर्विसेस उसको मेकअप करता है। यानी कि जो हम सॉफ्टवेयर सर्विज अमेरिका को भेजते हैं और दूसरा जो रेमिटेंसेस आते हैं जिसमें से आधे रेमिटेंसेस यहां से आते हैं। इस वक्त अमेरिका से आते हैं रेमिटेंस
गल्फ से आते हैं रेमिटेंस। ये तकरीबन बराबर-बराबर का इनका है। तो 50% यहां से और 50% अमेरिका से। तो उसका बहुत बड़ा असर पड़ सकता है। हमारा रुपया गिर सकता है। हमारा इनफ्लेशन बढ़ सकता है। हमारा स्टॉक मार्केट गिर सकता है। और रियलस्टेट पे भी असर पड़ सकता है मार्केट पे। तो जाहिरी तौर पर जो है नुकसान पहुंचाने के लिए अमेरिका को बाकी पश्चिमी देशों को जो अमेरिका के साथ खड़े हैं इजराइल को उनको नुकसान पहुंचाने के लिए ईरान जो है हुरमोस की खाड़ी बंद करने का फैसला ले सकता है। जो कि उसने बहुत हद तक ले भी लिया है और यहां से शिपिंग जो है ऐसी खबरें बता रही है कि शिपिंग बहुत हद तक कम हो गई है। ट्रैफिक यहां का बहुत कम हो गया है। ये तो एक चीज हो गई। दूसरी चीज जो ईरान लगातार कर रहा है कि वो सऊदी अरब में हमने हमले देखे, यूएई में हमने हमले देखे, कतर में हमने हमले देखे, कुवैत में हमने हमले देखे। तो इस ये चीज जो है आगे बढ़ी बढ़ी तो कहां तक जा सकती है और किस तरह नुकसान इसमें दो चीजें हैं दो
एलिमेंट। एक तो इन सबके ऑयल टर्मिनल्स ईरान के बहुत पास हैं। ये इसीलिए जानते थे ये मुल्क और रोकने की कोशिश कर रहे थे अमेरिका को। यानी कि क़तर का भी ऑयल टर्मिनल, सऊदी का भी और यूएई के भी दोनों टर्मिनल इस तरफ भी और उस तरफ भी। तो इन ऑयल टर्मिनल्स को अभी तक टारगेट नहीं किया ईरान ने। पर अगर अमेरिका और इजराइल ने उनके ऑयल टर्मिनल्स को मारा। यानी ईरान के ऑयल टर्मिनल्स को मार वो रिटालिएट कर वो रिटालिएट करें और जब वो करेंगे ना तो तो फिर तेल पागल पागलपने की स्पीड पे तेल का प्राइस बढ़ेगा तब फिर अमेरिका के लिए भी बहुत सारी मुश्किलें खड़ी हो जाएंगी दूसरा हूज़ है हुतीज को एक्टिवेट कर रहे हैं यानी हुतीज यहां यमन इसके बारे में एक बार जो है हमारी ऑडियंस को बताएं बेसिक से कि क्या है हुतीज कौन है तो हुतीज़ जो है वो एक ग्रुप है यमन में यमन इस वक्त काफी डिवाइडेड है हुतीज़ जो है वो एक शिया का एक वर्जन है शियाज़्म में काफी सारे 12 हैं। से सात इमाम को मानने वाले हैं। 12 इमाम को मानने वाले हैं। तीन इमाम को मानने वाले हैं। पांच इमाम को भी मानने वाले हैं। जैसे इस्माइलली हैं। तो ये हुतीज़ जो थे इन्होंने अलायंस बना लिया ईरान के
साथ। ईरान इनको मिसाइल सप्लाई कर रहा है। तो हुतीज़ ने ऑलरेडी एक दो अटैक किए हैं। मुझे पता चला है इजराइल पे भी। कुछ मिसाइल्स फायर किए। बट इजराइल पे उसका ज्यादा कोई असर नहीं है क्योंकि ये दो तीन ही मिसाइल फायर करते हैं वो गिरा देते हैं। एक आध निकल जाती है। पर इनका सबसे बड़ा असर ये है कि ये जो पैसेज है गल्फ ऑफ एडन जिसे कहते हैं ना और यहां से गुजरते हुए रेड सी से सुईज़ कैनाल जिसे कहते हैं। स्वेज नहर तक जाते हुए हम्म। ये पूरा यूरोप आपके लिए खोल देती है और अमेरिका का ट्रेड। तो इसको बंद कर दिया। यानी कि चाइना का, इंडिया का सबका जो ट्रेड है साउथ ईस्ट एशिया का, आसियान का सबका इसमें से गुजर के जाता है, तेल भी जाता है और सामान भी जाता है। पर ये पहले भी बंद कर चुके हैं। फिर बीच में चाइनीज़ के लिए खोल दिया। अब फिर बंद करने का ऐलान है। इसको लेकर बात चलती है कि अगर ये बंद हो गया गल्फ ऑफ स्वीडन से जो है ये बंद हो गया तो फिर यहां से घूमते हुए जो जाना पड़ता है बहुत खर्चा है ये बहुत खर्च पड़ जाता है और टाइम बढ़ जाता है खर्चा बढ़ जाता है तो ये एक और चीज है और अगर आसपास अमेरिकी जहाज बहुत सारे हैं तो उनमें से अगर किसी एक जहाज को गिरा दिया यानी कि कोई शोल्डर फायर्ड मिसाइल या कोई इस तरह की चीज जहाज चाहे सिंक ना भी भी हो क्योंकि जहाज बहुत बड़े होते हैं तो एक मिसाइल से कभी-कभी सिंक
नहीं होते तो पर नुकसान कर सकते हैं अमेरिका का अमेरिका के जहाजों का इसका असर अमेरिका पे बहुत पड़ेगा क्योंकि अमेरिका की पब्लिक खासतौर से ट्रंप के अपना जो बेस है मागा बेस वो कोई भी कैजुअल्टी उठाने को तैयार नहीं है। यानी कोई मौत नहीं चाहता और अभी तक ट्रंप लगातार ये साफ भी करते आ रहे हैं कि अभी तक हमारी कोई कैजुअल्टी नहीं हुई है। बार-बार वो ये बात कह रहे हैं। हां ये तो ट्रंप ट्रंप इसी पे एम्फसाइज कर रहे हैं क्योंकि ट्रंप को पता है कि जैसे ही वो हुआ तो डोमेस्टिक ऑोजिशन इंक्रीस हो जाएगा और ये ये साल जो है वो इलेक्शन का साल है। अक्टू नवंबर में इलेक्शन होंगे वहां 6 नवंबर को फिर से तो उसको अवॉइड करने की कोशिश कर रहे हैं। बाकी ये हो दो तीन चीजें और हो सकती हैं। एक तो इराक में अटैक्स हो सकते हैं इराकी शिया मिलेशियास के लेबनान के वो तो चल ही रहे हैं। दूसरा ये हो सकता है कि जितने भी अमेरिकन और इजरयली एसेट्स हैं मिडिल ईस्ट में भी और यूरोप में भी उनप टेररिस्ट अटैक्स हो सकते हैं। वो दो तरह से हो सकते हैं। एक तो हिजबुल्ला के स्लीपर सेल हो सकते हैं ईरान के। वो तो कम ही लग रहे हैं। दूसरा अलकायदा के अटैक्स हो सकते हैं। क्योंकि अलकायदा का जो लीडर है सैफ अल आदिल वो फोटोग्राफ हुआ है ईरान के अंदर। अच्छा। हां। तो इंटेलिजेंस ने फोटोग्राफ किया है उसको ईरान के अंदर। तो यानी कि कुछ कोऑर्डिनेशन हो सकता है और कुछ महीने पहले यूएन
की काउंटर टेररिज्म की रिपोर्ट आई थी जिसमें ये कहा गया था कि अलकायदा जो है वो यूरोप में बड़े अटैक करने की कोशिश कर रहा है क्योंकि वो अपने आप को रिवाइव करना चाहता है और नए रिक्रूट्स चाहता है तो वो नए रिक्रूट्स के लिए तो वो भी मुमकिन है कि टेररिस्ट अटैक्स भी हो दुनिया भर में। तो ये हमने कुछ जो है ऑप्शंस देखे यानी कि कुल मिलाकर अगर हम कुल जमा कहना चाह तो अगर बहुत खतरनाक इटलेशन नहीं भी कर सका तो नाक में दम तो कर ही सकता है अमेरिका के और बाकी पश्चिमी देशों के उनको परेशान तो कर ही सकता है काफी लंबे समय के लिए और वो जाहिरी तौर पर वो नहीं चाहेंगे कि इस तरह के जो जो ट्रेड रूट्स हैं वो बंद हो ईरान की स्ट्रेटजी ये है कि इसको खींचो इस लड़ाई को लंबा खींचो अमेरिका और इजराइल चाहता है कि छोटा हो इजराइल वैसे ही छोटा मुल्क है उसके लिए सस्टेन करना मुश्किल है अमेरिका के लिए पॉलिटिकली सस्टेन करना ट्रंप के लिए मुश्किल है। लॉन्ग जी मेरी मुझे तो ये लगता है कि ट्रंप फॉरेन अभी बंद करना चाहते हैं और डिक्लेअर करना चाहते हैं विक्ट्री की मैंने कहा मैंने को मार दिया। पर उनके ऊपर प्रेशर है कि नहीं आप एक हफ्ते तक तो करो बॉम्बिंग नहीं तो फिर रिजीम वीकन नहीं होगी। जब तक कमजोर नहीं होगी रिजीम तब तक कोई रिबेलियन नहीं होगा। तो रिबेलियन की कम से कम एक हफ्ते के लिए और मुझे लग रहा है एक हफ्ते के अंदर ट्रंप की फूंक निकल जाएगी। उनका स्टाइल यह है अगर पिछला ट्रैक
रिकॉर्ड देखें 10 साल का आठ साल का तो कि वो मारते हैं और वो निकलना चाहते हैं जल्दी और उन्होंने भी यही सबक सीखा है वियतनाम अफगानिस्तान इराक इन जंगों से कि ग्राउंड फ्रूट्स नहीं आने चाहिए कि लंबी नहीं चलनी चाहिए लड़ाई तो वो मतलब वो चाहते हैं कि मैं अपना केक बचा भी रहे मेरा और मैं खा भी लूं उस केक को तो अब ये दोनों देखते हैं किस तरह से मुमकिन हो पाते हैं। तो जाहिर है आपने देखा कि ट्रंप चाहते हैं कि सांप भी मर जाए और लाठी भी ना टूटे। वो नहीं चाहते कि वो ईरान में लंबे समय तक इनवॉल्वड रहे। जैसे अमेरिका ने इराक में किया। जैसा अमेरिका ने अफगानिस्तान में किया। उसकी खासी बेइज्जती हुई। ऐसा ट्रंप नहीं चाहते हैं। लेकिन इस मामले में ये साफ भी नहीं है। वो बार-बार ईरान के ईरान के आवाम को कह रहे हैं कि आप
लोग जो है बगावत कर दीजिए। आप लोग ईरान की जो सत्ता है उसको उखाड़ फेंकिए। लेकिन ये कैसे होगा? बिल्कुल भी साफ नहीं है। इस पॉइंट पर भी हम एक डिस्कशन करेंगे। फिलहाल हम इस वीडियो को यहीं पर विराम देते हैं। इसके अलावा हम ईरान और इजराइल और और अमेरिका के बीच जो जंग चल रही है उस पूरे मुद्दे पर हम लगातार अपनी कवरेज जो है जारी रख रहे हैं। देखते रहिए द बहुत शुक्रिया सर। [संगीत]


