अली खामेनेई को मारने के लिए मोसाद, सीआईए ने तेहरान के कितने सीसीटीवी हैक कर बनाया प्लान? ईरान

ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामिनेई को मारने का प्लान कई सालों पहले ही बन गया था। कई सालों से उनके आसपास के इलाकों पर नजर रखी जा रही थी। एक-एक एक्टिविटी को रिकॉर्ड किया जा रहा था। यहां तक कि तेहरान के ट्रैफिक कैमरों को भी हैक कर लिया गया था। फाइनेंसियल टाइम्स की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। अखबार में इस्तांबुल से मेहुल श्रीवास्तव, यरूशलम से जेम्स शॉर्टर और तेलबीब से

नेरी जिलबर की एक रिपोर्ट पब्लिश हुई है। अखबार से बात करते हुए एक इजराइली अधिकारी ने कहा कि वह तेहरान को भी उतने ही अच्छे से जानते हैं जितना अपने देश की राजधानी यरूशलम को जानते हैं। इस रिपोर्ट में बताया गया कि खामिने को मारने के लिए पैटर्न ऑफ लाइफ पर नजर रखी जा रही थी। पैटर्न ऑफ लाइफ मतलब सिक्योरिटी गार्ड्स की पूरी डिटेल। उनका नाम, पता, किस रूट का इस्तेमाल करते हैं, कौन सी गाड़ी से चलते हैं, कितने घंटे की ड्यूटी करते हैं, किसे रिपोर्ट करते हैं और किसकी सुरक्षा पर तैनात हैं? इन सारी बातों को रिकॉर्ड किया जा रहा था। फाइनेंसियल टाइम्स के रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी इंटेलिजेंस एजेंसी सीआईए और इजराइली इंटेलिजेंस एजेंसी नोसाद सालों से खामने की हत्या का प्लान कर रहे थे। रिपोर्ट में बताया गया कि तेहरान के लगभग सारे ट्रैफिक कैमरों को कई साल पहले ही हैक कर लिया गया था। कैमरे में रिकॉर्ड हुई सारी तस्वीरें सीधा इजराइल के तेल अवे में

ट्रांसमिट होती थी। जिस दिन थामेने की मौत हुई उस दिन भी उनके बॉडीगार्ड्स पर नजर रखी जा रही थी। ईरान में हुए एयर स्ट्राइक को इजराइल में बैठे अधिकारी उन्हीं कैमरों की मदद से देख रहे थे। सूत्रों के मुताबिक तेहरान में कई जगह मोबाइल फोन टास् को भी बाधित करने में इजराइल सक्षम था। मुसाद के अधिकारी को कोट करते हुए रिपोर्ट में बताया गया कि कैमरों की मदद से हम तेहरान की सड़कों को बहुत अच्छे से जान गए थे। हम उनसे इतना ज्यादा वाकिफ थे जितना अपने घर के रास्तों से हैं। जब आप किसी रास्ते को इतनी बारीकी से जाने लगते हैं तो छोटा सा बदलाव भी आपकी नजर में आ जाता है। इजराइली सेना के रिजर्व ब्रिगेडियर जनरल और 25 साल खुफिया एजेंसी में काम कर चुके इताई शापेरा बताते हैं कि किसी को टारगेट करने के लिए इजराइल की खुफिया व्यवस्था में सबसे अहम काम होता है उसकी सटीक जानकारी जुटाना। पूरी खुफिया मशीनरी इसी मकसद से काम करती है कि सरकार या सेना की बनाई रणनीति को जमीन पर कैसे उतारना है। अगर डिसीजन मेकर्स यानी कि ऊपर बैठे लोग यह तय कर लेते हैं कि किसी व्यक्ति को मारना है तो खुफिया एजेंसियों का काम होता है कि हम उस व्यक्ति की लोकेशन, गतिविधियों और बाकी दूसरी जानकारियों को जुटा लें। अधिकारी ने बताया कि पिछले साल जून में हुए युद्ध में भी इसी

स्ट्रेटजी पे काम किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक इजराइयली पायलट्स ने खास तरह की मिसाइल का इस्तेमाल किया था जिसे इजराइल में स्पेरो कहते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक सीआईए और मुसाद को पता था कि खामिनई 28 फरवरी को एक मीटिंग करेंगे। एजेंसीज ने इसी मौके का फायदा उठाया और हमला कर दिया। बताया गया कि मुसाद को खामिनेई की मीटिंग की जानकारी ट्रैफिक कैमरों की मदद से मिली थी। जबकि सीआईए को इसकी जानकारी अंदर के किसी अधिकारी ने दी थी। माने कि किसी ने खामिनेई की मुखबरी की थी। इसी इंफॉर्मेशन के आधार पर इजराइल और यूएस ने खामिनई और उनके परिवार को खत्म कर दिया। इसी हमले में खामेनई, उनकी पत्नी, बेटी, दामाद और पोती की मौत हो गई थी और अब बदला लेने के लिए ईरान, अरब देशों, इजराइल और यूएस एंबेसी पर अटैक कर रहा है। इस खबर में फिलहाल इतना ही। अपडेट्स हम आप तक पहुंचाते रहेंगे। मेरा नाम है विभा। देखते रहिए द लेटो।

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