उत्तर जो मिला है मैं उससे पूर्णत संतुष्ट नहीं हूं क्योंकि उसमें ऐसा लिखा है कि भवन जजर स्थिति में नहीं है बस उसकी मरम्मत की आवश्यकता है लेकिन मैं चाहती हूं एक बार मंत्री महोदय एक बार पुनः अवलोकन कराएं बिहार का यह स्वास्थ्य केंद्र बीमार है। इसलिए 25 साल की बीजेपी विधायक मैथिली ठाकुर ने अपनी ही पार्टी से आने वाले स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे के लिए कह दिया जवाब से संतुष्ट नहीं हूं। अस्पताल दरभंगा जिले का है। इसी जिले की एक सीट है अलीनगर जहां से लोक गायिका मैथिली ठाकुर अब विधायक हैं।
कहानी जिस बयान से शुरू होती है, पहले वह सुनाते हैं। श्री मैथिली ठाकुर उत्तर मिला है ना? जी उत्तर जो मिला है मैं उससे पूर्णत संतुष्ट नहीं हूं क्योंकि उसमें ऐसा लिखा है कि भवन जजर स्थिति में नहीं है। बस उसकी मरम्मत की आवश्यकता है। लेकिन मैं चाहती हूं एक बार मंत्री महोदय एक बार पुनः अवलोकन कराएं क्योंकि मैं खुद जाकर के देखी हूं। भवन जजर स्थिति में है। वहां पे एक छोटे से कमरे में स्वास्थ्य व्यवस्था का संचालन हो रहा है। एमबीबीएस चिकित्सक नहीं है। पूर्व में वहां पर दो-दो एमबीबीएस चिकित्सक थे। लेकिन अभी नहीं है। उत्तर में लिखा है कि उधर आयुष चिकित्सक है जिससे मैं सहमत हूं। लेकिन हमें वहां पे दो एमबीबीएस डॉक्टर्स की आवश्यकता है। स्वास्थ्य केंद्र के परिसर की मेन बिल्डिंग में डॉक्टर बैठे हैं। मरीजों को देख रहे हैं। दवाएं भी हैं।
लेकिन डॉक्टर एक ही हैं। वह भी आयुष डॉक्टर। जबकि यहां दो एमबीबीएस और दो आयुष डॉक्टरों के पद हैं। डिलीवरी करनी पड़े तो उसके लिए भी यहां इंतजाम नहीं है। यहां जो है दो पोस्ट एमबीबीएस के लिए है जो यहां पे अभी एक भी नहीं है। और दो पोस्ट आयुष डॉक्टर के लिए है जिसमें एक हम मैं कार्यरत हूं और यहां पेशेंट की जो पर डे की कैपेसिटी है वो लगभग 50 से स्टार्ट किया है। एक ओटी है जो बंद पड़ा हुआ है जो पहले डिलीवरी होता था यहां पे विगत कई वर्षों से डिलीवरी बंद है यहां पे। एनएम नहीं है। प्लस यहां जो डॉक्टर है वो नहीं है। इस कारण से यहां पे डिलीवरी भी बंद है। कितना विगत चार पांच वर्ष डिलीवरी परसेंट है उसको दिक्कत होता है यहां सारे दीदी को मां बहन को नहीं होना चाहिए। हमारी तरफ से उसको यहां सब उपलब्ध होना चाहिए। यह इमारत तो जजर नहीं लगती लेकिन इसके ठीक सामने कुछ कमरे हैं जो जजर हालात में हैं। आईएस डॉक्टर बताते हैं कि कभी यहां ओपीडी चलती थी डॉक्टर नर्स मौजूद रहते थे। जिस स्वास्थ्य केंद्र को लेकर के मैथिली ठाकुर ने सवाल उठाई थी कि यहां बिल्डिंग जो है वह ठीक नहीं है और जो सुविधाएं हैं वो कहीं ना कहीं नहीं है।
आप देखिए सामने बिल्डिंग आपको एक तरफ चकाचक दिख रही है। तो दूसरी तरफ देखिए इसी कैंपस के अंदर ये वो तमाम पुरानी जजर बिल्डिंग है जो कहीं ना कहीं स्वास्थ्य सेवा में योगदान दे रहे थे कर्मचारी डॉक्टर उनके रहने के लिए यह जगह बनाया गया था और कैसे किस हाल में खंडर बना हुआ है। पूरी तरीके से आप इस तस्वीर के माध्यम से देखने का प्रयास कीजिए। जो सरकार कह रही है कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में काफी कुछ किया गया है। उसकी एक बानगी है। लोग बताते हैं कि कैसे पहले यह अस्पताल जगमगाया हुआ करता था और लोगों को कहीं ना कहीं इसका पूरा का पूरा फायदा ही मिलता था। दूसरी रेजिडेंशियल की स्थिति देखिए। ना खिड़की है ना किवार है। घर के अंदर पेड़ उगा के आए हैं। बिल्डिंग की हालत इतनी जजर है कि उसके अंदर जाना मुमकिन सा नहीं है। भले ही मंत्रालय को मैथिली ठाकुर की बातें चुबी हो लेकिन यहां के ग्रामीण मैथिली ठाकुर के उन सवाल को खूब तारीफ कर रहे हैं और उनकी चर्चाएं इलाके में हो भी रही है। मैथिली ठाकुर ने दरभंगा के कुरसो नदियामी गांव के इस स्वास्थ्य केंद्र का जिक्र किया था तो बताया था कि करीब 400 लोग इस पर निर्भर हैं। अगर यहां किसी जांच की नौबत आ जाए तो कहीं और जाना होगा क्योंकि यहां सिर्फ शुगर का टेस्ट हो सकता है।
पांच से सात पंचायत इस हॉस्पिटल पर निर्भर करती है जिसका साफ-साफ मानना है कि 40 से 5000 तक के जो 40 से 500 लोग हैं जो इस हॉस्पिटल से लाभान्वित होते हैं और मेरे पूरे विधानसभा के केंद्र में यह हॉस्पिटल है जिससे कि अलग जो दो प्रखंड है घनश्यामपुर प्रखंड और अलीनगर प्रखंड दोनों इससे लाभान्वित हो सकते हैं। टेस्ट का कोई सुविधा नहीं नहीं यहां पे सिर्फ ब्लड शुगर टेस्ट होता है। इसके बाद कोई टेस्ट नहीं हो रहा है। रिक्वायरमेंट है जरूरत गुजारा। हां हां जैसे हीमोग्लोबिन के लिए जो है हीमोग्लोबिन टेस्ट है। सीबीसी है, लीवर फंक्शन टेस्ट है। वो सब का जांच होना चाहिए। इस स्वास्थ्य केंद्र की एक और इमारत है जहां एमबीबीएस डॉक्टर, नर्स और स्वास्थ्य केंद्र में काम करने वाले रहते थे। अब इन कमरों में भूसा भरा है। कई जगह प्लास्टर साथ छोड़ चुका है। और यह तस्वीर देखिए। कमरे का स्थिति देखिए। यहां बताया गया कि यह ओपीडी था यहां चलता था और इसकी एक तस्वीर देखिए कितने ईंट पत्थर है जो छत के ऊपर प्लास्टर है वो झर के नीचे गिरे और जो छत के सरिया है उसे जंग खा गया है पूरी तरीके से वो दिखाई दे रहा है दीवाल पे जो है पैर के जरे निकली हुई है और इसे देखने वाला कोई नहीं है शायद जो मैथिली ठाकुर है यहां की विधायिका इसी भवन के बारे में बता रही थी कि जो जजर हाल में है लेकिन सरकार ने जो उन्हें ने जवाब दिया कि नहीं वहां कोई बिल्डिंग जजर हाल में नहीं है। हम आपको दूसरी दूसरे कमरे की भी तस्वीरें दिखाते हैं कि क्या स्थिति है। यहां देखिए ये भी एक कमरा है और इस कमरे में किस तरह से देखिए जो मवेशियों के चारे होते हैं भूसा वो भरा गया है और इस कमरे का भी वही हाल है। ऊपर जो छत है वो कहीं ना कहीं जजर है। हम लोगों को बहुत कठिनाई झेलना पड़ रहा था। हम हम लगभग 10 वर्ष से इसमें प्रयास में लगे थे। पिछले भी विरा को बोले हुए थे लेकिन वह नहीं कुछ कर पाए। लेकिन मैथली ठाकुर जी प्रथम प्रथम हमारे यूपीएससी को नरयामी का आवाज उठाए तो वो उनको कोटि-कोटि का धन्यवाद दे रहे हैं।
मैथली ठाकुर बचपन से स्वास्थ्य मंत्री को देखती आई हैं। उन्होंने दरभंगा के स्वास्थ्य केंद्र की बिल्डिंग भी देखी है। उम्मीद है कि मंगल पांडे सियासत में आई युवा विधायक को दोबारा यह कहने का मौका नहीं देंगे। उत्तर जो मिला है, मैं उससे पूर्णतः संतुष्ट नहीं हूं। देखने वालों को लग सकता है कि हेल्थ सेंटर की मेन बिल्डिंग तो ठीक-ठाक है। लेकिन सोचिए कि जिस अस्पताल पर 400 लोग निर्भर हो वहां एक भी एमबीबीएस डॉक्टर ना हो लोग डिलीवरी ना करा सकें तो अस्पताल को बीमार ही कहा जाएगा ना। कई बार असल जिंदगी और ओटीटी की कहानी एक जैसी लगने लगती है। हो सकता है ग्राम चिकित्सालय आपने भी देखा हो। गांव के इस हेल्थ सेंटर को भी डॉक्टर प्रभात का इंतजार है और मंत्री मंगल पांडे की नजरें इनायत का भी।