क्या है MoCap Tech जिसे SS Rajamouli, वाराणसी के सबसे ज़रूरी सीन्स में इस्तेमाल कर रहे हैं? Avatar

एस एस राजा मौली केवल अपनी लार्ज [संगीत] स्केल फिल्मों के लिए नहीं बल्कि एडवांस टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल के लिए भी जाने जाते हैं। पिछले दिनों उन्होंने नागार्जुन अकिने के साथ मिलकर [संगीत] देश की सबसे बड़े मोशन कैप्चर फैसिलिटी की शुरुआत की है। खास बात यह है कि उन्होंने इस टेक्निक [संगीत] का इस्तेमाल महेश बाबू स्टारर वाराणसी में भी किया है। वीडियो देखकर लग रहा है कि उन्होंने मूवी के रामायण वाले सीक्वेंस को यहां

फिल्माया है। राजामौली ने 25 फरवरी को ए एंड एम मोकैप लैब नाम के इस हाईटेक स्टूडियो की शुरुआत की है। यह जानकारी उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो के जरिए दी है। फैसिलिटी को हैदराबाद के अन्नपूर्णा स्टूडियो में बनाया गया है। यह एक्टर नागार्जुन का ही स्टूडियो है। राजामौली ने पिछले साल देश के पहले डॉलबी सिनेमा की शुरुआत इसी स्टूडियो में की थी। राजामौली और नागार्जुन के अलावा मिरा विजुअल लैब्स भी इस प्रोजेक्ट से जुड़ा है। यह लैब एनिमेशन फिल्म बाहुबली द एटरर्नल वॉर पर काम कर रहा है। वही नहीं राजाम मौली और नागार्जुन के अलावा मेहरा विजुअल लैब्स भी इस प्रोजेक्ट से जुड़ा [संगीत] है। यह लैब एनिमेशन फिल्म बाहुबली द एटरनल वॉर पर काम कर रहा है। यही नहीं इस फैसिलिटी को हॉलीवुड के

[संगीत] एनिमेट्रिक फिल्म डिज़ स्टूडियो का भी साथ मिला है। यह वही स्टूडियो है जिसने अवेंजर्स एंड गेम और स्पाइडरमैन नो वे होम जैसी बड़ी फिल्मों के विजुअल इफेक्ट्स तैयार किए हैं। [संगीत] यह स्टूडियो राजामौली की आरआरआर पर भी काम कर चुका है। सवाल उठता है कि यह मोशन कैप्चर या मोकैब टेक्निक है क्या भला? दरअसल यह एक काफी एडवांस कैमरा सेटअप [संगीत] है। इसमें दो से लेकर 100 कैमरे हर एंगल से आपकी तस्वीरें खींचते हैं। उनके जरिए इंसान के एक्सप्रेशन और मूवमेंट को सेंसर की मदद से रिकॉर्ड [संगीत] किया जाता है। फिर उस मूवमेंट को कंप्यूटर के जरिए फिल्म के 3D डिजिटल कैरेक्टर में फिट किया जाता है। इससे वो कैरेक्टर विजुअल असली इंसान जैसे हावभाव देने लगता है। इस टेक्निक का इस्तेमाल अवतार और लॉट्स ऑफ द रिंग जैसे वर्ल्ड क्लास फिल्मों में किया

जा चुका है। अवतार जैसे लोग असल दुनिया में तो होते नहीं है ना ही मेकर्स उन पर नीली पेंट थोपने में अपना वक्त जाया करना चाहते हैं। इसलिए उन्होंने मोकैप टेक्निक का इस्तेमाल किया है। लॉट्स ऑफ द रिंग के गोलम और अवेंजर्स एंड गेम के थनोस के एक्सप्रेशनंस भी इसी टेक्निक के कारण [संगीत] इतने असली लगते हैं। द हॉलीवुड रिपोर्टर से हुई बातचीत में राजामौली बताते हैं, भारत में हमेशा से दुनिया के कुछ सबसे बेहतरीन टेक्नशियंस [संगीत] रहे हैं। वो बड़ी-बड़ी विदेशी फिल्मों में काम करते हैं। लेकिन हमारे देश में ऐसी एडवांस टेक्नोलॉजी मौजूद नहीं थी। जब मैं

बाहुबली और ईगा जैसी अपनी पुरानी फिल्मों को [संगीत] देखता हूं तो लगता है कि अगर उस समय भारत में मोशन कैप्चर टेक्नोलॉजी होती तो मैं उन्हें और भी बेहतर बना सकता था। राजामौली बताते हैं कि उन्होंने वाराणसी फिल्म में एक बेहद अहम सीक्वेंस में इस टेक्निक का इस्तेमाल किया है। वीडियो देखकर लग रहा है कि वो सीक्वेंस लंका युद्ध से जुड़ा हुआ है। फिल्म में इससे [संगीत] जुड़ा करीब 23 मिनट का सीन होगा। स्टूडियो में मौजूद स्टंट आर्टिस्ट हाथ में गधा और भाले लिए एक दूसरे से भिड़ रहे हैं। देखने से ऐसा लग रहा है कि राजामौली ने स्टूडियो में [संगीत] वानरों और राक्षसों की लड़ाई

शूट की है। कंप्यूटर की स्क्रीन पर भी कई राक्षसों [संगीत] के 3D मॉडल्स की झलक दिखाई देती है। हालांकि अभी यह बिल्कुल शुरुआती अपडेट है। देखना होगा कि फिल्म [संगीत] रिलीज होने तक यह मोशन कैप्चर टेक्निक का क्या बदलाव लेकर आती है। ये तमाम जानकारी मेरे साथी शुभांजल ने जुटाई है। मैं हूं कनिष्का। [संगीत] आप देख रहे हैं लल्लन टॉप सिनेमा। शुक्रिया। [संगीत]

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