बेटियों ने पिता को क्यों उतारा मौत के घाट, वजह आपको हैरान कर देगी

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने रिश्तों, समाज और सोच तीनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भोपा थाना क्षेत्र के मोरना गांव में सुबह जब लोगों ने करीब 60 वर्षीय किसान राम प्रसाद का शव खून से लथपथ हालत में घर के अंदर पड़ा देखा तो पूरे गांव में सनसनी फैल गई। किसी ने सोचा भी नहीं था कि यह खून किसी बाहरी दुश्मन ने नहीं बल्कि उसी घर की बेटियों ने बहाया होगा। पुलिस को 112 के जरिए सूचना मिली और मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की गई। गला धारदार हथियार से रेत दिया गया था। शरीर पर भी वार के निशान थे। यह साफ था कि हत्या बेहद गुस्से

और आवेश में की गई है। क्या है पूरी कहानी के पीछे का राज? इस वीडियो में आगे समझिए। नमस्कार, मेरा नाम है अनुष गुप्ता और आप देख रहे हैं एनडीt इंडिया। इस मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी शक घर के भीतर ही घूमता रहा। पुलिस ने मृतक की बड़ी बेटी कोमल और नाबालिक छोटी बेटी से पूछताछ की। शुरुआत में दोनों शांत रही। लेकिन जब सवाल गहराए तो सच भी सामने आ गया। दोनों ने कबूल किया कि पिता के लगातार ताने, बेटा-बेटी में फर्क और छोटी-छोटी बातों पर रोक-टोक से वह अंदर ही अंदर टूट चुकी थी। समाज में बदनामी, शादी को लेकर ताने और घर में ही बैठे रहने की बातों ने उनके मन में गुस्सा भर दिया था। बताया जा रहा है कि पिछले दो दिनों से वह इस घटना की योजना बना रही थी। रात में एक बार फिर कहासनी हुई

और गुस्से में उन्होंने चाकू से हमला कर दिया। वार इतना गंभीर था कि पिता की मौके पर ही मौत हो गई। हत्या के बाद दोनों ने खून से सने कपड़े और चाकू को एक पोटली में बांधकर घर के पास भूसे के ढेर में छुपा दिया। लेकिन पुलिस की सख्ती और तकनीकी जांच के सामने राज ज्यादा देर छुप नहीं पाया। मात्र 2 से 3 घंटे के भीतर पुलिस ने पूरी घटना का खुलासा कर दिया। एसपी ग्रामीण आदित्य बंसल ने बताया कि सभी साक्ष्य जुटाकर बेटियों की निशानानदेही पर हत्या में इस्तेमाल चाकू और खून से सने कपड़े बरामद कर लिए गए हैं। बड़ी बेटी की उम्र लगभग 30 से 32 साल बताई जा रही है।

जबकि छोटी बेटी इंटर की छात्रा है और नाबालिक है। दोनों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। एक 50 से 60 वर्ष व्यक्ति की हत्या हो गई है। इस पर तत्काल मेरे द्वारा सीओ भोपा एसएओ भोपाल जिले की एसओजी फील्ड यूनिट सबके द्वारा घटना स्थल का निरीक्षण किया गया। जो भी महत्वपूर्ण साक्ष्य हैं इसमें एकत्रित किए गए और सभी टीमों ने बहुत ही त्वरित कारवाई करते हुए दो से तीन घंटे के अंदर ही इस घटना का सफल अनावरण किया है। मृतक का नाम राम प्रसाद है। ये 50 से 60 वर्ष के हैं। इनका जब मौके पर जाके देखा गया तो इनका गला काटा हुआ था और इनके पेट पे भी दो चाकू के शार्प किसी वेपन के स्टपिंग के जो है निशान थे। इनकी बॉडी को जो है पंचायता में पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया गया। जब इस पूरी घटना का अनावरण किया है तो इसमें यह सामने आया है

कि इनकी दो बेटियां एक कोमल है जिसकी उम्र 30 से 32 साल है और दूसरी एक नाबालिक बेटी है। दोनों ने मिलकर जो है अपने पिता की हत्या कर दी। जब उनसे पूछताछ की गई तो उन्होंने कारण यह बताया कि उनके जो पिता का उनके प्रति व्यवहार था कि वो बेटा और बेटी में फर्क करते थे। बहुत ज्यादा टोकाकी करते थे। कुछ तर्ज करते थे कि तुम घर पे बैठी हो। तुम्हारी अभी तक शादी नहीं हुई है। तुम कुछ कमा नहीं रही हो और समाज में हमारी बदनामी हो रही है। ये सब टोंट से ताने तानों से इन सब से परेशान हो के दोनों बेटियों ने जो है मिलकर इसकी योजना बनाई। दो दिन से वो लगभग इसकी

प्लानिंग कर रही थी और रात में जब उनका जो है उन्होंने अपने पिता को एक बार समझाने का प्रयास किया। पिता ने फिर भी उनको गुस्से में कोई बात बोली तो आवेश में आकर उन्होंने जो है चाकू से इस तरीके से अपने पिता पर हमला किया और उसके बाद उनकी हत्या कर दी। उनकी बेटी की निशानदेही से उनका जो हत्या जिस चाकू से किया गया वो चाकू भी और खून में लदे हुए कपड़े जो कपड़े उसने हत्या के समय पे पहने थे बेटी ने वो कपड़े एक पोटली में बंद करके जो भूस में डाल रखी थी वो पोटली भी हमने बरामद की है और इसी प्रकार इस घटना का अनावरण किया गया है। दोनों को जो है

नियमानुसार गिरफ्तार किया गया है और माननीय न्यायालय समक्ष इनको प्रस्तुत किया जाएगा। हत्या करने वाले कितने जो बड़ी बेटी है उसकी उम्र लगभग 30 से 32 साल है। जो छोटी बेटी है वो इंटर में पढ़ती है। उसकी उम्र जो है 14 से 16 साल के आसपास बता रही है। यह कहानी सिर्फ एक हत्या की नहीं है बल्कि उस सोच की भी है जो आज भी कई घरों में बेटा और बेटी के बीच फर्क करती है। सवाल यह है कि क्या ताने और भेदभाव इतने गहरे

जख्म दे सकते हैं कि बेटियां अपने ही पिता की जान ले ली। क्या संवाद की कमी और सामाजिक दबाव ने इस परिवार को इस अंधे मोड़ तक पहुंचा दिया। मोरना गांव में अब सन्नाटा है। लोग हैरान है और हर कोई यही पूछ रहा है कि आखिर गलती किसकी थी। एक पिता की सोच, बेटियों का गुस्सा या समाज की वो मानसिकता जो बराबरी की बात तो करती है लेकिन उसे अपनाने में पीछे रह जाती है।