मोबाइल डेटा पर राघव चड्ढा ने खोली डिजिटल लूट की पोल..
जब एक यूजर अपना मोबाइल फोन रिचार्ज कराता है तो उसे अपने रिचार्ज प्लान के हिसाब से डेली की डाटा लिमिट मिलती है। 1 1/2 GB, 2GB या 3GB प्रतिदिन। लेकिन ये डेली की डाटा लिमिट जो होती है रात 12:00 बजे समाप्त हो जाती है। जैसे ही दिन खत्म होता है और ये अनयूज्ड डाटा जो है ये फोरफीट हो जाता है। ये अगले दिन रोल ओवर या नेक्स्ट डे कैरी फॉरवर्ड नहीं होता है। कंज्यूमर से पैसा तो पूरे डाटा का लिया जाता है लेकिन ये अनयूज्ड डाटा जो बचा हुआ डाटा होता है ये एक्सपायर हो जाता है जैसे दिन समाप्त होता है। सर फर्ज करिए कि महीने की शुरुआत में आपने अपनी गाड़ी में 20 लीटर पेट्रोल भरवाया। महीने के अंत तक 15 लीटर पेट्रोल कंज्यूम हो गया। 5 लीटर बच गया। तो क्या महीने के अंत पर पेट्रोल पंप वाला आकर आपको कहता है कि 5 लीटर पेट्रोल वापस कर दो क्योंकि उस
की वैलिडिटी समाप्त हो गई? नहीं क्योंकि आपने पैसा पूरे 20 लीटर का दिया है। ठीक इसी तरह जिस जितने डाटा का पैसा हमसे लिया जाता है उतना डाटा हमें यूज़ करने दिया जाए वो एक्सपायर ना हो। तो ये हमारे मेहनत के पैसे से खरीदा गया डाटा है। और सर चालाकी देखिए आजकल के रिचार्ज प्लांस में डेली की डाटा लिमिट होती है। मंथली की डाटा लिमिट नहीं होती क्योंकि मंथली की डाटा लिमिट के अंदर मैक्सिमम डाटा की खपत का कंज्यूम करने की प्रोबेबिलिटी यानी कि संभावना ज्यादा होती है। एक महीने के भीतर या मान लीजिए चार सात दिन कोई व्यक्ति व्यस्त है या बीमार है। लेकिन बचे हुए दिन में या जब उसकी छुट्टी होती है वो ज्यादा डाटा कंज्यूम कर सकता है। इसीलिए मैक्सिमम डाटा मंथली प्लान में कंज्यूम होता है। इसके चलते आज टेलीकॉम ऑपरेटर डेली की डाटा लिमिट वाला
प्लान पुश करते हैं। सर आज इंटरनेट सिर्फ एक एंटरटेनमेंट या मनोरंजन का सोर्स नहीं है। ये एक प्रकार से हमारे जीवन के लिए एसेंशियल बनता जा रहा है। इट इज लाइक डिजिटल ऑक्सीजन। हर चीज के लिए इंटरनेट चाहिए और इसीलिए आज करोड़ों भारतीयों का जब लाखों जीबी डाटा रोज एक्सपायर हो जाता है। अनयूज्ड बचा हुआ डाटा क्योंकि उसकी वैलिडिटी समाप्त हो गई। तो ये सवाल अब सिर्फ डाटा का नहीं है सर। यह कंज्यूमर राइट्स का सवाल बन चुका है। इसीलिए मेरी तीन स्पष्ट मांगे आज सदन में। पहली मांग यह नियम बने कि डाटा कैरी फॉरवर्ड यानी कि डाटा रोलओवर की सुविधा हर यूजर को दी जाए। यानी कि दिन के अंत पे आपका जितना जीबी डाटा बच गया वो अगले दिन के आपके डेली के डाटा पैक में जोड़ा जाए। वैलिडिटी के साथ समाप्त ना हो। दूसरा पॉइंट अगर महीने के अंत में काफी बड़ी मात्रा में आपका डाटा एक्यूमुलेट अगर हो जाता है, बच जाता है तो यूजर को ऑप्शन दिया जाए कि इस डाटा
की वैल्यू का एडजस्टमेंट वो अपने रिचार्ज प्लान के अगेंस्ट कर सके। यानी कि अगले महीने वो जितने वैल्यू की रिचार्ज कराता है उसमें से छूट मिले, डिस्काउंट मिले अनयूज्ड डाटा की मार्केट वैल्यू के अनुसार। जैसे कि बिजली की खपत आप जितनी करते हैं जितने यूनिट उतना ही पैसा भरते हैं। ठीक उसी तरह जितने GB डाटा कंज्यूम करें उतना ही पैसा वसूला जाए उससे ज्यादा ना वसूला जाए और थर्ड नियम जो बनना चाहिए वो ये है कि अनयूज डाटा को आपका डिजिटल एसेट माना जाए और जिस प्रकार से हम पैसा ट्रांसफर कर सकते हैं डाटा ट्रांसफर अलाउड होना चाहिए। यानी कि यदि आज मेरा कुछ बचा हुआ डाटा है डेली पैक के अनुसार मैं अपना बचा हुआ एक डेढ़ GB अपने परिवार वालों को ट्रांसफर आज मैंने जीरो आवर में एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया है जो देश के तमाम मोबाइल फोन यूज़र्स से जुड़ा हुआ है। आप सब से भी जुड़ा हुआ है। वो यह है कि हम जब अपना रिचार्ज कराते हैं तो हमें अपने प्लान के अनुसार डेली की डाटा लिमिट मिलती है। 1 1/2 GB प्रतिदिन डाटा, 2GB, 3GB लेकिन रात 12:00 जैसे ही बजते हैं, मिडनाइट होती है, दिन समाप्त होता है तो जितना बचा हुआ डाटा है अनयूज्ड डाटा वो एक्सपायर हो जाता है। उसे अगले दिन के लिए कैरी फॉरवर्ड या रोलओवर नहीं किया जाता। आपसे कंज्यूमर से, यूजर से पैसा तो पूरे डाटा का लिया जाता है। लेकिन जितना आपका बचा हुआ अनयूज्ड डाटा है वो कंपनियां फोरफीट कर लेती है। यह गलत है। जिस प्रकार से आप मान लीजिए पेट्रोल भरवाते हैं गाड़ी में 20 लीटर महीने भर में 15 लीटर इस्तेमाल किया 5 लीटर बच गया तो महीने के अंत पेट्रोल पंप का मालिक आकर यह तो नहीं कहता कि 5 लीटर वापस करो। कि वैलिडिटी समाप्त हो गई। भाई आपने पूरा पैसा दिया 20 लीटर का तो पूरा 20 लीटर आप इस्तेमाल करेंगे। ठीक उसी तरह डाटा रोलओवर भी अलाउड होना चाहिए। यदि मैं एक दिन में अपनी डेली की डाटा लिमिट को एक्सपायर यूज़ नहीं कर पाया हूं, यूटिलाइज़ नहीं कर पाया हूं, वो अगले दिन का जो मेरा डाटा लिमिट है, उसमें जुड़ जाना चाहिए और डाटा रोलओवर भारत में अलाउड होना चाहिए। दुनिया के कई देशों में यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका, यूरोप के कई देशों में, ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड तमाम देशों में यह डाटा रोलओवर और डाटा कैरी फॉरवर्ड की फैसिलिटी दी जाती है। और मेरी दूसरी मांग ये है कि डेटा ट्रांसफर जैसे हम एक दूसरे को पैसा ट्रांसफर कर सकते हैं अपने मोबाइल फोन से दूसरे मोबाइल फोन में। उसी तरीके से डाटा ट्रांसफर भी अलाउ होना चाहिए। मान लीजिए आज किसी परिवार में बूढ़े मां-बाप स्मार्टफोन कम इस्तेमाल करते हैं। कम डाटा कंज्यूम करते हैं। लेकिन उनको बच्चों की पढ़ाई करनी है। उन्हें ज्यादा डाटा चाहिए। तो मां-बाप अपने डेली के डाटा लिमिट से बच्चों को डाटा ट्रांसफर कर सके। इस प्रकार की फ्री डाटा ट्रांसफर की भी एक योजना बननी चाहिए। ये महत्वपूर्ण मुद्दे आज मैंने सदन में उठाए हैं। भारत में 125 करोड़ मोबाइल फोन यूजर हैं। जिसमें से 90% प्रीप्लेड प्लान के यूजर हैं। सर आज मैं प्रीप्रेड प्लान के जो मोबाइल यूज़र्स हैं उनकी ओर से दो समस्याएं उठाना चाहता हूं। सर पहली समस्या है कि रिचार्ज खत्म होने के बाद आउटगोइंग के साथ-साथ इनकमिंग कॉल का भी बंद होना। सर जब प्रीपेड प्लान एक्सपायर होता है या मोबाइल रिचार्ज की वैलिडिटी खत्म होती है तो आपकी आवाज बंद कर दी जाती है। फोन मेरा, सिम कार्ड मेरा, नंबर मेरा सर रिचार्ज खत्म होने के बाद आउटगोइंग कॉल बंद होना समझ आता है। लेकिन इनकमिंग कॉल बंद होना सरासर मनमानी है। सर हमारा मोबाइल नंबर आज हमारी डिजिटल पहचान बन चुका है। एसेंशियल कम्युनिकेशन जैसे कि यूपीआई पेमेंट, बैंकिंग ओटीपी, ट्रेन टिकट ओटीपी, पैन आधार ऑथेंटिकेशन, इंटरव्यू का कॉल, हॉस्पिटल का कॉल, मां-बाप का गांव से कॉल तमाम चीजें इनकमिंग कॉल और इनकमिंग एसएमएस से आती है और वो इसलिए बंद कर दिया जाता है कि इंसान एक रिचार्ज कराना भूल गया। सर, इनकमिंग कॉल बंद करना इज नॉट स्टॉपिंग ऑफ अ सर्विस। ये हमारे राइट टू कम्युनिकेशन को स्टॉप करने जैसा है। सर जैसे आपका आधार कार्ड इसलिए एक्सपायर नहीं हो जाता कि आपने डिटेल अपडेट नहीं करी या आपका बैंक का खाता इसलिए बंद नहीं हो जाता कि आपने मंथली डिपॉजिट जमा नहीं किया या आपका वोटर आईडी इसलिए सस्पेंड नहीं हो जाता कि आप एक चुनाव में वोट डालना भूल गए। ठीक उसी तरह आपका मोबाइल नंबर इसलिए सस्पेंड और डीएक्टिवेट नहीं होना चाहिए कि आप एक रिचार्ज भूल गए। सर मैं सदन में फ्री आउटगोइंग की मांग नहीं कर रहा। फ्री डाटा की मांग नहीं कर रहा। लेकिन इनकमिंग कॉल फैसिलिटी की गारंटी होनी चाहिए। मेरी तीन स्पेसिफिक मांग है। पहली प्रीपेड मोबाइल कनेक्शन में इनकमिंग कॉल और इनकमिंग एसएमएस कम से कम एक साल तक कंटिन्यू रहे, चलता रहे फ्रॉम द डेट ऑफ द लास्ट रिचार्ज ताकि एसेंशियल कम्युनिकेशन चलती रहे। दूसरी डीएक्टिवेशन ऑफ द मोबाइल नंबर आफ्टर थ्री इयर्स। ऐसा ना हो कि आपका मोबाइल नंबर किसी को आपका मोबाइल नंबर बंद करके किसी और को अलॉट कर दिया जाए। कम से कम 3 साल का ग्रेस पीरियड देना चाहिए फ्रॉम द डेट ऑफ द लास्ट रिचार्ज। एंड थर्ड डिमांड मोबाइल ऑपरेटर शुड इंट्रोड्यूस अ लो कॉस्ट इनकमिंग ओनली प्लान वो लोग जो सिर्फ इनकमिंग के लिए फोन रखते हैं उनके लिए जैसे कि ₹10 में 180 दिन कमी 180 दिन की इनकमिंग कॉल की फैसिलिटी। इस प्रकार की स्कीम्स मोबाइल ऑपरेटर को लानी चाहिए। दूसरी समस्या जो प्रीपेड कस्टमर्स फेस करते हैं वो है टेलीकॉम ऑपरेटर का 28 दिन का मंथली रिचार्ज। साल में सर महीने 12 होते हैं। लेकिन 28 दिन की रिचार्ज के माध्यम से 13 टाइम्स रिचार्ज कराना पड़ता है। कैसे? सर 28 दिन * 13 टाइम्स इक्वल टू 364 डेज। ये एक बड़ी क्लेवर स्ट्रेटजी है जिसके चलते आपको फीलिंग 30 दिन की देते हैं लेकिन आपसे डीलिंग 28 दिन की करते हैं। सर दुनिया में हर जगह बिलिंग साइकिल कैलेंडर मंथ के हिसाब से होती है।


