जैसे इंडियन वोटर के पास राइट टू इलेक्ट है वैसे ही राइट टू रिकॉल भी होना चाहिए। अगर देश का मतदाता अपने नेताओं को हायर कर सकता है तो नेताओं को फायर करने की शक्ति भी उसे मिलनी चाहिए। इमेजिन हमारी पार्लियामेंट में जेस बैठे हो। वेल, यह तो पॉसिबल नहीं है, लेकिन यंग एजुकेटेड पॉलिटिशियंस क्या-क्या चेंजेस ला सकते हैं, इसका टीजर रिसेंटली आम आदमी पार्टी से सांसद राघव चड्डा दिखा रहे हैं। राघव ने अब टिपिकल केजरीवाल स्टाइल पॉलिटिक्स से हटकर अपना खुद का स्टाइल बनाया है। यह पार्लियामेंट में वो मुद्दे उठा रहे हैं जिसके बारे में यूजुअली बात ही नहीं होती थी। क्या है वह मुद्दे और कैसे राघव चड्डा अपने हेटर्स को भी इंप्रेस कर रहे हैं समझने के लिए वीडियो को एंड तक जरूर देखना। पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट रहे राघव इज वन ऑफ द यंगेस्ट एमपीस करेंटली एट द एज ऑफ 37। नाउ लेट्स सी कि राघव ने संसद में कौन से इंपॉर्टेंट मुद्दे उठाए हैं। सबसे रीसेंट है राइट टू रिकॉल। राघव ने कहा कि जनता को अपने नेताओं को 5 साल से पहले हटाने का हक होना चाहिए। अगर कोई पॉलिटिशियन अपनी ड्यूटीज ठीक से परफॉर्म ना करें तो। राज्यसभा के जीरो आर में राइट टू रिकॉल के मुद्दे को उठाते हुए राघव ने कहा इफ वोटर्स कैन हायर अ नेता दे शुड बी एबल टू फायर द नेता टू। उन्होंने यह भी कहा कि अगर 30 टू 45% वोटर्स एक वेरीिफाइड पिटीशन के थ्रू यह कहते हैं कि वो अपने लीडर के काम से सेटिस्फाइड नहीं है देन द लीडर शुड [संगीत] बी रिकॉल्ड। अब यह इंडिया यानी कि बिगेस्ट डेमोक्रेसी इन द वर्ल्ड में पॉसिबल है या नहीं यह तो नहीं पता लेकिन फॉर श्योर अगर ऐसा होता है तो पॉलिटिशियंस और भी ज्यादा रिस्पांसिबल बनेंगे और जनता की डिमांड्स पर ध्यान देंगे। अगला मुद्दा है एयरपोर्ट केओस एंड हाई प्राइसेस का। राघव ने कहा कि लॉन्ग क्यूज, ओवर क्राउडिंग और पुअर फैसिलिटीज की वजह से [संगीत] एयरपोर्ट्स आजकल बस स्टैंड की तरह लगने लगे हैं। इसके साथ-साथ यह भी कहा कि पैसेंजर्स को बेसिक चीजें जैसे वाटर और स्नैक्स के लिए हैवी अमाउंट पे करने पड़ते हैं। ओवरऑल बात हुई एयर ट्रैवल को मोर अफोर्डेबल एंड इंडियन मिडिल क्लास फ्रेंडली बनाने की। राघव ने जेंज़ यूर्स और क्रिएटर्स के लिए भी आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि रैंडम अनवेरिफाइड कॉपीराइट स्ट्राइक्स की वजह से क्रिएटर्स को काफी प्रॉब्लम फेस करनी पड़ती है।
इसीलिए [संगीत] कॉपीराइट एक्ट 1957 में अमेंडमेंट्स होने चाहिए और फेयर यूज़ के लिए क्लियर रूल्स सेट होने चाहिए। इस पर राघव चड्डा को जजी का सपोर्ट भी मिला। नाउ वी ऑल नो दैट गिग वर्कर्स आर बीइंग एक्सप्लइटेड। मल्टीपल डिलीवरीज थ्रूउ द डे करने के बाद भी उन्हें बहुत कम पैसे दिए जाते हैं। राघव ने ज़पो ब्लिंकड एटसेक्ट्रा [संगीत] के साथ काम कर रहे डिलीवरी वर्कर्स को इकट्ठा कर स्ट्राइक्स के थ्रू डिमांड्स रे की। 10 मिनट डिलीवरी क्लेम्स अब कंपनीज नहीं कर सकती है। ओवरऑल गिग वर्कर्स [संगीत] को भी काफी फायदे हुए हैं। इसके साथ-साथ उन्होंने फूड एडल्ट्रेशन मतलब कि खाने में जो धड़ल्ले से मिलावट चल रही है उस पर भी आवाज उठाई। राघव हैज़ गेन प्रजेस [संगीत] कि कैसे पार्टी लाइन से हटकर वो मुद्दे उठा रहे हैं जो एक्चुअली पब्लिक को हेल्प करेंगे।
एक इंपॉर्टेंट पॉइंट यहां यह है कि राघव इज अ यंग एजुकेटेड पॉलिटिशियन। [संगीत] तो क्या और भी ऐसे यंग लीडर्स को सामने आना चाहिए जो पॉजिटिव चेंजेस ला सकते हैं? अकॉर्डिंग टू द डाटा फ्रॉम द एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स एमपीस और एमएलए इंडिया में टिपिकली 46 टू 65 इयर्स ऑफ़ एज के होते हैं। एंड दिस नीड्स टू चेंज बिकॉज़ यंग पॉलिटिशियंस आर एक्चुअली [संगीत] स्पीकिंग अप। एक और एग्जांपल देती हूं। बीजेपी की मैथिली ठाकुर इज़ वन ऑफ़ द यंगेस्ट एमएलए।
टिपिकल पॉलिटिशियंस की तरह पार्टी की हां में हां ना मिलाने की जगह मैथली ने अपने ही मिनिस्टर पर क्वेश्चंस रेज किए ताकि वो मेक श्योर कर सके कि पब्लिक की डिमांड्स पूरी हो। तो ऑल इन ऑल आई वाउच फॉर यंग इंडियन पॉलिटिशियंस एंड व्हाट अबाउट यू? लेट अस नो इन द कमेंट्स।