गाड़ियां धू-धू कर जल रही हैं। आसमान में धुएं का गुबार है। एयरपोर्ट्स पर भगदड़ मची है। देश के 20 राज्यों में ऐसा कोहराम है। मंजर देख मालूम पड़ता है कि बगावत हो गई हो। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। यह आग एक खूंखार माफिया के एनकाउंटर के बाद भड़की है। एक ऐसा माफिया जिसकी प्राइवेट फौज देश की सेना से लोहा लेती है। जिसके साम्राज्य की शुरुआत हुई एक छोटी सी गलती से। एक पार्टी में एक गुर्गे ने दूसरे पर गलती से गुड़हल की चाय गिरा दी। इतनी सी बात पर छिड़ गया गैंग वॉर और खून खराबे से पैदा हुआ मुर्गों का सरदार। खौफ इतना कि अमेरिका के राष्ट्रपति ने इसके गिरोह को विदेशी आतंकी संगठन घोषित कर रखा है। नौबत यहां तक आ गई थी कि अमेरिका ने उसके देश में अपनी सेना घुसाने और हवाई हमले करने की धमकी दे दी थी। यह देश है मेक्सिको और उस खूंखार सरगना का नाम है निमेसियो उसे गिरा सरतेस। ड्रग्स की दुनिया का एलमेंचो। एलमेंचो अब मारा जा चुका है और उसकी मौत की खबर आते ही पूरे मेक्सिको में हिंसा फैल गई
है। आज इसी मुर्गों के सरदार की कहानी सुनाएंगे। नमस्ते। मेरा नाम है अंकुर और आप देख रहे हैं ललन टॉप का अंतरराष्ट्रीय प्रसंगों से जुड़ा रोजाना का कार्यक्रम दुनियादारी। कहते हैं ज्योग्राफी इज डेस्टिनी। भूगोल ही नियति है। मेक्सिको के साथ ऐसा ही है। इसका भूगोल ड्रग्स के कारोबार के लिए परफेक्ट है। नक्शा देखिए। जहां अमेरिका की दक्षिणी सीमा खत्म होती है, वहां से शुरू होता है मेक्सिको। इसका दक्षिण पूर्वी हिस्सा पूंछ की तरह समंदर में आगे बढ़ता हुआ जुड़ता है गुवाटे माला से। पूंछ आगे बढ़े तो निकारागुआ, कोस्टारिका और पनामा पार करके बसा है वेनेजुएला। आपको बखूबी याद होगा निकोलस माद्रो वाला देश। यह पूरा बेल्ट ड्रग्स के कच्चे माल और उसकी सप्लाई का मेन रूट है। मेक्सिको का उत्तरी बॉर्डर नॉर्दन बाउंड्री अमेरिका से लगती है। अवैध तरीके से अमेरिका में घुसने की चाहत रखने वाले लोग इसी बॉर्डर का इस्तेमाल करते हैं। अमेरिका में पहुंचने वाले ज्यादातर इललीगल ड्रग्स इसी बॉर्डर से सप्लाई होते हैं। तो यह था भूगोल। अब तस्वीरों में नियति देखिए। धुएं का गुबार है। सड़कों पर खड़ी गाड़ियां फूंक दी गई हैं। 250 से ज्यादा जगहों पर आगजनी की खबरें आई हैं। अहम
हाईवेज जो हैं वह ब्लॉक्ड हैं। बैंक्स और सुपर मार्केट्स को निशाना बनाया जा रहा है। जगह-जगह गोलीबारी हो रही है। लोग जान बचाकर भाग रहे हैं। उड़ाने रद्द कर दी गई हैं। देश के करीब 20 राज्यों में पिछले 24 घंटे से ऐसा ही कोहराम मचा है। हिंसा में अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है। जिनमें से सात सुरक्षा बल के जवान हैं। हालात इतने बेकाबू हैं कि भारत, अमेरिका और कनाडा ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइज़री जारी की है। हिदायत दी गई है कि जहां है वहीं रहें। यह सब हो क्यों रहा है? जवाब है एक मौत। एक खूंखार शख्स नाम नेमेसियो ओसगुएरा सरतेस। दुनिया उसे एल्मेंचो के नाम से जानती थी। 60 बरस का एलेंचो मेक्सिको के सबसे खतरनाक और ताकतवर हेलिस्को न्यू जनरेशन कार्टल का सरगना था। अमेरिका ने इसके सर पर ₹5 मिलियन यानी करीब ₹125 करोड़ का इनाम रखा था। यह शख्स उत्तरी अमेरिका में कोकीन मेथमफेटमाइन और जानलेवा फेंटनिल का सबसे बड़ा सप्लायर था। 22 फरवरी को मेक्सिको की सेना ने जेलिस्को राज्य के तपालपा शहर में एक खुफिया ऑपरेशन चलाया। इसमें अमेरिका ने भी खुफिया जानकारी देकर मदद की थी। इंटेलिजेंस में सहायता की। इस
एनकाउंटर में एलमेंचो बुरी तरह घायल हुआ। उसे इलाज के लिए हेलीकॉप्टर से मेक्सिको सिटी यानी जो उसकी राजधानी है वहां ले जाया जा रहा था। लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। कारवाही में उसके गिरोह के नौ गुर्गे भी मारे गए। एल्मेंचो की मौत की खबर बाहर आते ही उसके गुर्गों ने पूरे देश में तांडव शुरू कर दिया। एलमेंचो की कहानी 1960 के दशक से शुरू होती है। मेक्सिको के मिचुआकन राज्य का एक छोटा सा गांव मेंचो के घर में भयंकर गरीबी थी। परिवार एोकाडो के खेतों में काम करता था। पैसों की किल्लत ऐसी थी कि उसे पांचवी कक्षा में ही स्कूल छोड़ना पड़ा। बचपने में ही वो खेतों में काम करने लगा। लेकिन इतने से क्या ही होना था। ऐसा उसने 14 बरस की उम्र में सोचा। सोच फली फूली तो नया रास्ता इख्तियार किया गया। उस इलाके में चोरी छिपे गांजे की खेती होती थी। एलमेंचो ने वहां पहरेदारी शुरू की। यहां से उसने जुर्म की दुनिया का कतहरा सीखा। फिर 80 का दशक आया। हजारों लोग उत्तर की ओर जा रहे थे। उत्तर यानी अमेरिका। अलमचो भी उनके साथ हो लिया। गैर कानूनी तरीके से अमेरिका में एंट्री ली। वहां उसकी मुलाकात अपने साले अभीगायल, गुंजालेज़ वेलसिया से हुई। दोनों हिरोइन और मेथ का धंधा करने लगे। लेकिन चकि यह मेक्सिको नहीं था, अमेरिका था इसलिए कानून उन तक कई कई बार पहुंचा। 1986 में वह चोरी और बंदूक रखने के इल्जाम में पकड़ा गया। फिर 1992 में वह अपने बड़े भाई के साथ हेरोइन बेचते हुएंगे हाथ पकड़ा गया। ग्राहक बनकर आए लोग असल में अंडर कवर पुलिस के एजेंट्स थे। एल्बमचो ने अपने भाई को उम्र कैद से बचाने के लिए सारा इल्जाम अपने सर पर ले लिया। 5 साल की सजा काटी। इस फैसले ने अंडरवर्ल्ड में उसका नाम और रुतबा खासा बढ़ा
दिया। 5 साल की सजा काटने के बाद उसे मेक्सिको डिपोर्ट कर दिया गया। मेक्सिको आकर उसने एक शातिर चाल चली। पुलिस फोर्स ज्वाइन कर ली। मकसद ईमानदारी से नौकरी करना तो कभी था ही नहीं। आगे की लड़ाई की तैयारी थी। सिस्टम की कमजोरियां समझना और ड्रग्स के धंधे में कांटेक्ट्स बनाना। काम निकल गया तो पुलिस की नौकरी छोड़ दी गई। फिर उसने मिलनियो कार्टिल जॉइ किया। वहां वो अपनी पत्नी रोजालिंडा से दोबारा मिला। शादी यानी दो परिवारों का मिलन। रोजालिंडा का परिवार लॉस क्वीनिस के नाम से जाना जाता था। यह लोग पैसे को ठिकाने लगाने और मनी लॉन्ड्रिंग के उस्ताद थे। मिल बैठे तो खूब बने। एलमेंचो ने शुरुआत की एक हिटमैन के तौर पर। उसने लॉस हितास कार्टिल के खिलाफ इतने खूंखार हमले किए कि उसके गुट का नाम ही लॉस माताहितास यानी हेतास के कातिल पड़ गया। इमंचो को उम्मीद थी कि इतनी मेहनत के बाद उसे अपने कार्टल में बड़ी पदवी मिलेगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कार्टिल के खिलाफ सरकार एक्टिव हो गई थी। उसके कई बड़े नेताओं को मार दिया गया था या पकड़ लिया गया था। लीडरशिप वैक्यूम बना, गद्दी खाली थी। एलममेंचो ने मौका देखा और अपने ही पुराने साथियों के खिलाफ लड़ाई छेड़ दी। 2011 में वो जीत गया और उसने अपना खुद का कार्टिल बनाया सी जे एनजी हेलिस्को न्यू जनरेशन कार्टल। न्यू जनरेशन नाम इसलिए रखा ताकि दुनिया को बता
सके कि वो पुराने माफियाओं से अलग और ज्यादा खतरनाक है। पुराने से समझिए एलपो। एलचापो कौन? मेक्सिको का पुराना डॉन Netflix पर इस नाम से एक सीरीज है। आप देख सकते हैं। एलचापो जैसे पुराने डॉन हॉलीवुड के चकाचौंध और मीडिया को पसंद करते थे। सामने आते थे। लेकिन एलमेंचो अलग था। वो पहाड़ों में छिपा रहता था। गोरिल्ला आर्मी के जनरल की तरह काम करता था। ड्रग्स की दुनिया की एक मशहूर कहानी है। एलमेंचो पहले एलचापो के सिनालोवा कार्टल का ही हिस्सा हुआ करता था। सिनालोवा कार्टल सबसे खतरनाक कार्टिल हुआ करता था। सब कुछ ठीक चल रहा था। फिर एक रोज कुछ ऐसा हुआ कि दोनों के रास्ते अलग हो गए। कहानी कहती है कि एक पार्टी चल रही थी। वहां एक तस्कर ने दूसरे तस्कर के ऊपर गलती से गुड़हल का शरबत गुड़हल की चाय गिरा दी। यहां से ऐसी दुश्मनी शुरू हुई कि दोनों गुट आज तक लड़ रहे हैं। एलमैनचो को मुर्गों की लड़ाई का बहुत शौक था। उसे मुर्गों का सरदार कहा जाने लगा। हाल के बरसों में सोशल मीडिया पर उसके शक्ति प्रदर्शन के वीडियो आम हो गए थे। इन वीडियोस में उसके गुर्गे बिल्कुल सेना जैसी वर्दी पहने और भारी राइफल्स लिए नजर आते थे। सीजे एनजी का काम करने का तरीका भी दूसरों से अलग था। वो सिस्टम से छिपने की बजाय सिस्टम को टक्कर देने में यकीन रखते थे। एलेंचो का
साला ड्रग्स के पैसे को रियलस्टेट, शॉपिंग मॉल और इंटरनेशनल बिजनेस में लगाता था। कहा था शादी यानी परिवारों का मिलन। यह निवेश कई अन्य देशों में होता था। इससे सरकारों के लिए उनका पैसा ज्त करना लगभग नामुमकिन हो गया। एलमंचो ने अपना नेटवर्क फैलाने के लिए लोकल गैंग्स को फ्रेंचाइजी दी। जो लड़के भर्ती किए जाते उन्हें दूरदराज के कैंप्स में मिलिट्री जैसी ट्रेनिंग दी जाती। भागने की कोशिश करने वालों को बेरहमी से मार दिया जाता। लेखक ऑस्टिन के स्टार अपनी किताब में बताते हैं कि पुराने कार्टिल चुपचाप काम करते थे और रिश्वत देते थे। लेकिन एलमेंचो की रणनीति थी शॉक एंड ऑल। यानी इतनी ताकत और हिंसा दिखा दो कि सामने वाला डर में रहे। गिरोह के पास ऐसे हथियार भी थे जो आम आपराधिक गैंग्स के पास नहीं होते। इनका इस्तेमाल डर पैदा करने और सुरक्षा बलों को दूर रखने के लिए किया जाता था। उनके पास कुछ बड़े ट्रक्स थे जिनको उन्होंने मोटी स्टील प्लेट से ढककर इस्तेमाल करना शुरू किया था। इन गाड़ियों में मजबूत बैरिकेड्स तोड़ने की क्षमता होती थी। यह लोग ड्रोन का इस्तेमाल भी करते
थे। हाल के वर्षों में ऐसा और भी ज्यादा देखने को मिला जहां उन्होंने निगरानी के लिए और हमलों के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया। इससे दूर बैठकर भी विरोधियों या पुलिस पर दबाव बनाना आसान हो गया। 2019 आते-आते हाल ऐसा हुआ कि अमेरिका भेजे जाने वाले कुल ड्रग्स का 1/3 से भी ज्यादा हिस्सा यही गैंग सप्लाई करता था। ड्रग्स तस्करी इसका इकलौता काम लेकिन नहीं था। हथियार बेचना, रंगदारी वसूलना, किडनैपिंग करना, मेक्सिको के प्राकृतिक गैस भंडार की चोरी करना ऐसे तमाम अपराध भी यह गिरोह करता रहता था। ताकत का अंदाजा दो घटनाओं से लगाइए। पहली मई 2015 की है। मैक्सिकन आर्मी का एक हेलीकॉप्टर 18 जवानों को लेकर उड़ रहा था। नीचे इस गैंग के गुर्गे थे। उन्होंने रॉकेट लांचर से हेलीकॉप्टर पर हमला कर दिया। हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया और नौजवान मारे गए। दूसरी घटना जून 2020 की है। मेक्सिको की राजधानी मेक्सिको सिटी। तड़के सुबह का वक्त था। शहर के तत्कालीन सिक्योरिटी चीफ उमर गारशाह हरफूक अपने काफिले के साथ आगे जा रहे थे। उमर की गाड़ी शहर के सबसे पौश इलाके में थी जिसे बेहद सुरक्षित माना जाता था। लेकिन उस रोज करीब तीन दर्जन हथियारबंद लोगों ने उमर के काफिले पर हमला कर दिया। अकेले उमर की गाड़ी पर 400 राउंड से ज्यादा गोलियां चली। दो पुलिस अधिकारी और एक राहगीर मारा गया। उमर को भी तीन गोलियां लगी। उन्हें अस्पताल ले जाया
गया। डॉक्टर्स ने एक इमरजेंसी ऑपरेशन किया। मगर अब भी उमर की हालत अस्थिर थी। कुछ देर बाद उमर को होश आया। जानते हैं होश में आते ही उन्होंने सबसे पहले क्या किया? उन्होंने किया एक ट्वीट जो आपकी स्क्रीन पर है। तब Twitter Twitter हुआ करता था। इस ट्वीट में उमर ने उस गैंग का नाम लिखा जिसने उन पर हमला करवाया। उमर चाहते थे वो बचे ना बचे मगर उन पर हमला करने वाला गैंग का नाम सबको पता चल जाए। किसका नाम लिखा था उमर ने? द हेलिस्को न्यू जनरेशन कार्टल जिसे शॉर्ट में बुलाते हैं सी जे एन जे जिसका सरगना था एल मेंचो। लेकिन ये मेक्सिको के ड्रग प्रॉब्लम का एक हिस्सा था। पूरी बीमारी का इलाज मुश्किल है। मेक्सिको में आज भी 1 लाख से ज्यादा लोग लापता बताए जाते हैं। हर साल 300 से ज्यादा लोग ड्रग कार्टल से जुड़ी वलेंस में मारे जाते हैं। आम लोग जान बचाने के लिए अमेरिका का रुख करते हैं। गैरकानूनी तरीके से अमेरिका जाते हैं। यह सब कुछ 80 के दशक में शुरू हुआ था। तब अलग-अलग गिरोह अपना-अपना इलाका चलाते थे। फिर लालच बढ़ा तो आपस में ही जंग शुरू हो गई। 2006 में राष्ट्रपति फिलिप कॉल्डोन ने सेना उतारकर कार्टल्स के खिलाफ जंग का ऐलान कर दिया वॉर ऑन ड्रग्स। 2014 में सिनोलोवा कार्टिल का बॉस एलचापो पकड़ा गया जिसका नाम हमने आपको पहले भी लिया बताया।
बड़ी गद्दी खाली हुई तो नए गैंग्स के बीच खूनखराबा और भी ज्यादा बढ़ गया। इसके बाद सत्ता में आए राष्ट्रपति ओब्राडोर। उन्होंने नरमी बरती। कहा कि गरीबी दूर करके और सजा कम करके हम इस मामले को सुधार सकते हैं। लेकिन उनकी नीति बुरी तरह फेल हो गई। अब कमान क्लाउडिया शनबम के हाथ में है। 2024 से वो मेक्सिको के राष्ट्रपति हैं। उनके राज में हत्याओं में 32% की कमी जरूर हुई है। गिरफ्तारी बढ़ी है। अमेरिका पहुंचने वाला फेंटनल भी कम हुआ है। लेकिन यह नाकाफी है। इन गैंग्स की जड़े उखाड़ने के लिए शिनबम को सुरक्षा पर बहुत ज्यादा पैसा खर्च करना होगा जो वो कर नहीं रही हैं। अपनी जीडीपी का 1% से भी कम खर्च वो सिक्योरिटी पर कर रही हैं। बीमारी मेक्सिको की राजनीति भी है। सरकार में बैठे कई ताकतवर नेताओं के तार इन गिरोहों से जुड़े हैं। आलम यह है कि अब इस लड़ाई में डॉन्ड ट्रंप की भी एंट्री हो गई है। आपकी स्क्रीन पर है एक तस्वीर नमक के 10-15 दानों के बराबर एक डोज़ महज 2 मिलीग्राम और इंसान की मौत पक्की। नाम फेंटनिल। इस ड्रग से अमेरिका में हर साल करीब 500 लोग मारे जा रहे हैं। डोनल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में इसको वेपन ऑफ मास डिस्ट्रक्शन यानी सामूहिक विनाश का हथियार घोषित किया है। इसके अलावा उन्होंने एल मेंचो के हेलिस्को न्यू जनरेशन और सिनालोवा जैसे आठ बड़े कार्टल्स को विदेशी आतंकी संगठन फॉरेन टेररिस्ट ऑर्गेनाइजेशन घोषित
कर दिया था ताकि इनके खिलाफ हमला करने के लिए अमेरिकी रक्षा विभाग यानी पेंटगन को पूरी छूट मिल जाए। अमेरिका ने मेक्सिको को धमकी भी दे रखी है कि अगर मेक्सिको कुछ नहीं करता तो अमेरिकी सेना खुद मिलिट्री स्ट्राइक करेगी। जाहिर है मेक्सिको के राष्ट्रपति क्लाउडिया शिनबम को यह नागवार है। संप्रभुता पर एक सवाल उठेगा। इसलिए वो जोरों शोरों से इस लड़ाई में लगी हुई हैं। एलमेंचो की हत्या इस लड़ाई में उनकी सरकार के लिए एक बड़ी जीत मानी जा रही है। यह थी एलमेंचो की कहानी। बड़ी खबर यहीं तक। अब सुर्खियों की बारी। सत्ता में आने के बाद से ही टेरिफ के गुणगान गाने वाले ट्रंप पर अब उनका ही प्लान बैक फायर कर गया है। 24 फरवरी से अमेरिका ट्रंप के लगाए गए टेररिफ्स की वसूली बंद कर देगा। कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन यानी सीबीपी एजेंसी ने इसकी जानकारी दी। दरअसल अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी को इन टेरिफ्स को गैर कानानूनी घोषित कर दिया था। हालांकि कोर्ट के फैसले के बाद भी कुछ दिनों तक बंदरगाहों पर यह शुल्क वसूले जाते रहे। सीबीपी ने शिपिंग कंपनीज को भेजे मैसेज में कहा कि वह ट्रंप के आईईपीए से जुड़े सभी टेरिफ कोड बंद कर रही हैं। हालांकि सीबीपी ने यह नहीं बताया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी कुछ दिन तक टेरिफ क्यों वसूले गए। यह भी नहीं बताया गया कि जो कंपनीज़
पहले ही पैसा दे चुकी हैं उन्हें रिफंड मिलेगा या नहीं। एजेंसी ने यह जरूर कहा कि यह फैसला बाकी टेरिफ्स पर असर नहीं डालेगा। जैसे सेक्शन 232 यानी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े टेरिफ और सेक्शन 301 यानी गलत बिजनेस प्रैक्टिस के खिलाफ टेरिफ। लेकिन ट्रंप इतनी आसानी से कहां पीछे हटने वाले हैं? उन्होंने एक दूसरे कानून के तहत पूरी दुनिया से आने वाले सामान पर 15% का नया टेरिफ लगा दिया है। उधर रइर्स की रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद करीब 175 अरब डॉलर की रकम संभावित रिफंड के दायरे में आ सकती है। इकोनॉमिस्ट्स का अनुमान है कि आईईईपीए वाले टेरिफ से अमेरिकी सरकार को हर दिन लगभग $50 करोड़ डॉलर से ज्यादा की कमाई हो रही थी। ईरान में बढ़ते तनाव के बीच तेहरान में मौजूद भारतीय एंबेसी ने एक अहम एडवाइज़री जारी की है। इसमें वहां मौजूद सभी भारतीय नागरिकों से जल्द से जल्द देश छोड़ने को कहा गया है। दूतावास ने कहा
कि छात्र, तीर्थ यात्री, कारोबारी और पर्यटक सभी लोग उपलब्ध साधनों, खासकर कमर्शियल फ्लाइट से ईरान से निकलने की कोशिश करें। एडवाइज़री में बताया गया है कि यह कदम 5 जनवरी को जारी पहले सरकारी निर्देश के आगे का अपडेट है। मौजूदा हालात को देखते हुए भारतीयों को सावधानी बरतने को कहा गया है। दूतावास ने यह भी सलाह दी है कि विरोध प्रदर्शन वाले इलाकों से दूर रहें। स्थानीय खबरों पर नजर रखें और भारतीय दूतावास के संपर्क में बने रहें। साथ ही नागरिकों से यह भी कहा गया है कि अपने पासपोर्ट और दूसरे जरूरी दस्तावेज हमेशा तैयार रखें। मदद
के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है जो आपकी स्क्रीन पर है। यह एडवाइज़री ऐसे समय आई है जब ईरान में छात्रों के प्रदर्शन दूसरे दिन भी जारी हैं। वहीं अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बना हुआ है। इसी बीच परमाणु समझौते को लेकर बातचीत भी जारी है। दोनों देशों के बीच अगले दौर की बैठक 26 फरवरी को स्विट्जरलैंड के जेनेमा में होगी। आज का दुनियादारी यहीं समाप्त होता है। अपना और अपनों का ख्याल रखिए। शुक्रिया। शुभ रात्रि।