सऊदी प्रिंस सलमान ने फोन कर खामेनेई को मारवाया! इजराइल नहीं सऊदी निकला असली खलनायक, मची खलबली
इस्लामिक देशों के समूह के अध्यक्ष के तौर पर देखे जाने की जो लड़ाई थी वो प्राइमरली शिया और सुन्नी डिवाइड को ही दिखाता है। आप देखेंगे जिस तरह से सऊदी अरेबिया में हम मक्का मदीना की बात करते हैं। यूएई एक तरफ हो गया। ईरान हो गया, टर्की और पाकिस्तान। और साथ में आसपास के जो इलाके हैं चाहे वो इजिप्ट हो या गल्फ और अरब स्टेट्स हैं उनमें कौन वो एक नाम हो जो कि मुस्लिम देशों का नेतृत्व करे। जी नागिन टर्की में अमेरिकी मूल के एक पत्रकार की हत्या कर दी गई थी और वह सऊदी अरब के कंसोलेट में हुआ था और तीन देश इसमें शामिल थे अमेरिका जिसके वो नेशनल थे टर्की जहां वो घटना हुई थी और सऊदी सऊदी अरेबिया जो जमाल खाशक जी से परेशान थे वो भी एग्जांपल
बताता है इन तीनों ने किस तरह से एक तरीके से कॉम्प्रोमाइज किया है क्योंकि उसकी खबर कभी नहीं निकल के आई कि कैसे एक कंसोलेट में जो है एक जर्नलिस्ट की निर्मम हत्या कर दी जाती है। उसमें भी इन लोगों ने एक दूसरे को बरी कर दिया था। और मोहम्मद बिन सलमान अभी से कुछ दिन पहले वाइट हाउस की यात्रा पर थे। उसकी तस्वीरें आपकी स्क्रीन पर नजर आ रही हैं। डॉनल्ड ट्रंप के साथ मिलकर। रिपोर्ट यह आ रही है जैसा कि नागिन ने अभी बताया कि अमेरिका ने यह जो हमला किया है ईरान पर वो सऊदी अरब के कहने पर किया है। क्योंकि बहुत सालों से कई वर्षों से जो है ईरान हुदीज और उसके जो अलग तंत्र हैं वो सऊदी अरब के लिए आंख की किरकिरी बने हुए थे। जी ना अगेन मैं कह रहा था सॉरी कि तेजावत साहब का इस पे इनपुट जरूर लीजिए ही हैज़ सो मच एंड द स्टोरीज कि वो आपको सुनके मजा आ जाएगा। तजावत साहब जी जी जी बिल्कुल जी बताएं तेजावत साहब आप कैसे देखते हैं
इस प्रकरण को? बहुत ही अगर संक्षेप में कहा जाए पंकज साहब तो क्या सऊदी अरेबिया की कोई राय होती है अमेरिका के सामने? बिल्कुल भी नहीं होती है। वो गिफ्ट लेकिन बहुत महंगे-महंगे देते हैं डोनाल्ड ट्रंप साहब को। राय नहीं देते हैं। गिफ्ट देते हैं। [हंसी] जी बिल्कुल। तो यही है कि अमेरिका को पूरी तरीके से अपने हिसाब से ही चलाना है और उसमें सऊदी अरेबिया की राय की कोई वैल्यू इसलिए नहीं है क्योंकि ना तो वो किसी तरीके का कोई प्रेशर ग्रुप या किसी तरीके की कोई ऐसी चीज है जो कि वहां अमेरिका में एक्टिव है जैसा कि इजराइल करता है तो निश्चित तौर पे यहां पूरी तरीके से ये प्लान अमेरिका का है और ये लॉन्ग टर्म प्लान है। लोग इसे बहुत ही अगर फरी तरह से देखते हैं और बाकी चीजों को अगर कनेक्ट नहीं कर पा रहे हैं। चाहे वह सीरिया से लेके यूक्रेन से लेके जो पूरी दुनिया में पिछले डिकेड से चल रहा है तो मुझे लगता है कि भ्रम में है क्योंकि आगे आने वाले समय में ये तय हो जाएगा कि ये अमेरिकी साम्राज्यवाद है जो अपने पंजे फैला रहा है। अगर ये साम्राज्यवाद नहीं
होता तो ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका का क्या रवैया होना चाहिए था। उन्होंने वहां पे वेनेजुएला में जो निकोलस माधुर को लेकर उन्होंने क्या किया है? कनेडा को क्या धमकी मिल रही है? शुद्ध रूप से ये हमें पता चलता है कि अमेरिका अपने पंजे फैलाना चाहता है और सबको अपने अधिकार में लाना चाहता है। पंकज साहब [संगीत] सब्सक्राइब टू वन इंडिया एंड नेवर मिस एन अपडेट। [संगीत]


