सेलेना गोमेज कि क्लोन थेरेपी: 2017 Kidney Transplant के बाद Replace कर दी गईं Selena ?

दोस्तों आजकल इंटरनेट पर एक बहुत ही अजीब और हैरान करने वाली बातें वायरल हो रही हैं। कहा जा रहा है कि सलीना गोमेज असल में जिंदा नहीं है। उन्हें रिप्लेस कर दिया गया है। उनका क्लोन बना दिया गया है और कुछ थ्योरीज तो इससे भी आगे निकल चुकी हैं। लेकिन सवाल यह है कि इन थ्योरीज में कितना सच है? क्या यह प्रैक्टिकली पॉसिबल है या फिर यह सिर्फ इंटरनेट की इमेजिनेशन है? आज हम हर थ्योरी को काम समझेंगे और आखिर में एक लॉजिकल ओपिनियन भी देंगे। सलीना गोमर्स मर चुकी है और उन्हें क्लोन से रिप्लेस कर दिया गया है। थ्योरी क्या कहती है? कुछ लोग दावा

करते हैं कि सलीना की 2017 में हुई किडनी ट्रांसप्लांट के [संगीत] दौरान मौत हो गई थी और उसके बाद उनकी जगह किसी लुकलाइक यानी क्लोन को लाया गया। प्रैक्टिकल रियलिटी क्या है? सबसे पहले फैक्ट सलीना को 2013 में ल्यूपस डायग्नोस हुआ था। 2017 में उन्होंने किडनी ट्रांसप्लांट करवाया। यह सब डॉक्यूमेंटेड मेडिकल रिकॉर्ड्स और पब्लिक स्टेट्समेंट्स के

साथ सामने आया था। अब प्रैक्टिकल सवाल [संगीत] क्या किसी सेलिब्रिटी को सीक्रेटली क्लोन करके रिप्लेस करना पॉसिबल है? मौजूदा साइंस के हिसाब से ह्यूमन क्लोनिंग, कमर्शियली या सीक्रेटली करना प्रैक्टिकली इंपॉसिबल है और अगर किसी ग्लोबल सेलिब्रिटी को रिप्लेस किया जाता तो इतने सालों [संगीत] में कोई सॉलिड प्रूफ सामने आता। यह थ्योरी इमोशनल इमेजिनेशन ज्यादा लगती है। [संगीत] प्रैक्टिकल एविडेंस नहीं। दूसरी थ्योरी है वह पहले जैसी नहीं दिखती इसलिए वह असली नहीं है। लोग कहते हैं कि

सलीना अब 16 साल की जैसी नहीं दिखती। उनकी पर्सनालिटी बदल गई है। अब समझते हैं प्रैक्टिकल रियलिटी। सलीना अब 30 प्लस की हैं। ल्यूपस एक ऑटोइ्यून डिसीज [संगीत] है जिससे वेट, फेस, शेप, स्किन और एनर्जी लेवल बदल सकते हैं। लॉन्ग टर्म मेडिकेशन भी अपीयरेंस बदल सकती हैं। कोई भी इंसान 15 साल बाद वैसा नहीं दिखता जैसे टीनएज में दिखता है। हेल्थ, स्ट्रगल पर्सनालिटी भी बदल सकती है। यह चेंज होना नेचुरल है। क्लोन थ्योरी नहीं। सोशल मीडिया पर एक यूजर ने लिखा, लेट्स बी अवेयर। ऑन द इंटरनेट। लोगों को सेंसेशनल स्टोरीज बेहद पसंद आती हैं। लाइक द फॉल्स

क्लेम दैट सेलीना [संगीत] गोमेज इज अ क्लोन। समवन पॉइंटेड आउट द रियलिटी। उसका अपीरियंस इसलिए बदला है क्योंकि वह बड़ी हो चुकी [संगीत] है। नॉट बिकॉज़ ऑफ़ एनी क्लोन। थोड़ा क्रिटिकली सोचिए। हर बार ऑनलाइन रूमर्स पर बिलीव करने की जरूरत नहीं है। अब तीसरी थ्योरी जुड़ी है एस्टीन फाइल से। कुछ कॉनस्परेसी थ्योरेसिस्ट ने उनका नाम एप्सियंस केस में जोड़ [संगीत] दिया और कहा कि वह बहुत कुछ जानती थी इसलिए उन्हें हटा दिया गया। लेकिन अब तक किसी वेरीिफाइड लीगल डॉक्यूमेंट या ऑफिशियल इन्वेस्टिगेशन में उनका नाम शामिल नहीं है।

इंटरनेट पर किसी का नाम जोड़ देना और प्रूफ होना दो अलग बातें हैं। यह थ्योरी पूरी तरह स्पेककुलेशन पर आधारित है। अब तीसरी थ्योरी है जस्टिन बीबर [संगीत] वाला सीक्रेट बेबी थ्योरी। यह थ्योरी कहती है कि सलीना और जस्टिन बीबर का एक सीक्रेट बच्चा था और उसे छुपाया गया। फिर इसमें एक और नाम जोड़ा गया कॉटनी कार्डशियन। कहा गया कि उनका बेटा एक्चुअली जस्टिन का है। प्रैक्टिकल रियलिटी क्या है? किसी भी ऑफिशियल सोर्स

डीएनए प्रूफ या लीगल रिकॉर्ड में ऐसा कुछ सामने नहीं आया। रिसेंबलेंस यानी शक्ल मिलना प्रूफ नहीं होता। इंटरनेट पर इमेजिनेशन बहुत ते दौड़ती है लेकिन एविडेंस नहीं। पांचवी थ्योरी कहती है जस्टिन बीबर का टैटू। लोगों ने जस्टिन के रिस्ट टैटू को सलीना की फोटो से कंपेयर किया और कहा कि वो मेमोरियल टैटू है। यानी जस्टिन ने उनकी याद में उसे हाथ पर बनवाया है। लेकिन टैटू इंस्पिरेशन कंफर्म नहीं है। फैंस अक्सर रैंडम सिमिलरिटीज ढूंढ लेते हैं। टैटू होना किसी की डेथ का प्रूफ नहीं होता। अब सबसे इंपॉर्टेंट सवाल ऐसी बातें फैलाई क्यों जाती है? सोशल मीडिया एल्गोरििदम सेंसेशनल कंटेंट

[संगीत] को प्रमोट करते हैं। सेलिब्रिटी लाइफ मिस्टीरियस लगती है। हेल्थ स्ट्रगल लोगों को शॉक करती हैं। इंटरनेट पर स्पेककुलेशन फैक्ट से तेज दौड़ता है। कॉनस्परेसी थ्योरी में थ्रिल [संगीत] होता है। लेकिन थ्रिल ट्रुथ नहीं होता। अगर लॉजिकल देखें सेलीना की हेल्थ इश्यूज डॉक्यूमेंटेड है। उनकी

पब्लिक अपीरेंस कंसिस्टेंट है। कोई वेरीिफाइड एविडेंस रिप्लेसमेंट क्लोनिंग या सीक्रेट डेथ का नहीं है। तो प्रैक्टिकल और रैशन नजरिए से देखें तो यह थ्योरीज [संगीत] इमेजिनेशन और स्पेकुलेशन पर आधारित है। सबसे खतरनाक चीज थ्योरी नहीं बल्कि [संगीत] बिना प्रूफ के उसे सच मान लेना है। इंटरनेट पर हर वायरल बात सच नहीं होती। किसी [संगीत] की हेल्थ स्ट्रगल्स को कॉनस्परेसी बना देना सही नहीं है। हमें फैक्ट और फिक्शन में

फर्क समझना चाहिए और सेलिब्रिटी भी इंसान होते हैं। उन्हें भी बीमारी, बदलाव और इमोशनल फसेस से गुजरना पड़ता है। अगर आपको यह वीडियो इनफेटिव लगा हो तो लाइक करें, शेयर करें और चैनल को सब्सक्राइब करना बिल्कुल ना भूलें।