यू.एस के किस बॉम्ब से हुई ईरान के खामेनेई की मौत?
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामिनेई की अमेरिका और इजराइल के जॉइंट ऑपरेशन में मौत हो गई है। यह पूरा ऑपरेशन लंबे समय से प्लान किया जा रहा था। 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान पर हमला किया जिसके बाद 28 फरवरी की देर रात खामिने की मौत की पुष्टि हुई। इसके इस पूरे मामले में प्लानिंग बहुत समय से क्योंकि हो रही थी तो अमेरिका के वॉर रूम में क्या सिचुएशन थी? पीट हेक्सेज जो उनके डिफेंस मिनिस्टर हैं। मार्को रोबियो जो उनके विदेश मंत्री हैं। उनसे लेकर जनरल केन और भी बहुत सारे नेता लगातार ट्रंप को इस मामले में ब्रीफिंग दे रहे थे। ब्रीफिंग के वक्त उन्हें
बताया गया था ये हाई रिस्क हाई रिवॉर्ड सिचुएशन है। यानी इस पूरे ऑपरेशन में रिस्क बहुत ज्यादा है। लेकिन अगर ऑपरेशन सक्सेसफुल रहा तो इसका अवार्ड भी उतना ही बड़ा होगा और इसका नतीजा अब हमें देखने को मिल ही गया है। खामिनई की मौत हो गई है। तो इस पूरे ऑपरेशन को कैसे अंजाम दिया गया? क्या कुछ रहा खामई को कैसे टारगेट किया गया? इस पे पूरी जानकारी हमारे साथ शेयर करने के लिए यहां मानस मौजूद है। मानस बताइए कैसे क्या ऑपरेशन को अंजाम दिया गया? देखिए पहली सबसे पहले हमारे पास दो तस्वीरें आ रही हैं। एक उस वो उस जगह की सेटेलाइट तस्वीरें बताई जा रही हैं। अमेरिका का ऐसा दावा है कि जहां पे सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामिनी थे। एक स्ट्राइक से पहले की तस्वीर है। एक स्ट्राइक के बाद की तस्वीर है।
एक नंबर बार-बार सामने आ रहा है कि 30 बम गिराए। तो पहली बात हमें ये समझना होगा कि इंटेंट बहुत क्लियर था, इरादा बहुत क्लियर था कि अगर हम 30 बम ड्रॉप कर रहे हैं तो हमें जो भी वहां पर टारगेट है तो जाहिर सी बात है किसी आप आम टारगेट के लिए किसी आम कमांडर के लिए आप 30 बम नहीं इस्तेमाल करेंगे। लाखों डॉलर के बम होते हैं और तमाम चीजें उसमें और भी चीजें मैटर करती हैं। तो छोड़ना नहीं था। जिंदा नहीं छोड़ना था। पहली चीज। दूसरी चीज है कि अगर आया अली खामिनी जैसा कोई हाई वैल्यू लीडर इतना बड़ा लीडर एक देश का अगर वो किसी बिल्डिंग में है किसी कॉम्प्लेक्स में रह रहा है तो उसकी सिक्योरिटी सिर्फ ऐसा नहीं है कि उनके आसपास चार हथियार बंद गार्ड्स होंगे या ऐसी चीजें होंगी तो ये पहली चीज कि इंटेंट बहुत क्लियर था कि छोड़ना नहीं है। दूसरी चीज कि उनकी लोकेशन कैसे पता लगी? यह बहुत इस पे सवाल हो रहा है। जब हसन नसरल्लाह की मौत हुई थी बेरूत में तो उस समय भी यह बातें सामने आई थी कि हसन नसरल्लाह का ही कोई बॉडीगार्ड या ऐसा कोई मोसाद के साथ मिला है। हम जानते
हैं कि मोसाद अपने बहुत बेहतरीन ऑपरेशंस के लिए जानी जाती है। इंटेलिजेंस के मामले में जिस तरीके से उसने काम किया है बीते कुछ सालों में। ईरान में जो अपने जासूस प्लांट किए हैं उसने। तो ये बहुत हद तक संभव है कि ईरान के जो सुप्रीम लीडर हैं उनकी पुख्ता जानकारी उनकी पुख्ता लोकेशन सीआईए और मोसाद का ये संभवत जॉइंट ऑपरेशन भी हो सकता है। हालांकि मोसाद पहले से ईरान में उन्होंने काफी कुछ प्लांट किया हुआ है। कई बार ऐसी चीजें सामने आती हैं। ईरान हमेशा समय-समय पे ढूंढता रहता है ऐसे लोगों को जो मोसाद के लिए मे बी काम कर रहे हो या जैसे उसके लिए हो सकता है पैसे की वजह से कोई हो सकता है कि रिजीम से कोई दुखी है किसी और कारण से मतलब कई कारण हो सकते हैं उसके कोई इजराइली ही है लेकिन वो ईरान में रह रहा है इस तरीके के भी ऑपरेशंस इजराइल करता रहा है राष्ट्रपति नासिर हुआ करते थे इजिप्ट के राष्ट्रपति नासिर की जो मालिश
करता था व्यक्ति वो मोसाद का एजेंट था तो इस लेवल का वो पेनिट्रेशन करते हैं दुश्मन के उस टेरिटरी में और इसके लिए जाना जाता है। तो दूसरी चीज यह है कि उनकी लोकेशन किसने दी? उनकी लोकेशन के बिना इतना पिन पॉइंट इतना एक्यूरेट हमला संभव नहीं था निकिता। जी बिल्कुल। तो इससे पहले भी जब ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की मौत हुई थी क़तर में तो उस वक्त भी इस तरीके की रिपोर्ट सामने आई थी कि आईआरजीसी के जो कमांडर है वही इजराइल से मिले हुए थे। उन्होंने ही मोसाद को ये इंटर लीक किया। तो बिल्कुल इस चीज की संभावना बनी हुई है कि मोसाद और सीआईए ने मिलकर ये ऑपरेशन प्लान किया हो और खामिनई की लोकेशन लीक करने में या खामिनई की लोकेशन हासिल करने में भी इन्हीं लोगों ने अपना काम किया होगा। तो अब हमें ये बताइए कि 30 बमों से जैसे आपने बताया रिपोर्ट सामने आ रही है कि हमला किया तो क्या अभी क्योंकि डिटेल्स नहीं आई है कि कैसे क्या बम
थे तो क्या उम्मीद की जा सकती है कितने ताकतवर ये बम रहे होंगे या कैसे क्या रहा होगा इन बम अभी तक जो तस्वीरें सामने आई है उससे यह समझ में आ रहा है कि अगर वह खामई वहां पर थे सुप्रीम रीडर अगर उस बिल्डिंग में थे मतलब यह तो अब कंफर्म ईरान ने भी कर दिया है कि उनकी मौत हो चुकी है तो जाहिर तौर पर वो इसी बिल्डिंग में थे। अगर वो वहां बिल्डिंग में भी रहे होंगे तो ऐसा नहीं है कि वो किसी अपर फ्लोर पे होंगे। मतलब ज्यादा चांसेस हैं कि वो जमीन के बेसमेंट के नीचे भी कई फीट नीचे स्टील की मोटी चादरों से इस तरह के लीडर्स को ऐसी सुरक्षा दी जाती है। मतलब ये बहुत आम है। ये कोई बहुत बड़ी बात नहीं है। तो वो बम से और ऐसी चीजों से बचाव करता है वो। कई बार ऐसे जो शेल्टर्स होते हैं जो बॉम्ब शेल्टर से या बंकर जो न्यूक्लियर हमले से भी बचा सकते हैं। बिल्कुल अयातुल्लाह खामिनई का जो शेल्टर था उसको भेजना था अगर अमेरिका को तो उनको जरूरत पड़ी होगी जीबीयू कैटेगरी के बंकर बस्टर बम की। बंकर बस्टर बम इसको इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये पहले जमीन में पेनिट्रेट करता है। जितना ज्यादा नीचे जाए ये फटता न
हीं है। यह पहले जैसे ही इंपैक्ट करेगा जमीन पे वो पहले जमीन में जितना अंदर जा सकता है जाएगा। अलग-अलग कैटेगरी होती है उसमें जितने आपको जितनी गहराई तक उसको पेनिट्रेट करना है या आपका दुश्मन जितने गहरे बंकर में छिपा है उस हिसाब से आप बम का चयन करते हैं। तो मुझे ऐसा लगता है कि इसमें बंकर बस्टर बम का इस्तेमाल किया गया। जब वो बंकर बस्टर बम फटता है अंदर तो उसमें से फ्रेगमेंट्स निकलते हैं। फ्रेगमेंट्स मतलब आप छोटे-छोटे गोले समझिए और वो एक गोला एक सूरज जलते सूरज के बराबर होता है। तो जब वो आपके शरीर पे टच होता है तो आपका शरीर लिटरली भाप बन जाता है और इस वजह से वहां पे मतलब शरीर के काफी खराब स्थिति हो जाती है। बहुत ज्यादा नुकसान बहुत होता है वहां पे आसपास लोगों को और ये कम एरिया में ज्यादा नुकसान करता है और कम एरिया में ज्यादा नुकसान करता है। शायद इसीलिए मुझे लगता है कि 30 बमों का इस्तेमाल किया गया क्योंकि ये इंटेंट जैसा हमने पहले बात की कि इंटेंट बहुत क्लियर क्लियर था कि अगर एक बार सुप्रीम लीडर अगर बच गए तो दोबारा औ
र ईरान ने इसमें कोई शक नहीं कि बहुत डेडली अटैक किया काउंटर उन पे बहुत ज्यादा मतलब सऊदी बहरीन क़तर हर जगह उसने जो हमले किए तो अगर सुप्रीम लीडर उस हमले में बच जाते तो संभव है कि ये हमला और भी खतरनाक होता। तो इसलिए मुझे लगता है कि इसमें बंकर बस्टर जीबीयू क्लास के बंकर बस्टर बम का इस्तेमाल किया गया है। जी बिल्कुल मानस तो फिलहाल हालांकि इसका कंफर्मेशन नहीं आया है कि यह बम जीबीयू बम ही थे या फिर कोई और थे। लेकिन यह तय है जैसा कि मानस ने बताया कि इंटेंट बहुत क्लियर था। अमेरिका ने पहले से हाई रिस्क हाई अवार्ड सिचुएशन डिक्लेअ कर दिया था। उनका मकसद ही था खामिनई को टारगेट करना। कई और रिपोर्ट्स ऐसी पहले लगातार आ रही थी कि अमेरिका खामिनई को मारने की प्लानिंग कर रहा है या इजराइल और अमेरिका मिलकर इस तरीके का कोई ऑपरेशन प्लान कर रहे हैं। हालांकि अब बॉम्ब से रिलेटेड बाकी डिटेल्स और
ऑपरेशन को कैसे अंजाम दिया गया इसकी जानकारी अभी आनी बाकी है। इस ऑपरेशन से जुड़ी बाकी डिटेल्स भी हम आप तक पहुंचाते रहेंगे। मेरा नाम है निकिता। मेरे साथ है मानस। कैमरे के पीछे है विजय। देखते रहिए तिल एंड टॉप।


