सभी बीमारियों के लिए वैक्सीन? स्टैनफोर्ड रिसर्च ने मेडिकल वर्ल्ड को चौंकाया, खांसी, सर्दी, फ्लू सब..

मेडिकल साइंस की दुनिया में एक ऐसी क्रांति दस्तक दे रही है जो पिछले 200 सालों से चली आ रही वैक्सीन बनाने की पद्धति को पूरी तरह बदल सकती है। अमेरिका की प्रतिष्ठित स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी यूनिवर्सल नेसल स्प्रे वैक्सीन विकसित की है जो सिर्फ फ्लू या सर्दी खांसी ही नहीं बल्कि खतरनाक बैक्टीरिया से होने वाले फेफड़ों के इंफेक्शन और एलर्जी तक से सुरक्षा देने की क्षमता रखती है। अब तक वैक्सीन एक खास बीमारी को निशाना बनाकर बनाई जाती रही है। 18वीं सदी में एडवर्ड जेनर द्वारा शुरू की गई पद्धति में शरीर को किसी विशेष वायरस का कमजोर

या निष्क्रिय रूप दिखाकर उससे लड़ना सिखाया जाता है। जैसे खसरे का टीका सिर्फ खसरे से बचाता है और कोविड वैक्सीन सिर्फ सारस कॉव टू से। लेकिन स्टैनफोर्ड के साइंटिस्ट ने इस सोच को पलट दिया है। यह नई वैक्सीन किसी एक वायरस की पहचान नहीं कराती बल्कि शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को हर संभावित हमले के लिए पहले से तैयार कर देती है। अब आपको बताएं कि यह मैजिक स्प्रे काम कैसे करता है? तो यह वैक्सीन नाक के जरिए स्प्रे के रूप में दी जाती है। यह फेफड़ों में मौजूद प्रतिरक्षा कोशिकाओं मैक्रोफेज को एबर अलर्ट मोड़ पर डाल देती है। यानी जैसे ही कोई वायरस या बैक्टीरिया शरीर में एंटर करने की कोशिश करता है, यह कोशिकाएं तुरंत हमला बोल

देती हैं। चूहों पर किए गए एक्सपेरिमेंट्स में वायरस की संख्या में 100 से000 गुना तक की कमी देखी गई। रिसर्च टीम का दावा है कि स्प्रेन ना केवल कोविड फ्लू और सामान्य जुकाम के वायरस पर असरदार है बल्कि स्टेफिलोकोकस ओरियस और एसिनेटोबक्टर बाउमनी जैसे खतरनाक बैक्टीरिया से भी बचाव कर सकता है। साथ ही यह धूल मिट्टी से होने वाली एलर्जिक अस्थमा की समस्या को कम करने में भी मददगार पाया गया है। वर्तमान में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन यानी कि WHO के डायरेक्शंस के अनुसार गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, छोटे बच्चों और स्वास्थ्य कर्मियों को हर साल फ्लू शॉट लेने की सलाह दी जाती है। लेकिन यह नया यूनिवर्सल स्प्रे भविष्य में मौजूदा टीकों का ऑप्शन नहीं बल्कि उनका पूरक यानी कॉम्प्लीमेंट

बन सकता है। हालांकि यह रिसर्च जनरल साइंस में प्रकाशित हुई है और विशेषज्ञ इसे बड़ा कदम मान रहे हैं। लेकिन अभी इंसानों पर क्लीनिकल ट्रायल इसका बाकी है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रतिरक्षा प्रणाली को लगातार हाई अलर्ट पर रखना सुरक्षित होगा? कहीं ऐसा तो नहीं कि शरीर अपनी ही कोशिकाओं पर हमला करने लगे जिससे ऑटोइ्यून बीमारियों का खतरा बढ़ जाए। 2020 में कोविड महामारी के शुरुआती दिनों को याद कीजिए जब वैक्सीन आने में महीनों लग गए थे। ऐसे में यदि यह यूनिवर्सल स्प्रे उपलब्ध होता तो शुरुआती संक्रमण और मौतों को काफी हद तक कम किया जा सकता था। विशेषज्ञ मानते हैं कि सर्दियों की शुरुआत में एक सीजनल स्प्रे के रूप में इसका इस्तेमाल लाखों लोगों को अस्थाई लेकिन व्यापक सुरक्षा दे सकता है। फिलहाल यह तकनीक प्रयोगात्मक चरण में है। लेकिन अगर इंसानी परीक्षण भी चूओ जैसे सफल रहे तो संभव है कि आने वाले समय में साल में एक बार लिया गया एक साधारण नेल स्प्रे करोड़ों लोगों

को खांसी, जुकाम, फ्लू और फेफड़ों के गंभीर इंफेक्शन से बचा सके। क्या यह वैक्सीन विज्ञान की अगली बड़ी छलांग होगी? जवाब छिपाए आने वाले क्लीनिकल ट्रायल्स में। फिलहाल इस वैक्सीन को लेकर आप क्या सोचते हैं? कमेंट्स में हमें अपनी राय जरूर दें। नमस्कार, मैं हूं मानक गुप्ता। अगर आपको हमारा यह वीडियो पसंद आया हो तो इसे लाइक और शेयर जरूर करें और हां हमें सब्सक्राइब और फॉलो करना ना भूलें ताकि आप देश और दुनिया की कोई खबर मिस ना करें। तो जुड़े रहिए हमारे साथ और देखते रहिए न्यूज़