ईरान में किसने की सुप्रीम नेता से गद्दारी? पूरी पड़ताल !भारत के शिया मुसलमानों में शोक…
कौन है ईरान का घर का भेदी जिसकी वजह से मारे गए सुप्रीम लीडर खामिनी किसने की खामिनी के साथ गद्दारी एक बात तय हो गई है दोस्तों जिस पॉइंट प्रसिशन के साथ उस क्षेत्र को निशाना बनाया गया जहां खामिनी बैठकर बैठक कर रहे थे अपने बड़े-बड़े नेताओं के साथ इससे तय हो जाता है कि जमीन पर खामिनी के करीब कोई ऐसा शख्स था जिसने अमेरिका और इसराइल को बताया कि खामेनी वहां मौजूद थे और उसके बाद यह हमला किया गया और बात यहां नहीं रुकती। इस खबर को देखिए। इस खबर के मुताबिक सऊदी के शासक मोहम्मद बिन
सलमान लगातार ट्रंप से फोन पर बात कर रहे थे और उन्हें बता रहे थे। उनसे कह रहे थे कि ईरान पर जल्द हमला किया जाए। और यहां पर साफ तौर पर एक दोहरा मापदंड दिखाई देता है क्योंकि रियाद एक तरफ ये कहता है कि ईरान पर हमला ना किया जाए और दूसरी तरफ इस खबर के मुताबिक मोहम्मद बिन सलमान ट्रंप से लगातार कह रहे थे ईरान पर हमला करने के लिए ये साजिश बहुत गहरी है। इस कार्यक्रम के अंत तक आपको रहने की जरूरत है क्योंकि आज मैं आपके सामने एक-एक करके तमाम परतें उधेडूंगा। तमाम तार आपके सामने होंगी। मगर मैं सबसे पहले आपको बता दूं कि यहां भारत में शिया मुसलमानों में सुप्रीम लीडर खामिनी की मौत को लेकर जबरदस्त शोक है। जैसे कि आप देख सकते हैं यहां पर लखनऊ का नजारा जहां लोग सड़कों पर उतर रहे हैं
और प्रदर्शन कर रहे हैं। मैं एक बात स्पष्ट कर दूं इसे कई लोग हिंदू मुस्लिम करना चाहेंगे। मगर आपको समझना पड़ेगा कि सुप्रीम लीडर का लगभग वही दर्जा है जो ईसाइयों के लिए पोप का दर्जा होता है। इसलिए लोग शोकाकुल हैं। इसलिए जैसा कि आप देख सकते हैं लखनऊ में लोग जो हैं वो सड़कों पर उतर रहे हैं। और बात सिर्फ लखनऊ की नहीं है। जैसे कि आप देख सकते हैं कश्मीर के अंदर भी मातम मनाया जा रहा है। उनकी शहादत पर लोग यहां शोकाकुल हैं, गमजदा हैं। मैं आपको बतलाऊंगा भारत से किस तरह की आवाजें उठ रही हैं। मगर बहुत जरूरी हो जाता है दोस्तों ये जानना कि आखिर कौन था वो घर का भेदी। उसके लिए मैं आपका ध्यान खींचना चाहूंगा रॉयर्स की एक खबर की तरफ और साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा। इन दोनों से स्पष्ट हो जाता है कि कहीं ना कहीं कहीं ना कहीं इन हमलों के पीछे कोई घर का भेदी था। किसी ने अमेरिका और इसराइल को जानकारी दी जिसकी वजह से सुप्रीम लीडर खामिनी मारे गए। गौर फरमाएं रइर्स की इस खबर। हमला ऐसे टाइम किया गया कि खामिनी मीटिंग के बीच में ही निशाने पर आ जाए। दो अमकी सूत्रों के मुताबिक अमेरिका और इसराइल ने अपना पहला हमला ठीक उसी समय किया जब खामिनी
अपने शीर्ष सलाहकारों के साथ बैठक कर रहे थे। इसराइली अधिकारियों का दावा है कि इस हमले में खामेनी के साथ पूर्व नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सचिव अली शामखानी और आईआरजीसी कमांडर मोहम्मद पाकपुर भी मारे गए। दो ईरानी सूत्रों ने भी पुष्टि की है कि जब बम गिरने शुरू हुए तब खामेनी शामखानी और सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लरजानी के साथ बैठे हुए थे। इसका मतलब साफ है किसी को बिल्कुल सटीक जानकारी थी कि सुप्रीम लीडर कहां होंगे, किसके साथ होंगे और हमला कब करना है? ऐसी जानकारी सिर्फ सेटेलाइट तस्वीरों से नहीं मिलती है। इसके लिए अंदर से कोई सूचना देने वाला होना चाहिए? यही सवाल किया जा रहा है कि क्या खामिनी के लोकेशन के लिए किसी ने टिप ऑफ दिया? क्या किसी ने गद्दारी की? इन तमाम सवालात के जवाब मैं आपके सामने लेकर आया हूं दोस्तों क्योंकि यह अपने आप में इस पूरे मामले को निहायत ही खतरनाक और दिलचस्प बना देता है। सबसे पहले मैं आपका ध्यान खींचना चाहूंगा कि इस मुद्दे पर आधिकारिक रिपोर्ट्स क्या कहती हैं? गौर फरमाइए। अमेरिकी और इसरलीय सूत्रों के मुताबिक हमला उस वक्त टाइम किया गया जब इंटेलिजेंस से पता चला कि खामिनी अपने टॉप सुरक्षा सलाहकारों के
साथ मीटिंग में थे। जैसे ही मीटिंग का समय कंफर्म हुआ, ऑपरेशन को आगे बढ़ाया गया और पहले ही वेव में उनके सुरक्षित ठिकाने पर हमला कर दिया गया। बयानबाजी में यह साफ हो गया कि उन्हें हमारी उन्नत ट्रैफिक और इंटेलिजेंस से बचने का मौका नहीं मिला। जिससे लगता है कि सिग्नल इंटेलिजेंस, सेटेलाइट, ड्रोन और पहले से की गई नेटवर्क घुसपैठ का इस्तेमाल हुआ। किसी भी बड़ी मीडिया रिपोर्ट ने सीधे यह नहीं कहा कि उनके सबसे करीबी सर्कल में से किसी ने धोखा दिया है। मगर मैं आपका ध्यान दो चीजों की तरफ खींचना चाहूंगा। सबसे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डॉन्ड ट्रंप का बयान डॉनल्ड ट्रंप ने बार-बार कहा है कि हमारी इंटेलिजेंस से खामिनी बच नहीं पाए। और इसके चंद मिनटों बाद पहला हमला होता है खामिनी जहां पर मीटिंग कर रहे होते हैं। गौर फरमाया जाए ट्रंप ने क्या कहा और जैसे मैंने बताया पहला हमला कहीं और नहीं खामिनी जहां पर थे वहां हमला किया गया। क्यों? क्योंकि अगर कहीं और हमला हो जाता तो खामिनी सतर्क हो जाते और उन्हें अंडरग्राउंड ले जाया जाता। लिहाजा सबसे पहला हमला खामिनी पर किया गया ताकि उन्हें बचने का रास्ता नहीं मिले। आगे गौर फरमाएं और अब मैं आपके सामने अलग-अलग थ्योरीज पेश कर रहा हूं। सबसे पहली
थ्योरी लंबे समय की घुसपैठ हाईटेक जासूसी। माना जा रहा है कि सालों से इसराइल यानी मोसाद और अन्य एजेंसियों ने ईरान के सिस्टम में गहरी पैठ बनाई हुई है। आईआरजीसी, सुरक्षा मंत्रालय और न्यूक्लियर नेटवर्क में भी पहले भी सेंध लग चुकी है। इसलिए संभव है कि यह हमला अचानक की गई गद्दारी नहीं बल्कि सालों की तैयारी और निगरानी का नतीजा हो। दूसरा व्यापक नेतृत्व ढांचे के अंदर से लीक। जैसे मैंने कहा घर का भेदी। गौर फरमाइए। कुछ एनालिस्ट का मानना है कि आईआरजीसी या सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के किसी स्तर से मीटिंग का सटीक समय लीक हुआ हो सकता है। क्योंकि रिपोर्ट्स कहती है कि मीटिंग का समय बदला गया था और उसी के अनुसार हमला एडजस्ट किया गया। इससे शक होता है कि किसी के पास लगभग रियल टाइम जानकारी थी। गौर फरमाया आपने? मीटिंग को मुल्तवी किया गया, स्थगित किया गया। बावजूद उसके मिसाइल्स वहीं आकर लगती हैं जब मीटिंग होती है और बावजूद इसके कि मीटिंग को स्थगित कर दिया गया था। इसका मतलब अंदर से कोई ऐसा शख्स था जो जानकारी लीक कर रहा था। आगे आपकी स्क्रीन्स पर बेहद करीबी सर्कल से गद्दारी। सोशल मीडिया में चर्चा है कि उनके निजी सुरक्षा घेरे या घरेलू सर्कल में से किसी ने जानकारी दी। यह थ्योरी इस वजह से भी चल रही है कि केवल बहुत
कम लोगों को उनकी सटीक लोकेशन का पता था। लेकिन किसी भी बड़े अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इस बात का जिक्र नहीं किया है। इसके अलावा हो सकता है कि इसमें कोई इंसानी लीक ना हो। यानी कि ये पूरी तरह से तकनीकी जानकारी के आधार पर हुआ और इस बारे में हमें क्या मालूम है? गौर फरमाइए। पूरी तरह तकनीकी निगरानी बिना किसी इंसानी लीक के। एक नजरिया यह भी है कि आधुनिक सिग्नल इंटेलिजेंस मेटा डेडा ट्रैफिकिंग काफिले का मूवमेंट एयर डिफेंस पैटर्न और कम्युनिकेशंस एनालिसिस से यह पता लगाया गया हो तो बड़ा सवाल क्या अंदर से किसी ने हामिनी को बेच दिया उनकी सुरक्षा को बेच दिया यह सवाल बहुत अहम है। संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। ईरान के इतिहास में सिस्टम के अंदर घुसपैठ पहले भी हुई है। लेकिन अभी तक कोई ऐसा ठोस सत्यापित सबूत नहीं है कि खामिनी के सबसे करीबी सर्कल के किसी खास व्यक्ति ने उन्हें धोखा दिया है। और आगे बढ़ने से पहले एक जरूरी संदेश मेरे कार्यक्रमों के लिए आप नोटिफिकेशन का इंतजार मत कीजिए। मेरे चैनल में जाइए और खुद जाकर कार्यक्रम देखिए और रहिए अपडेटेड। मगर अब इस खबर का एक दूसरा पहलू है। दूसरा पहलू है कि अमेरिकन और इजरयली इंटेलिजेंस इस बारे में कैसे
काम कर रहे थे? क्योंकि अमेरिकन और इजरयली इंटेलिजेंस यानी सीआईए और मोसाद आज से काम नहीं कर रहे थे। खामिनी की लोकेशन को लेकर लगातार ट्रैकिंग की जा रही थी। याद कीजिएगा जब 12 दिन की जंग चली थी तब खामिनी पर एक नहीं दो नहीं तीन-तीन बार हमले किए गए थे। तीन बार हमले किए गए थे। उसके बाद लगातार इस तरह की खबरें आती रही कि वो बंकर के अंदर छुप गए। यानी कि इन तमाम खबरों से इसराइली और अमेरिकन इंटेलिजेंस को पता चल रहा था कि उनका मूवमेंट क्या था और उसके आधार पर यह हमला किया गया। गौर फरमाइए। नंबर एक सालों के पैटर्न ऑफ लाइफ ट्रैकिंग। अमेरिकी और इसराइली इंटेलिजेंस लंबे समय से खामिनी की मूवमेंट, उनकी सुरक्षा आदतों और मीटिंग स्ेड्यूल का अध्ययन कर रही थी। सैटेलाइट, ड्रोन, अन्य इंटेलिजेंस सर्ंस, रिकनासेंस सिस्टम और मानव स्रोतों से जानकारी जुटाई जाती रही। माना जाता है कि एजेंसीज को पता था कि वे किन कंपाउंड्स में रहते या मीटिंग करते थे। दूसरा एक दुर्लभ नेतृत्व बैठक की जानकारी और यह कैसे हुआ? रिपोर्ट्स कहती है कि हमला खासतौर से उस मीटिंग को निशाना बनाने के लिए टाइम किया गया जिसमें खामिनी अपने अंदरूनी सुरक्षा सर्कल के साथ बैठे हुए थे। शुरू में माना जाता रहा कि मीटिंग शनिवार शाम को होगी लेकिन इंटेलिजेंस ने पकड़ लिया कि उसे शनिवार सुबह शिफ्ट कर लिया गया। उसी के अनुसार स्ट्राइक का
टाइम आगे कर दिया गया। और सबसे बड़ी बात गौर फरमाएं आखिरी पल की पुष्टि और यही जीता जागता सबूत है कि खामी के आसपास कोई ऐसा शख्स था जो लगातार इसराइल को बता रहा था। आपकी स्क्रीन्स पर सूत्रों के मुताबिक उनकी मौजूदगी की पुष्टि होते ही ऑपरेशन शुरू हुआ। इसका मतलब हो सकता है कि किसी कम्युनिकेशन इंटरसेप्ट से जानकारी मिली। हाई रेजोल्यूशन इमेजरी से पुष्टि हुई या किसी मानव स्रोत ने आखिरी पल की सूचना दी और इसके अलावा जैसे कि आप इस तस्वीर में देख सकते हैं ये वो कंपाउंड है दोस्तों जिसे निशाना बनाया गया। इसमें बाकायदा दो जगहों पर हमला हुआ है। सबसे बड़ी बात बाई तरफ जो आप लोकेशन देख रहे हैं, यह वही जगह है जहां खामेनी बैठक कर रहे थे। यानी कि इजरली और अमेरिकन अटैकर्स को पता था कि खामिनी किस कमरे में बैठक कर रहे हैं। आपके स्क्रीन्स पर। तेहरान में उनके मुख्य सुरक्षित कंपाउंड शुरुआती टारगेट्स में से एक था। रिपोर्ट्स में कहा गया लगभग 30 प्रसेशन बॉम्ब कुछ ही सेकंड में गिराए गए। बताया गया कि वे भूमिगत थे लेकिन सबसे गहरे बंकर में नहीं थे। इसलिए शुरुआती हमले में ही उन्हें निशाना बनाया जा सका। अब ये जानना भी बहुत जरूरी हो जाता है दोस्तों कि अमेरिकन और इजरयली इंटेलिजेंस ने आखिर किस तरह की इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया और ऐसे में हमारे सामने ये तीन किस्म की इंटेलिजेंस आती है। पहले है एसआई जी आई एन टी व्हिच इज सिग्नल इंटेलिजेंस। दूसरा है
आईएमआई एन टी जो है इमेजरी इंटेलिजेंस और तीसरा है एच यू एम आई एन टी यानी मानव इंटेलिजेंस यानी ह्यूमन इंटेलिजेंस। और इस बारे में हमें क्या पता है आपकी स्क्रीन्स पर। सबसे पहले सिगेंट यानी सिग्नल इंटेलिजेंस, एंक्रिप्टेड फोन, रेडियो या नेटवर्क ट्रैफिक मॉनिटर करना। दूसरा इमेजरी इंटेलिजेंस यानी आईंट। सैटेलाइट और ड्रोन से काफिलों की मूवमेंट देखना। और तीसरा ह्यूमिंट यानी ह्यूमन इंटेलिजेंस। सुरक्षा या राजनीतिक सर्कल में पहले से मौजूद संपर्क। मगर एक बार फिर अब भी वो क्या है जो छुपा हुआ है? अब भी वो क्या है जो रहस्यों से घिरा हुआ है? अब भी वो कौन है जिसने गद्दारी की और आगे भी करता रहेगा। क्योंकि आप जानते हैं दोस्तों आगे उनकी जगह कोई और शख्स सुप्रीम लीडर बनने वाला है। ईरान या तो पूरी तरह से झुक जाए अमेरिका के सामने तो अलग बात है। मगर अगर ईरान अब भी लड़ता रहेगा जो कि दिख रहा है कि लड़ने वाला है तो जाहिर सी बात है ये गद्दार एक बार फिर अमेरिका और इसराइल के काम आने वाला है। बहरहाल आप देख सकते हैं इस वक्त ईरान में किस तरह का हुजूम है। किस तरह से लोग सड़कों पर उतरे हुए हैं। मैं चाहूंगा आप इस लम्हे को देखें पूरे स्क्रीन्स पर। और जैसे मैंने बताया यहां भारत में भी लोग शोकाकुल हैं। लोग सड़कों पर उतरे और यहां पर भी गद्दारी की बात की जा रही है। सुनिए लखनऊ
में लोग क्या कह रहे हैं। हम अपने खामिने रहबर को जिनको धोखे से मारा गया। जिनकी नस्लों में गद्दारी है। जिनकी नस्लों नस्लों में धोखेबाजी है। उन्होंने धोखे से मारा मेरे खाम को। खाम मेरा शेर था शेर। कल भी शेर था। आज भी शेर है। कयामत तक शेर रहेगा। एक खाम नहीं मरेगा। हजार खामने ऊपर। हम मांओं ने बेटे जने हैं कुर्बानियां देने के लिए। और इजराइल को क्या कहेंगे? लानत है अमेरिका और इजराई इसराइल पर लानत बेशुमार। ये यज़ीदी हैं। ये गद्दार हैं। ये धोखेबाज हैं। इनसे कभी वफा नहीं हो सकती है। इनकी नस्लें गद्दार हैं। धोखेबाज हैं। तो अंत में दोस्तों निष्कर्ष ये निकलता है। यानी इसका कंक्लूजन ये निकलता है जिसे हमें समझने की जरूरत है। गौर फरमाएं। नंबर एक सालों की निगरानी से उनकी दिनचर्या समझी गई। नंबर दो मीटिंग के समय में बदलाव को रियल टाइम में पकड़ा गया और नंबर तीन उनकी मौजूदगी की पुष्टि होते ही हमला तेजी से किया गया। अंदर से किसी ने मदद की। ह्यूमन इंटेलिजेंस, सिग्नल इंटेलिजेंस, सेटेलाइट इमेजरी ये तमाम फैक्टर्स
अलहदगी में आइसोलेशन में काम नहीं करते हैं। जब ये एक साथ मिल जाए तब वार जो है वो अचूक होता है। और यही हुआ सुप्रीम लीडर खामेनी के साथ। और इस मंच पर इस खबर से जुड़ी तमाम जानकारियां मैं आप तक पहुंचाता रहूंगा। यह मेरा वादा है। अभिसार शर्मा को दीजिए इजाजत। नमस्कार।


