ईरान ने इज़राइल पर हमला किया: अली लारिजानी कौन है? खामेनेई की मौत से क्या संबंध है? अली लारिजानी | खामेनेई

ईरान में 36 साल के एक युग का अंत हो चुका है। आया अली खामने की मौत के बाद अब तेहरान की गलियों से लेकर वाशिंगटन के गलियारों तक सिर्फ एक ही सवाल गूंज रहा है। ईरान की कमान अब किसके हाथ में होगी? क्या वो अली लारीजानी है जिन्हें खामन ने खुद अपना ट्रबल शूटर चुना था? आज हम बात करेंगे उस शख्स की जिसे ईरान का डीफ्टो यानी वास्तविक नेता माना जा रहा है। अली लारीजानी। 67 साल के लारीजानी कोई साधारण नेता नहीं है। वो रिवोल्यूशनरी गार्ड्स यानी आईआरजीसी के कमांडर रह चुके हैं। 12 साल तक ईरान की संसद के स्पीकर रहे हैं

और ईरान के सबसे बड़े परमाणु वार्ताकार भी रहे हैं। लेकिन लारी जानी और खामनई की मौत का कनेक्शन क्या है? खबर है कि अपनी मौत से कुछ समय पहले ही घामनई ने ईरान के अस्तित्व को बचाए रखने के लिए एक गुप्त रणनीति बनाई थी और इस रणनीति के केंद्र में थे अली लारीजानी। जब ईरान आंतरिक विद्रोह और बाहरी हमलों से जूझ रहा था तब खामन ने लारीजानी को सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल का सचिव नियुक्त किया। उन्हें जिम्मेदारी दी गई कि अगर शीर्ष नेतृत्व पर हमला होता है तो देश को बिखरने से कैसे बचाया जाए। आज जब खामना ही नहीं रहे तो लारी जानी ने ही सामने आकर दुनिया को बताया कि ईरान में सत्ता का हस्तांतरण कैसे होगा। उन्होंने साफ कर दिया है कि एक अंतरिम नेतृत्व परिषद बनाई जाएगी। हालांकि तकनीकी रूप से लारीजानी खुद सुप्रीम लीडर नहीं बन सकते क्योंकि वह एक धार्मिक मौलवी नहीं है। लेकिन पर्दे के पीछे से वही सरकार और सुरक्षा तंत्र को

कंट्रोल करेंगे। ऐसी खबरें हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पुतिन के करीबी माने जाने वाले लारीजानी ही वह शख्स हैं जो रूस और चीन के साथ ईरान के रिश्तों को नई ऊंचाई पर ले गए। उन्होंने ही चीन के साथ 25 साल का रणनीतिक समझौता मास्टरमाइंड किया था। देश में 40 दिन का शोक घोषित किया गया है। ऐसे में अली लारीजानी वो ढाल बनकर उभरे हैं जो ईरान को पूरी तरह टूटने से बचा रहे हैं। अली लारीजानी के निजी जीवन की अगर बात करें तो अली लारीजानी का जन्म इराक के नजफ में हुआ था। लेकिन बाद में उनका पूरा परिवार ईरान आ गया। उन्होंने तेहरान विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र यानी फिलॉसफी में पीएचडी भी की है। अब सवाल है क्या लारीजानी इजराइल और अमेरिका को वो करारा जवाब दे पाएंगे जिसका उन्होंने वादा किया है या फिर ईरान में सत्ता के लिए कोई नया खूनी संघर्ष शुरू होगा? आपको क्या लगता है? खामनाई का मारा जाना सामरिक दृष्टिकोण से भारत जैसे देश के संदर्भ में कितना महत्वपूर्ण है? देखिए तीन चीजें हैं जो बहुत महत्वपूर्ण है भारत के लिए।

सबसे पहली बात तो यह है कि ईरान के अंदर जो अभी सिचुएशन है उसको काफी महत्वपूर्ण है भारत के लिए क्योंकि भारत और ईरान के काफी अच्छे संबंध रहे हैं। भारत में भी काफी सारे ऐसे लोग हैं जो ईरान की तरफ देखते हैं कल्चरली। पीपल टू पीपल कांटेक्ट्स हैं ईरान से भारत के। काफी सारे भारत के लोग ईरान पढ़ने के लिए या फिर और भी बहुत सारी पिल्गिमेज के लिए जाते हैं। तो हम जहां तक देखते हैं इन अंदरूनी तौर पे जो ईरान की सिचुएशन है वो अभी काफी फ्रजाइल है। काफी फ्लूइड है। उसको देखते हुए भारत के लिए ये एक महत्वपूर्ण जो है वो कंसर्न है। बहुत इंपॉर्टेंट बात है। ईरान में जो इंटरनल सिक्योरिटी है उसका फिर रीजनल भी रेमिफिकेशन होगी। क्योंकि ईरान एक ऐसा देश है जिसके जो नेबर नेबरिंग कंट्रीज हैं, सीरिया है, इराक है, टर्की है,

अफगानिस्तान है। फिर खाड़ी के सारे देश हैं। उन सब में से भी भारत के बहुत अच्छे संबंध हैं। खास करके खाड़ी के देश को अगर हम देखें तो वहां तकरीबन 90 लाख भारतीय नागरिक रहते हैं, काम करते हैं। तो उनकी सिक्योरिटी की, उनकी सेफ्टी की बहुत बड़ी चिंता भारत के अंदर रहेगी। क्योंकि ईरान ने जो रिटालिएटरी स्ट्राइक किए हैं उसमें कुछ सऊदी अरेबिया, यूएई, कुवैत, बहरेन इन सब जगहों पे भी हुए हैं रिटालिएटरी

स्ट्राइक। सो उसकी भी एक चिंता रहेगी भारत को। तीसरी बात जो है वो ये कि जो भारत का क्रूड ऑयल और एलएनजी जो इंपोर्ट होता है वो भी खाड़ी के देश से काफी हद तक आता है 50% तक 40 टू 50% तक। तो उसमें अगर कोई डिप डिसरप्शन होता है तो उस वो भी भारत के लिए एक बहुत बड़ी चिंता की का मुद्दा हो सकता है आगे चलकर।

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