अली खामेनेई को मारने के लिए ट्रंप, नेतन्याहू की गिरफ्तारी, सीआईए ने इजरायल के साथ मिलकर कैसे प्लान किया?

वाओ अमेरिका ने ईरान के सुप्रीम लीडर आयातुल्ला अली खामनई पर हमले के लिए लंबी प्लानिंग की थी। कई महीनों से अमेरिका की इंटेलिजेंस एजेंसी, सीआईए और इजराइल की सुरक्षा एजेंसियां उन पर नजर बनाए हुई थी। उनके रूल्स के पैटर्न को नोटिस किया गया जिससे कि खामिनी कहां रहते थे, किससे मिलते थे, कैसे बातचीत करते थे और हमले की धमकी मिलने पर वो कहां जा सकते थे। खामने की मौत को लेकर सीआईए ने कैसे प्लानिंग की? टीम में कौन-कौन शामिल था? सब कुछ सिलसिलेवार तरीके से जानते हैं। अमेरिकी मीडिया संस्थान

सीएनएन ने सीआईए की पूरी प्लानिंग पर एक डिटेल रिपोर्ट पब्लिश की है। इसमें उन्होंने उन पांच लोगों से बात की है जो खामई की मौत के प्लान वाली टीम में शामिल थे। इस रिपोर्ट के मुताबिक इजराइली और अमेरिकी इंटेलिजेंस एजेंसियों ने ईरान के उन सीनियर पॉलिटिकल और मिलिट्री लीडर्स पर भी नजर बनाई थी जो आमतौर पर खामनई के साथ एक ही जगह इकट्ठा नहीं होते थे। 28 फरवरी को एक ऐसा मौका सामने आया जब खामिनेई समेत कई टॉप ऑफिसर तेहरान के एक कंपाउंड में अलग-अलग जगहों पर बैठक करने वाले थे। इस कंपाउंड में सुप्रीम लीडर, राष्ट्रपति और राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र के दफ्तर भी हैं। इस रिपोर्ट में एक इजराइली सोर्स को कोट करते हुए यह लिखा गया कि बहुत ज्यादा सावधान रहने वाले सुप्रीम लीडर दिन के समय खुद को ज्यादा सुरक्षित महसूस करते थे। इजराइली और अमेरिकी अधिकारियों ने इसी का फायदा उठाया और रात के अंधेरे में होने वाले हमले के प्लान को

बदलकर दिन में कर दिया। 28 फरवरी की सुबह करीब 6:00 बजे इजरायली लड़ाकू विमानों ने यूएस के साथ मिलकर कंपाउंड में फायरिंग के साथ हमले की शुरुआत की। कंपाउंड में अलग-अलग नेताओं वाली तीन जगहों पर एक साथ हमला किया गया। न्यूज़ एजेंसी एपी को इजरायली सैन्य अधिकारियों ने बताया कि हमले तीन अलग-अलग स्थानों पर लगभग 60 सेकंड के अंदर किए गए। इन हमलों में खामिनी और करीब 40 उनके जो सीनियर अफसर थे वो मारे गए। इसमें ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड के प्रमुख भी शामिल थे। अधिकारियों के मुताबिक दिन में हमला करने से सभी चौंक गए जिसका अमेरिका इजराइल को फायदा मिला। अगर शुरुआत में नेतृत्व पर हमला नहीं किया जाता तो वो भाग कर छिप जाते। ऐसा रिपोर्ट में दावा किया गया है। वैसे अभी तक यह साफ नहीं हुआ है कि आखिर ऐसी कौन सी मीटिंग थी जिसके लिए एक ही कैंपस में ईरान के सारे टॉप लीडर मौजूद थे। यह सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि इसे एक बड़ी भूल माना जा रहा है। वो भी ऐसे

समय में जब यूएस ने ट्रंप की हमले की धमकियों को पूरा करने के लिए इलाके में बहुत ज्यादा मिलिट्री फायर पावर जो है वो जमा कर ली थी। तो ये बात हुई ईरान के टॉप लीडरशिप पर हुए हमले की। अब जानते हैं कि ट्रंप और नेतन याू के बीच इस हमले की प्लानिंग कब से और कैसे की जा रही थी। तो सीएनएन की रिपोर्ट में यह बताया गया है कि क्रिसमस के समय से ही इस हमले की प्लानिंग शुरू हो गई थी। जब फ्लोरिडा में जो ट्रंप और नेतन्या की मीटिंग हुई थी। इस मीटिंग में नेतयाहू ने ट्रंप को बताया था कि ईरान अपने बैलेस्टिक मिसाइल प्रोग्राम को आगे बढ़ाने और अपनी न्यूक्लियर क्षमताओं को फिर से शुरू करने पर काम कर रहा है। इसी मीटिंग में ट्रंप नेतन्या को यह भरोसा दिलाया था कि वह मिसाइल साइट्स को खत्म करने के ऑपरेशन में इजराइल का साथ देंगे। इन्हीं सबके बीच ईरान में विरोध प्रदर्शन शुरू हुए जिसका फायदा इजराइल और अमेरिका को मिला। अमेरिका ने उस समय ईरान के आसपास अप

ने मिलिट्री एसेट्स का कलेक्शन बढ़ाया और उस इलाके में अमेरिकी एसेट्स रक्षा जो है वो सुनिश्चित की ताकि अगर भविष्य में ईरान बदले की कारवाही में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाए तो ज्यादा नुकसान ना हो। इसके बाद अमेरिका ने एयरक्राफ्ट कैरियर से सैकड़ों जेट, टैंकर्स, जहाज और सबमरीन मिडिल ईस्ट की तरफ रवाना किए। इसी तैयारी पर दुनिया के साथ-साथ ईरान की भी नजर थी और अमेरिका के साथ ईरान की डिप्लोमेटिक बातचीत में यह एक अहम पॉइंट बन गया। इस बीच टॉप इजराइली मिलिट्री और इंटेलिजेंस अधिकारियों का एक ग्रुप प्लान बनाने के लिए वाशिंगटन गया कि क्या प्लान होगा। फिर 11 फरवरी को वाशिंगटन में ट्रंप और नितन्याहू के बीच एक मीटिंग हुई। मीटिंग दोनों जो लोग हैं बिना किसी पब्लिक अपीयरेंस के ये मीटिंग हुई जो कि आमतौर पर ट्रंप की विदेशी जो अधिकारियों के साथ मीटिंग में बहुत कम देखने को मिलता है। इस मीटिंग के बाद अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी रही। ईरान के न्यूक्लियर और मिसाइल प्रोग्राम को लेकर दोनों देशों

के बीच सहमति नहीं बन पा रही थी। फिर 26 फरवरी को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में एक मीटिंग हुई जिसके बाद ट्रंप ने फाइनल जो है मिलिट्री एक्शन का आर्डर दे दिया क्योंकि यह मीटिंग सफल नहीं हो पाई थी और दोनों देश एक टेबल पर नहीं आ पाए थे और फिर दोनों ओर से हमले की जो तस्वीरें आई उसे पूरी दुनिया ने देखा। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक एक इजराइयली मिलिट्री अधिकारी ने कहा कि इजराइल रेगुलर तौर पर अपने दुश्मन नेताओं पर किसी ना किसी तरह से नजर रखता है। बेशक जब आप इस तरह का ऑपरेशन करते हैं तो आपको एक्स्ट्रा इंटेलिजेंस की जरूरत होती है और आपको कई एलिमेंट्स और फैक्टर्स को एक साथ जोड़ने की जरूरत भी होती है जो काफी मुश्किल हो सकता है। इजराइल अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे जंग में आगे क्या होने वाला है इस बारे में बहुत ज्यादा अनिश्चितता है। लेकिन उन तमाम अनसर्टेनिटी के बावजूद इजराइल अमेरिका के इस ऑपरेशन ने

यह साफ कर दिया है कि पिछले कुछ महीनों में ईरान के अंदर दोनों देशों के इंटेलिजेंस ने अच्छे से इनपुट डेवलप किए थे और मौका मिलते ही हमला करके तेहरान में खामई और करीब उनके 40 सीनियर ऑफिसर्स को निशाना बनाया। तो ये थी वो पूरी कहानी जिसे अंजाम देकर अमेरिका ने ईरान के सुप्रीम लीडर आया अली खमनी को मारा है। इस खबर में इतना ही बाकी जो इजराइल अमेरिका और ईरान के बीच जंग चल रही है उससे जुड़ी हर अपडेट हम आप तक लाते रहेंगे। आपके लिए तमाम जानकारी जुड़ाकर इस वीडियो के लिए स्क्रिप्टिंग की है हमारी साथी सुप्रिया ने। मेरा नाम विकास वर्मा है। देखते रहिए द ललन टॉक। शुक्रिया।

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