इजराइल ईरान युद्ध आपकी जेब पर भारी? पेट्रोल | डीजल | एलपीजी | खर्चा पानी

भारत में लगभग 85% क्रूड ऑयल यानी कच्चा तेल हम इंपोर्ट करते हैं। और उस क्रूड ऑयल में से लगभग 50% स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोस से आता है। और ईरान ने भी कसम खा ली है कि जाके बता दो इस रास्ते से आग लगा देंगे। तो फिर कहां से आएगा तेल? कैसे होगी पेट्रोल डीजल की डिमांड पूरी? अभी सिर्फ कितने दिन का तेल बचा है भारत के पास? क्या पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ जाएंगे? और हां, रशिया भी गेम में एंट्री ले चुका है। और रशिया इंडिया की दोस्ती ट्रंप को कितनी पसंद आएगी उसकी भी

बात करेंगे। बहुत कुछ अनपैक करेंगे। हाय, मैं हूं श्रुति और आप देख रहे हैं खर्चा पानी। टू यू बाय रजनीग आई टेल एंड सेंस एंड डीएसपी। भारत अपनी जरूरतों का करीब 50% कच्चा तेल ऐसे रूट से मंगाता है जहां अभी हालात बिगड़े हुए हैं। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोनस। उसी क्रूड ऑयल को रिफाइन करके बनता है पेट्रोल, डीजल, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स और यह सब। एनर्जी डाटा फर्म केप्लर का कहना है कि पहला झटका सप्लाई रुकने का नहीं बल्कि कीमतों का होगा। ब्रैंड क्रूड महंगा होगा, शिपिंग और इंश्योरेंस कॉस्ट बढ़ेगी। एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि घबराने की तुरंत जरूरत नहीं है क्योंकि भारत के पास कुछ समय तक काम चलाने लायक

स्टॉक मौजूद है। केप्लर के लीड रिसर्च एनालिस्ट सुमित रितोलिया कहते हैं कि अगर दिक्कत आती भी है तो स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व, कमर्शियल स्टॉक और रूस से मिलने वाले ऑप्शनल तेल के जरिए कुछ समय तक मैनेज किया जा सकता है। केप्लर के डाटा के मुताबिक भारत के पास करीब 10 करोड़ बैरल कच्चे तेल का स्टॉक है। इसमें हमारे स्ट्रेटेजिक रिजर्व भी शामिल है जो मंगलुरु, पडूर और विशाखापटनम में रखे गए हैं। नया सेंसोडेंट डीएसपी। नर्वस को प्रोटेक्ट करें और इनामल को रिपेयर। फील द रिलीफ विद सेंसडेंट डीएसपी। केप्लर के ही सीनियर रिसर्च एनालिस्ट निखिल दुबे ने मनी कंट्रोल से कहा कि हर दिन करीब 25 लाख बैरल तेल स्ट्रीट ऑफ हॉर्मोस से आता है जो हमारे कुल करीब 50 लाख बैरल रोज के इंपोर्ट का लगभग आधा है। ऐसे में यह स्टॉक

थ्योरी के हिसाब से 40 से 45 दिन तक काम आ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि कंपनियों के पास पेट्रोल डीजल जैसे तैयार फ्यूल का भी स्टॉक होता है जिससे असली कवरेज पीरियड थोड़ा और बढ़ जाता है। अब बात करते हैं लेकिन यह स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व यानी एसपीआर क्या है? स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व देश का इमरजेंसी ऑयल स्टॉक होता है जिसे सरकार मुश्किल के समय के लिए सुरक्षित रखती है। अगर वॉर हो जाए, सप्लाई रुक जाए या कीमतें अचानक से बढ़ जाए तो यही स्टॉक काम आता है। मतलब यह देश की एनर्जी सिक्योरिटी यानी ऊर्जा सुरक्षा का बैकअप प्लान है। अभी भारत के पास 5.3 मिलियन टन कच्चा तेल स्टोर करने की कैपेसिटी है। विशाखापटनम में 1.3 मिलियन मेट्रिक टन, बेंगलुरु में 1.5 मिलियन मेट्रिक टन और पडूर में 2.5 मिलियन मेट्रिक टन। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 9 फरवरी को राज्यसभा में बताया था कि अगर कोई बड़ा जिओपॉलिटिकल झटका आता है तो यह रिजर्व करीब 74 दिन तक देश की जरूरतें पूरी कर सकते हैं। वहीं

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी का मानना है कि किसी भी देश के पास कम से कम 90 दिन का स्ट्रेटेजिक स्टॉक होना चाहिए। सरकार ने जुलाई 2021 में दो और रिजर्व बनाने की मंजूरी दी थी। ओसा के चांदीखोल में 4 मिलियन मेट्रिक टन और कर्नाटक के पडूर में 2.5 मिलियन मेट्रिक टन यानी टोटल 6.5 मिलियन मेट्रिक टन इसकी नई कैपेसिटी की बात हुई थी। लेकिन अभी तक इस पर कोई काम आगे इतना बढ़ता हुआ नहीं दिखा है। अगर स्टेट ऑफ हॉर्मोस में सच में रुकावट आ जाती है तो भारत के लगभग 50% तेल इंपोर्ट और लगभग पूरी एलपीजी सप्लाई पर असर पड़ सकता है। केप्लर के मुताबिक रोज 25 से 27 लाख बैरल तेल इसी रास्ते से आते हैं। ज्यादातर इराक, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत से। लेकिन अब ईरान ने एक बड़ा ऐलान कर दिया है। ईरान की फोर्स इस्लामिक रेवोल्यूशनरी कार्ड कॉप्स के एक सीनियर ऑफिशियल ने 2 मार्च को कहा कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोस अब बंद कर दिया गया है। ईरानी मीडिया के मुताबिक उन्होंने वार्निंग दी कि अगर कोई जहाज इस रास्ते

से गुजरने की कोशिश करेगा तो उस पर फायरिंग की जाएगी। गार्ड्स के कमांडर इन चीफ के सीनियर एडवाइजर इब्राहिम जबारी ने कहा अगर कोई जहाज आगे बढ़ा तो रेवोल्यूशनरी गार्ड्स और नेवी उसे आग के हवाले कर देंगे। तेल की कीमतों में हलचल अभी से दिख रही है। कुछ दिन पहले तक क्रूड करीब $65 प्रति बैरल था जो अब 72 से $73 तक पहुंच गया है। रिस्टार्ट एनर्जी के मुताबिक भले ही सऊदी और यूएई अपनी बाईपास पाइपलाइन पूरी कैपेसिटी से चला दे फिर भी 80 से 100 लाख बैरल रोज की सप्लाई इफेक्ट हो सकती है। मतलब मामला सिर्फ मिडिल ईस्ट का नहीं है। ग्लोबल ऑयल मार्केट का मसला है। और आखिर में असर हम सब पर भी पड़ सकता है। जब से यह वॉर शुरू हुई है, कच्चे तेल की कीमतें करीब 9 से 10% बढ़ गई हैं। हमारे मतलब की बात यह कि क्या पेट्रोल डीजल महंगा होगा? इकोनमिक टाइम्स की रिपोर्ट के हिसाब से फिलहाल भारत में पेट्रोल और डीजल के रेट बढ़ाने के चांस थोड़े कम है। अभी अगर शॉर्ट टर्म की बात करें तो अब आप सोचेंगे कि कैसे? सरकार अभी कैलिबेटेड पॉलिसी पर चल रही है। मतलब जब अंतरराष्ट्रीय कीमतें कम होती हैं तो ऑयल कंपनियों को थोड़ा मार्जिन बनाने दिया जाता है। थोड़ा सा प्रॉफिट अपना इंक्रीस कर लीजिए और जब कीमतें बढ़ती हैं तो कस्टमर्स को झटका कम दिया जाता है। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड जैसी कंपनियां यही मॉडल फॉलो कर रही हैं। जब क्रूड महंगा होता है तो नुकसान थोड़ा सा झेलती हैं और जब सस्ता होता है तो मुनाफा भी कमा लेती हैं। इसीलिए कई बार ऐसा हुआ है कि बाहर पेट्रोल महंगा हुआ लेकिन भारत में रेट इतने नहीं बढ़े और जब बाहर सस्ता हुआ तो यहां भी दाम तुरंत कम नहीं किए गए। अब अगर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोस में रुकावट लंबी चली तो सरकार बैकअप प्लान पर भी सोच रही है। उसमें से एक ऑप्शन है पेट्रोल डीजल के एक्सपोर्ट्स पर रोक लगाई जा सकती है। इकोनमिक टाइम्स की रिपोर्ट के हिसाब से भारत अपने पेट्रोल का लगभग 1/3, डीजल का 1/4 और एिएशन टरबाइन फ्यूल यानी एटीएफ का करीब आधा हिस्सा एक्सपोर्ट करता है। जरूरत पड़ी तो रिफाइनरीज जो एटीएफ होता है उसको दूसरे प्रोडक्ट्स में भी डायवर्ट कर सकती हैं। अभी जो स्टॉक है उससे कच्चा तेल करीब 17-1 दिन, पेट्रोल, डीजल जैसे रिफाइंड फ्यूल 20-21 दिन और एलएनजी करीब 10-12 दिन चल सकती है। लेकिन अगर नए जहाज नहीं पहुंचे तो यह बफर धीरे-धीरे कम होता जाएगा। और यही आता है भारत का माय डियर फ्रेंड रशिया। NDTV प्रॉफिट की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार इस पर भी सोच रही है

ताकि आगे चलके एनर्जी सिक्योरिटी पक्की रहे। खासकर अब जब हर महीने दुनिया में एक नई जंग छिड़ जाती है। अब इसमें थोड़ी पॉलिटिक्स भी है। वो तो हर चीज में होती है। रिसेंटली भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील हुई थी। इंडिया और अमेरिका की तरफ से यह बात भी रखी गई थी कि इंडिया रशियन क्रूड ऑयल कम खरीदेगा। रटर्स की रिपोर्ट के हिसाब से जनवरी में भारत ने रूस से जो तेल खरीदा वो दिसंबर के मुकाबले डेली बेसिस पर करीब 12% कम था। और अगर दिसंबर की बात करें तो वह भी नवंबर के मुकाबले लगभग 22% गिर गया था।

लेकिन अगर अब यह हालात के चलते रशिया से फिर से ज्यादा क्रूड ऑयल खरीदना पड़ा तो क्या डोन्ड ट्रंप की डील पलट जाएगी या अमेरिका फिर कुछ रिएक्शन देगा यह तो समय ही बताएगा जो भी अपडेट रहेगा हम आप तक जरूर पहुंचाएंगे आज का खर्चा पानी यहीं तक अपना ख्याल रखिए और देखते रहिए द लन टॉप शुक्रिया

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