तेल अवीव धुआं-धुआं! ईरान की मिसाइलों ने इजरायल का गुरूर तोड़ा, US बेस पर हमला
वन कहते हैं कि तूफान से पहले की [संगीत] खामोशी सबसे डरावनी होती है। लेकिन तेल अवीब की उस रात खामोशी टूटी तो सिसकियों से नहीं बल्कि आसमान के फटने की आवाज से। ईरान ने इजराइल पर अब तक का सबसे घातक हमला किया है। इजराइली सेना का दावा है कि ईरान ने इस बार सिर्फ मिसाइलें नहीं दागी बल्कि [संगीत] उन मिसाइलों में क्लस्टर बम यानी गुच्छे वाले बम फिट किए थे। मध्य इजराइल के
अजोर कस्बे में एक मिसाइल करीब 7 कि.मी. की ऊंचाई पर हवा में फटी। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि इसके अंदर से 80 छोटे बम निकले जो 8 कि.मी. के दायरे में फैल गए। यह वो हथियार है जिसे रोकना आयरन डोम के लिए भी टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। पिछले कुछ दिनों में 11 मासूमों की जान जा [संगीत] चुकी है और हजार से ज्यादा लोग अस्पतालों में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। अब सवाल उठता [संगीत] है कि यह क्लस्टर बम आखिर इतना खतरनाक क्यों माना जा रहा है? आसान भाषा में समझते हैं। एक बड़ी मिसाइल जब हवा में फटती है तो
वह अपने अंदर से दर्जनों छोटे बम छोड़ती है। यह बम पूरे इलाके को शमशान बना सकते हैं। दुनिया के 111 देशों ने एक समझौते के तहत इसके इस्तेमाल पर रोक लगाई है क्योंकि ये अक्सर फटते नहीं है और सालों तक जमीन में दबे रहकर बच्चों और नागरिकों के लिए लैंडमाइन बन जाते हैं। ईरान की कदर एस मिसाइल जिसकी मारक क्षमता 2000 कि.मी. है। अब इसी क्लस्टर तकनीक से लेस बताई जा रही है। लेकिन ईरान के पास आखिर यह तकनीक आई कहां से? इजरायली खुफिया एजेंसियों का शक रूस [संगीत] और चीन की तरफ है। क्या यह दो महाशक्तियां ईरान के पीछे खड़ी है? यह सवाल पूरी दुनिया को डरा रहा है। ईरान के रेवोल्यूशनरी गार्ड्स आईआरजीसी ने इस हमले को
ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस फोर का नाम दिया है। उनके प्रवक्ता ने गर्व से दावा किया है कि एक ही लहर में 40 से ज्यादा मिसाइलें दागी गई। लेकिन खेल सिर्फ इजराइल तक सीमित नहीं है। खबरें डराने वाली है। कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया गया है। ईरान का दावा है कि उसने अमेरिका के रिपर ड्रोन को भी मार गिराया है। अगर यह सच है तो अमेरिका इस युद्ध में सीधे तौर पर कूदने के लिए मजबूर हो [संगीत] जाएगा। ट्रंप प्रशासन की चेतावनी और ईरान की जिद ने इस इलाके को बारूद के ढेर पर बिठा दिया है। इजराइल चुप बैठने वालों में से नहीं है। ईरान के अंदर मिसाइल फैक्ट्री और लॉन्च पैड्स पर इजराइली वायुसेना ने भीषण बमबारी की है। ईरान के कई शहरों से धुएं
के गुब्बार उठते हुए देखे गए हैं। लेकिन चिंता की बात यह है कि ईरान अब फतेह टू जैसी हाइपरसोनिक मिसाइलों का इस्तेमाल कर रहा है जो पलक झपकते ही निशाना साध लेती हैं। ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफिन ने साफ कहा है कि ईरान का मकसद सिर्फ सैन्य ठिकाने नहीं बल्कि आम नागरिकों के मन में खौफ पैदा करना है। तेलावी और यरूशलम की सड़कों पर सन्नाटा है और बंकरों में डरे हुए लोग बस एक ही [संगीत] सवाल पूछ रहे हैं। यह कब रुकेगा? ईरान और इजराइल की ये जंग अब केवल दो देशों की दुश्मनी नहीं रही। यह क्लस्टर बमों, हाइपरसोनिक
मिसाइलों और वैश्विक महाशक्तियों के अहंकार की लड़ाई बन चुकी है। आज तेल अवीब जल रहा है। कल इसकी तपिश पूरी दुनिया महसूस करेगी। लेकिन सबसे बड़ा सवाल अभी भी बाकी है। अगर ईरान ने अपनी उन मिसाइलों में क्लस्टर बम की जगह कुछ और यानी परमाणु हथियार लोड [संगीत] कर दिए तो क्या दुनिया 2027 का सूरज देख पाएगी? इस भीषण युद्ध की हर छोटी बड़ी खबर पर हमारी नजर बनी रहेगी। आप देखते रहिए वन इंडिया हिंदी। सब्सक्राइब टू [संगीत] वन इंडिया एंड नेवर मिस एन अपडेट। डाउनलोड द वन इंडिया ऐप नाउ। [संगीत]


