राम रहीम बरी, छत्रपति मर्डर केस में हाई कोर्ट का फैसला, जानें 5 बड़ी बातें
छत्रपति हत्याकांड के मामले में हाल ही में एक बड़ा मोड़ आया है। पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने डेरा सच्चा सौदा के मुखिया गुरमीत राम रहीम सिंह को इस मामले से बरी कर दिया। यह वो मामला है जिसमें 2002 में सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या कर दी गई। उन्होंने डेरा के कुछ साध्वियों के साथ दुष्कर्म और यौन शोषण के आरोपों को उजागर [संगीत] किया और इसी वजह से उनकी जान को खतरा माना गया। इस मामले में कुल चार आरोपी थे गुरमीत राम रहीम, कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल। 2018-19 में सीबीआई अदालत ने चारों को दोषी
ठहराते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने ये हत्या सुनियोजित साजिश मानते हुए बड़ा फैसला दिया था। इसके बाद राम रहीम ने फैसले के खिलाफ अपील दायर की। अब हाईकोर्ट [संगीत] ने उन्हें राहत दी जबकि अन्य तीन दोषियों की उम्र कैद की सजा बरकरार रखी गई। इस घटना की पृष्ठभूमि भी काफी गंभीर है। 24 अक्टूबर 2002 को पत्रकार रामचंद्र छत्रपति [संगीत] को उनके घर के बाहर गोली मार दी गई। 21 नवंबर को उनकी मौत हुई और इससे [संगीत] पहले अगस्त 2002 में एक अज्ञात पत्र में डेरा की साथियों के साथ यौन शोषण और दुष्कर्म [संगीत] के आरोप लगाए गए। रामचंद्र छत्रपति ने इस पत्र को अपने
अखबार में प्रकाशित किया। इस खुलासे के बाद उनके खिलाफ घातक साजिश रची गई। 2003 में रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति [संगीत] की याचिका पर पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। नवंबर 2003 में हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की। 2004 में डेरा सच्चा सौदा ने इस जांच को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली जिसे [संगीत] खारिज कर दिया गया। इसके बाद करीब 16 साल तक पंचकूला की स्पेशल सीबीआई कोर्ट में सुनवाई चली। हालांकि गुरमीत राम रहीम को
अब छत्रपति हत्याकांड से बरी कर दिया गया। लेकिन वे [संगीत] अभी भी दो साथियों के साथ दुष्कर्म मामले में 20 साल की सजा काट रहे हैं अरहतक की सुनरिया जेल में बंद हैं। यह राहत उन्हें केवल छत्रपति हत्या मामले में मिली ना कि अन्य मामलों में। हरिदमन छत्रपति ने हाईकोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे अपने पिता को न्याय दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे। उनका कहना है कि यह हत्या पूरी तरह से डेरा प्रमुख के आदेश पर की गई। इसलिए [संगीत] परिवार अब भी इस फैसले को चुनौती देने की पूरी तैयारी में है। इस फैसले से यह तो साफ हो
गया कि कोर्ट ने मामलों [संगीत] के सबूतों और कानूनी दलीलों का गहन विश्लेषण किया। हाईकोर्ट का यह [संगीत] निर्णय राम रहीम के लिए एक बड़ी राहत है। लेकिन पत्रकार के परिवार और समाज के लिए अब भी एक संवेदनशील और विवादस्पद यह मुद्दा बना है। आगे की कानूनी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट तक जाएगी और वहीं अंतिम नतीजा तय होगा। इस पूरे घटनाक्रम में समय, जांच और कोर्ट की सुनवाई ने यह स्पष्ट कर दिया कि न्याय प्रक्रिया लंबी और जटिल [संगीत] होती है और कई बार हाई
कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के बीच फैसले बदल सकते हैं। यह मामला मीडिया, कानून और सामाजिक जागरूकता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण और अब इसे सुप्रीम कोर्ट में देखा जाएगा। [संगीत] सब्सक्राइब टू वन इंडिया एंड नेवर मिस एन अपडेट। [संगीत] डाउनलोड द वन इंडिया ऐप नाउ।


