ईरान अमेरिका युद्ध: युद्ध में रूस की एंट्री, डर गया US!

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अब एक नई खुफिया जानकारी ने दुनिया की बड़ी ताकतों के बीच टकराव की आशंका बढ़ा दी है। अमेरिका ने दावा किया है कि रूस ईरान को ऐसी संवेदनशील टारगेटिंग जानकारी दे रहा है जिससे अमेरिका सैन्य ठिकानों पर हमला किया जा सकता है। इस खबर के सामने आते ही वाशिंगटन में हलचल बढ़ गई है और अमेरिका ने सीधे मॉस्को को कड़ा संदेश भेज दिया है। क्या है पूरा

मामला? रूस और ईरान के बीच कैसे हो रही है मदद? और इस पर अमेरिका की क्या प्रतिक्रिया आई है? आइए जानते हैं इस वीडियो में। मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के बीच अमेरिका ने एक बड़ा दावा किया है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक रूस ईरान को ऐसी टारगेटिंग जानकारी दे रहा है जिससे तेहरान को अमेरिकी सेना के ठिकानों को निशाना बनाने में मदद मिल सकती है। बताया जा रहा है कि इस

जानकारी में अमेरिकी युद्धपोतों, विमानों और क्षेत्र में मौजूद अन्य सैन्य संपत्तियों से जुड़ी सूचनाएं शामिल हो सकती हैं। अगर यह दावा सही साबित होता है। तो इसे मिडिल ईस्ट के संघर्ष में रूस की परोश भागीदारी का संकेत माना [संगीत] जा सकता है। इसी को लेकर अमेरिका ने रूस को साफ संदेश भेजे हैं। मिडिल ईस्ट के लिए अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटक ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वाशिंगटन ने मॉस्को से साफ तौर पर कहा है कि वो ईरान को [संगीत] टारगेटिंग जानकारी या किसी भी तरह की सैन्य मदद ना दें। अमेरिका का मानना है कि अगर

रूस इस तरह की जानकारी देता है तो इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है और अमेरिका सैन्य ठिकानों के लिए खतरा पैदा हो सकता है। इस दौरान पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड [संगीत] ट्रंप भी मौजूद थे। उन्होंने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर रूस ऐसी जानकारी दे भी रहा है तो इससे जंग की स्थिति में कोई बड़ा फर्क नहीं पड़ेगा। ट्रंप ने कहा कि पिछले हफ्ते ईरान के साथ जो हुआ उससे साफ है कि अगर उन्हें जानकारी भी मिल रही है तो उससे उन्हें ज्यादा फायदा नहीं हो रहा। हालांकि ट्रंप के इस बयान के बावजूद अमेरिकी प्रशासन इस मामले को

गंभीरता से देख रहा है। दरअसल मीडिया के मुताबिक रूस ने ईरान को ऐसी जानकारी दी है जिससे तेहरान को क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी युद्धपोतों, विमानों और अन्य सैन्य संस्थानों को [संगीत] निशाना बनाने में मदद मिल सकती है। इसे मिडिल ईस्ट के मौजूदा संघर्ष में रूस के शामिल होने का पहला संकेत माना जा रहा है। हालांकि रूस ने इस मामले पर अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस और ईरान के बीच पिछले कुछ सालों में रिश्ते काफी मजबूत हुए हैं। यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध में रूस को मिसाइलों और ड्रोन की जरूरत बढ़ी है और इसी वजह से उसने ईरान के साथ सैन्य सहयोग भी बढ़ाया है। दूसरी तरफ ईरान भी अंतरराष्ट्रीय दबाव और

प्रतिबंधों के बीच रूस को एक अहम सहयोगी के रूप में देखता है। इसी बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादमीर [संगीत] पुतिन ने ईरान के राष्ट्रपति से फोन पर बात भी की थी। इस बातचीत में पुतिन ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर चिंता जताई और कहा कि मिडिल ईस्ट से जुड़े मुद्दे का समाधान सैन्य कारवाही से नहीं बल्कि कूटनीतिक रास्तों से निकालना चाहिए। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिका, रूस और ईरान के बीच बढ़ती कूटनीतिक हलचल दुनिया की नजरों में बनी हुई है। अब देखना होगा कि

क्या रूस और ईरान के बीच सहयोग को लेकर अमेरिका की चिंता आगे किसी बड़े टकराव में बदलती है या फिर कूटनीति के जरिए स्थिति को संभाल लिया जाता है। फिलहाल के लिए इतना ही। देश और दुनिया की हर बड़ी खबर के लिए देखते रहिए न्यूज़ नेशन। नमस्कार। न

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