स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर POCSO एक्ट में FIR दर्ज, नए वीडियो में क्या खुलासा हुआ?

जिस तरीके से उन्होंने हमसे कहा कि यार कि स्वामी जी हैं एक बहुत ज्यादा है उनको ठीक करना है थोड़ा सा उसमें आप करिएगा तो हमने कहा क्या है तो कहने लगे वो यार तुम अपनी बेटी के लिए हमने कहा यार कैसे सोच सकते हो मतलब बड़े भैया तुम ये अपनी बच्चियों को लेकर के ऐसे तरीके से करते कह नहीं हम आपकी पूरी तैयारी वो करेंगे सपोर्ट करेंगे सुरक्षा की गारंटी लेते हैं सारी चीजें हैं। एक स्वामी जी को थोड़ा ठीक करना है। आरोप है कि यह शब्द आशुतोष पांडे ने स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद के बारे में रमाकांत दीक्षित से कहे। आशुतोष पांडे वही शख्स हैं जिन्होंने स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद पर बच्चों से

यौन शोषण का आरोप लगाया है। आशुतोष पांडे श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं। रामभद्राचार्य के शिष्य भी हैं और यूपी पुलिस के रिकॉर्ड के मुताबिक हिस्ट्री शीटर भी। स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद पर लगे आरोपों के मामले में 21 फरवरी को एफआईआर दर्ज हुई। तभी से प्रयागराज पुलिस इस केस की जांच में जुटी हुई है। इस पूरे मामले की शुरुआत प्रयागराज माघ मेले में 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन हुई। जब अभिमुक्तेश्वरंद और प्रशासन के बीच विवाद हुआ था। इसके छ दिन बाद यानी 24 जनवरी को

आशुतोष पांडे ने पुलिस कमिश्नर से शिकायत की। शिकायत में आरोप है कि अभिमुक्तेश्वरानंद ने माघ मेले 2026 और महाकुंभ 2025 के दौरान बच्चों से यौन शोषण किया। मामला पॉक्सो कोर्ट पहुंचा। 13 फरवरी को दो बच्चों को कोर्ट में पेश किया गया। 21 फरवरी को उनके बयान दर्ज किए गए। कोर्ट के आदेश पर उसी दिन प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज की गई। एफआईआर में शंकराचार्य, उनके शिष्य मुकुंदानंद और कुछ अज्ञात लोगों

को आरोपी बनाया गया। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक जिन दो बच्चों को कोर्ट में पेश किया गया उनमें से एक यूपी के हरदोई का रहने वाला है। बच्चे के पिता के मुताबिक करीब एक साल पहले उनका बेटा पड़ोस के गांव के एक शख्स के साथ प्रयागराज गया था। वहां दान और दीक्षा के नाम पर उसका आधार कार्ड लिया गया। पिता के मुताबिक उसके बाद क्या हुआ उसकी जानकारी उनको नहीं है। उन्होंने बताया कि बेटे ने कभी किसी तरह की अनहोनी का जिक्र भी नहीं किया। जब पुलिस की एक टीम हरदोई पहुंची तब पिता को इस चीज के बारे में जानकारी मिली। हालांकि इस मामले पर बच्चे का क्या कहना है यह अब तक सामने नहीं आया है। हां, इस बीच एक

बयान जरूर आया है। यह बयान शाहजहांपुर के रहने वाले रमाकांत दीक्षित का है। इनका कहना है कि आशुतोष पांडे ने इनसे बात कर स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद पर झूठा आरोप लगाने के लिए कहा था। जिसके लिए इन्होंने मना कर दिया। देखिए आशुतोष पांडे से मेरा कोई व्यक्तिगत विवाद नहीं है कि जो आशुतोष पांडे के खिलाफ मैं लिखूं बयान देने आया हूं या बयान दिया है। हां, हालांकि मैं यह कह रहा हूं कि मैं वहां अपने घर पे रहता हूं। वहां से निकला था ये रास्ते में वहां बैठा था और उसके बाद में बाइक पे अपनी अपने अपने घर में बात कर रहा था तो तीन लोग आए थे और जो जिनको मैं जानता नहीं हूं उन्होंने हमारे पिताजी का नाम लिया तोकि पिताजी का जब नाम लेते हैं तो समझ में आता है कि कोई खास होगा तो उन्होंने नाम लिया उनसे बातचीत हुई मेरी फिर बातचीत होते उन्होंने कहा कि ऐसा है कि

एक मामला है यार आप करा दीजिए हमने कहा क्या मामला है क्या कराना है तो उन्होंने कहा कि ऐसी बात है आपके एक बहुत अच्छे खास है उनसे हम बात कराते हैं तो उन्होंने कहा किससे बात करानी है बात कराइए तो उन्होंने अपने फोन से अपनी मेरी बात कराई तो उन्होंने उधर वो बोले कि मैं आशतोष पांडे बोल रहा हूं। तो हमने कहा बताइए जी कहने लगे कि पहचाने हो? तुमने नहीं पहचान पाए। बोले पहचान ये देखिए तो हमने कहा अच्छा जी भैया प्रणाम आवाज समझ में आ गई तो हमने कहा जी भैया प्रणाम बताएं। कहने ठीक है वो सब बढ़िया है। हमने कहा वो हम आ नहीं पाए। तो हमने कहा इतना ज्यादा हमारा क्लोजपन भी नहीं रहा। लेकिन जिस तरीके से उन्होंने हमसे कहा कि यार कि स्वामी जी हैं एक वो बहुत ज्यादा हैं। उनको ठीक

करना है थोड़ा सा उसमें आप करिएगा। तो हमने कहा क्या है? तो कहने लगे वो यार तुम अपनी बेटी के लिए हमने कहा यार कैसे सोच सकते हो? मतलब बड़े भैया तुम ये अपनी बच्चियों को लेकर के ऐसे तरीके से करते कह नहीं हम आपकी पूरी तैयारी वो करेंगे सपोर्ट करेंगे सुरक्षा की गारंटी लेते हैं सारी चीजें हैं तो शंकराचार्य जी से आपकी मुलाकात हुई क्या बातचीत हुई मेरी बातचीत शंकराचार्य जी से मुलाकात करने का इतना था कि मैं अपनी बात को स्पष्टीकरण दे सकूं कि मेरा ना तो उनसे कोई लेना देना है ना तो इस मठ से और ना शंकराचार्य जी से मैंने किसी प्रकार का कोई आरोप नहीं लगाया किसी पे और ना मैं लगाऊंगा भविष्य में। वहीं इस पूरे मामले पर अपना पक्ष रखते हुए स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि अगर देश में शंकराचार्य पर

कहानी बनाकर इतना बड़ा कलंक लगाया गया है तो यह उतना ही गंभीर प्रश्न है। लड़के आ गए इनके पास फिर चीजें शुरू हो गई। उसके बाद फिर पुलिस को ईमेल, फिर इनको ईमेल, उनको ईमेल और अब यह कहा जा रहा है चैनलों पर हमने देखा कि कुछ लोग कह रहे हैं कि पुलिस ने दर्ज नहीं किया। यह तो कोर्ट के आदेश से दर्ज हुआ। बात यह है कि यही सबसे बड़ा सवाल है। सबसे बड़ा सवाल यही आता है कि पुलिस ने मामला क्यों नहीं दर्ज किया? देखिए पासो एक्ट के मामले में आप लोग कहते हैं इसमें तो गिरफ्तारी जरूर होती है। लेकिन आप इस बात को भूल जाते हैं कि पासो एक्ट में अगर कोई लड़का आया है कह रहा है मेरे साथ दुराचार हुआ है तो पुलिस को तत्काल दर्ज कर लेना है। मान लेना है कि ऐसा हुआ है। तो आप बताइए कि पासो एक्ट का मुकदमा जब पुलिस के थाने में गया। यह महाराज जी महाराज जो आप लोग जी महाराज जी महाराज कह रहे हैं वो लेके गए तो आप बताइए कि पुलिस ने

क्यों दर्ज नहीं किया? हम यही चोर की दाढ़ी में तिनका निकल करके आ जाता है कि पासक्सो का मुकदमा लेकर के एक व्यक्ति दो लड़कों को लेकर के गया कि नाबालिग है इनके साथ बड़ा दुराचार हुआ है। फिर भी पुलिस दर्ज नहीं करती है। क्यों नहीं करती है? पास्को जैसा मुकदमा उसमें तो तत्काल पुलिस को सक्रिय हो जाना चाहिए। जो बच्चा कह रहा है उसी को मान लेना चाहिए और मान करके तत्काल उसका मेडिकल कराना चाहिए। तत्काल उसको जोइल बोर्ड को सौंप देना चाहिए। तत्काल उस पे कार्यवाही करनी चाहिए। तो सवाल यह है कि पुलिस ने क्यों नहीं दर्ज किया? क्यों सुनिए सुनिए क्योंकि चोर की दाढ़ी में तिनका होता है। पुलिस ही एक कहानी बना रही थी इसलिए पुलिस को डर था कि गड़बड़ ना हो जाए। ऐसा करते हैं कि कोर्ट से आदेश करवा के तब करते हैं। तब कोर्ट से आदेश करवा करके तब ये

दाखिल कर दिया गया मुकदमा। अब उनके पास ढाल हो गई कि साहब हम तो कोर्ट से आए हैं। हमने डायरेक्ट नहीं किया। क्यों नहीं किया? सबसे बड़ा सवाल यही है कि पासो जैसा मुकदमा बच्चों के साथ अत्याचार अन्याय का मामला और पुलिस के पास वह बच्चे जाते हैं। वह कह रहा है कि मैं तो बच्चों को लेके गया था और इन्होंने दर्ज नहीं किया। कृपया हमारा सुने। फिर वो कहता है कि मैंने दूसरी तारीख को ईमेल किया बड़े अधिकारियों को। बड़े अधिकारी ईमेल पाने के बाद उन्होंने भी कुछ नहीं संज्ञान लिया। क्यों नहीं लिया? क्योंकि बड़े अधिकारी पहले से मिले हुए थे। वह सोच रहे थे कि हमारी निंदा ना हो जाए इसलिए पहले कोर्ट से ले लेते हैं। चुप रह जाते हैं। तब जाकर के कोर्ट में मामला गया है। तो महाराज समझ रहे हैं महाराज जी और कोर्ट में

जब धारा 22 के अंतर्गत हमने सारा मामला रख दिया अपने प्रमाण सामने रख दिए। उसके बाद जो आदेश आया उसमें उसका कोई उल्लेख ही नहीं किया गया कि इनकी तरफ से भी कोई बात कही गई है। और 14 पन्ने का लंबा जैसा कि वकीलों ने आप लोगों से बताया ही है कि इतना लंबा जजमेंट लिखा। सुप्रीम कोर्ट आई वोट जाने कितनी रूलिंग भर दिया। लेकिन यह नहीं बताया कि वह लड़के हमारे पास आए कैसे? कहां से आए? जब हमारे विद्यालय के छात्र नहीं थे। हमारे से उनका लेना देना कोई संबंध नहीं था। तो कैसे वह आ गए? तो यह जो बात है यह अपने आप में साबित करती है कि यह पुलिस की सह पर मुकदमा हिस्ट्री सीटर महाराज जी महाराज जी महाराज जी कर रहे हैं और साथ ही साथ उस पुलिस को निर्देश कहां से मिल रहा है इसका भी अनुमान हो जा रहा है। वहीं आशुतोष पांडे ने इसके जवाब

में क्या कहा सुनिए। वो एक कहावत सुनी है। खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे। एक कहावत है। सीधी-सीधी है। अभी अभी दो दिन पहले चिल्ला रहे थे कि हम एफआईआर हमारे खिलाफ नहीं दर्ज होगी। हमने कोर्ट में धारा 22 दे दी है। यह दे दिया है। वह दे दिया है। सूची जो दिखाई जा रही है 21 मुकदमों की वह एक कंप्यूटर से इनके द्वारा तैयार कराई गई है। जिस पे थाना कानला की मोहर लगी है। उसी थाना कांडला में इनके तीनों शिक्षकों के खिलाफ और एक नामजद शिष्य है। एफआईआर दर्ज हो गई है। हम न्याय चाहते हैं। जो भट्टू खैरे हैं उनका न्याय चाहते हैं। उनकी सुरक्षा भी होनी चाहिए। ये लोग हत्या कराने का पूरा प्रयास कर रहे हैं। मेरी भी हत्या हो सकती है कभी भी। मैं किसी तरह से छुप-छुप के कहीं ना कहीं न्यायालय के सामने और आप लोगों के सामने पैरवी कर रहा हूं क्योंकि कई बार हमले करा चुके हैं हमारे ऊपर और हमले का मुकदमा भी थाना कालना में दर्ज हुआ है। उधर मीडिया

रिपोर्ट्स के मुताबिक स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद को डर है कि प्रयागराज पुलिस उनकी गिरफ्तारी कर सकती है। इस पूरे मामले पर स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद के वकील श्रीनाथ त्रिपाठी का कहना है कि एफआईआर में सबूतों का जिक्र नहीं था। सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि बिना पुख्ता सबूत के गिरफ्तारी ना की जाए। एफआईआर में और न्यायालय के आदेश में सबूतों का जिक्र नहीं था। तो मुझे लगता है कि पुलिस अभी सबूतों को जुटाएगी। सबूत जुटाने के बाद ही वह गिरफ्तारी की बात सोचेगी। और सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने गाइडलाइंस में और अपने डायरेक्शन में कहा है कि बिना सफिशिएंट एविडेंस के आप गिरफ्तारी कोई जरूरी चीज नहीं है। गिरफ्तारी तब की जाए और मजबूरी हो तब की जाए जब सफिशिएंट एविडेंस आ जाए। तो मुझे लगता है कि इसका

पालन वो करेगी। जहां तक सूचना मिली है कि आज उन्होंने लखनऊ में शायद बच्चों का बयान वगैरह लिया है तो आगे जैसा भी एविडेंस बिठा लेंगे तो आएंगे अगर और ना करना ये उनकी समझदारी पर डिपेंड करता है। ना करते तो ये सामान्य नागरिक के रूप में मेरी राय है कि ना करें और अगर करते हैं तो ये उनके लिए बहुत खतरनाक होगा। आग से खेलना होगा और कुछ नहीं होगा। फिलहाल स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। इस खबर में इतना ही। खबर लिखी है हमारी साथी रक्षा ने। देखते रहिए द लल्लन टॉप। शुक्रिया।